साल 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान 19-20 मार्च की रात आर्मी की ड्रेस में आए हमलावरों ने 35 सिखों को मौत के घाट उतार दिया था वहीं 36 वीं मौत इस भयंकर मंजर को देख, एक महिला को हुए कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी।
पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने रविवार को कहा कि अगर राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के पद पर नहीं लौटते हैं तो पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए ‘सक्रिय और पूर्णकालिक नेतृत्व’ तलाशने की जरूरत है।
"भारत और पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्तों के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं और जब तक भारत में मोदी की सरकार रहेगी, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ होना असंभव सी बात है।"
"सवर्ण हिंदुओं के बार-बार वारिस पठान की आलोचना करने में शर्म आनी चाहिए, जबकि वे जिस पार्टी को सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से सत्ता सौंपी थी। वह खुले तौर पर नरसंहार की धमकी देते थे। बाहर सड़कों पर आने और आरएसएस को उखाड़ फेंकने के बजाय, ट्विटर और फेसबुक पर बकोली करवा लो बस इनसे।"
कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून जैसे विषयों से विपक्षी राजनीतिक दलों को इन विरोध प्रदर्शनों से एक हाथ की दूरी बनाए रखनी चाहिए और जन आंदोलनों को जबरन अपना बनाने की कोशिश कोशिश नहीं करनी चाहिए।
डॉ. कफील खान के मामा नुसरुतुल्ला अहमद वारसी उर्फ दादा के घर के गेट के सामने एक युवक काफी देर से खड़ा था। उनके गेट के पास आते ही वह उनसे बातचीत करने लगा। बातचीत करते हुए ही वह युवक उनके साथ घर में अंदर गया। थोड़ी देर बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी और...
“गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली चुनाव के कैंपेनिंग के दौरान कहा कि ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि बटन यहाँ दबे और करंट शाहीन बाग के अंदर लगे। क्या कोई गृह मंत्री ऐसा भाषण दे सकता है? इसलिए मैं कहती हूँ कि अमित शाह भारत के होम मिनिस्टर नहीं हैं, वह देश के हेट मिनिस्टर का काम कर रहे हैं।”
एक यूजर ने तो पूरे गैंग की ही पोल खोल दी और लिखा, "JNU वालों में ये ख़ास खूबी है कि ये जो चीज नहीं होती उसे भी देख लेते हैं, जैसे नकाब के पीछे ABVP 'गुंडे', बिना ड्राफ्ट के NRC...।"
शरजील इमाम के समर्थन में जामिया के छात्रों द्वारा रैली निकालने के बाद अब इन छात्रों ने ऐलान किया है कि वो लोकतंत्र को नहीं, अल्लाह को मानते हैं। फेसबुक पर Students of Jamia नाम के पेज ने लिखा है कि ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसुल्लाह, लोकतंत्र के खिलाफ है।
"सरकार को संविधान के अनुसार इसके प्रारूप में परिवर्तन करने होंगे। संविधान में स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती। जब उद्धव पूरे कानून को ध्यान से पढ़ेंगे तब उन्हें समझ आएगा कि NPR और NRC में बहुत फर्क नहीं है। एक बार आप NPR पर सहमत हुए तो NRC को नहीं रोक पाएँगे।"