बुजुर्गों की मदद के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती की गई है। इसके लिए उन्होंने बकायदा सभी थानों पर एक-एक महिला आरक्षक को इसी कार्य के लिए नियुक्त भी कर दिया है।
"ममता दीदी का खेल तो देखो! मरीजों को अगर हॉस्पिटल में भरती करना पड़ेगा तो परिचय तो देना ही पड़ेगा! लेकिन ममता नही चाहती की उसके प्यारे रोहिंगया को कोई पहचान ले।"