CCTV फुटेज लेने के लिए जामिया नगर के एसएचओ को यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास भेजा गया। जब पुलिस वहाँ पहुँचीं, तब भारी संख्या में जामिया के छात्र जमा हो गए। उन छात्रों ने CCTV फुटेज देने से इनकार कर दिया। लेकिन हैरत की बात यह है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन भी साक्ष्य के तौर पर CCTV रिकॉर्डिंग देने से इनकार कर रहा है।
बात सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस या UP में हुए दंगों की नहीं है। PFI का कनेक्शन पूरे देश में है और इसकी गतिविधियाँ देशद्रोही हैं। दिल्ली पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने साथ मिलकर जामिया मिलिया इस्लामिया में हुए दंगों के कारणों की जाँच की थी। इस पूरे मामले में भी PFI के तार जुड़े मिले थे।
जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर मदर टेरेसा का आध्यात्मिक सलाहकार था। उसने 11 साल के एक लड़के का यौन शोषण किया - एक बार नहीं, हजारों बार। उसके खिलाफ यौन संबंधों के बारे में जब रिपोर्ट आई थी, तब मदर टेरेसा ने सभी आरोपों को असत्य बताया था।
रहमान मलिक जाल में फँस गए और उन्होंने इस झूठी कहानी को सच मान लिया। उन कथित 'क्षेत्रीय अभिनेत्रियों' में मिया खलीफा की फोटो भी थी, जिसे मलिक पहचान ही नहीं पाए। पोर्न स्टार मिया खलीफा के लिए लिखा- "गॉड ब्लेस हर।"
तनवीर ने पहले शुभांकर से दोस्ती की, उसके साथ जमशेदपुर के टॉकिज में जाकर फिल्म देखी, उसके बाद नदी किनारे जाकर गाँजा पिया, और फिर समलैंगिक संबंधों के लिए दबाव बनाने लगा... जब शुभांकर ने ऐसा करने से मना किया, तो उसकी चाकू घोंप कर हत्या कर दी.....
"तीस साल से राजनीति कर रहा हूँ और अब इस तरह के राजनीतिक माहौल में हमारे लिए कोई जगह नहीं बची है। मैं पार्टी के किसी नेता से नाखुश नहीं हूँ लेकिन ऐसी राजनीतिक परिस्थिति बनी है कि इसके बाद अब मेरे जैसे लोगों के लिए सियासत में कोई जगह नहीं।"
पत्थरबाजी के कारण पप्पू राठौर की हत्या होती है। 43 लोगों पर केस होता है लेकिन पकड़े जाते हैं सिर्फ पप्पू खां और हाशिम, बाकि सभी फरार। इसके बाद पीड़ित परिवार पर केस वापस लेने का दबाव, और इनकार करने पर धमकी के साथ-साथ उनके बच्चों से मारपीट, बहू-बेटियों से छेड़छाड़। हार मान कर सभी घर बेचने को तैयार!
सोशल मीडिया में एक तस्वीर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में 72 वर्षीय शिया मौलवी असद रज़ा हुसैनी के एक हाथ पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है और शरीर पर घाव के निशान हैं। सहानुभूति बटोरती इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जो दंगाइयों, मीडिया-सोशल मीडिया गिरोह के प्रोपेगेंडा को उजागर करती है।
'कब्रगाह' साबित हो रहा कोटा का अस्पताल, 14 और मौत के साथ एक महीने में 91 बच्चों की गई जान। NCPCR की टीम ने हॉस्पिटल में देखा कि ख़िड़कियों में शीशे नहीं, दरवाजे टूटे हुए हैं। अस्पताल के कैंपस में ही सुअर घूमते हैं।
स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट और ड्राइवर सहित कई पदों पर वैकेंसी निकली है। आवेदक विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग आवेदन भी कर सकते हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए जो पद आरक्षित हैं, उन्हें 'स्थायी निवासियों' के लिए रखा गया है।