30 सितंबर को पीड़िता के घर पर मारपीट करने के मामले में उसने एसपी को प्रार्थना-पत्र दिया था। आरोपितों ने हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मामत ले रखी थी, इसलिए उनकी गिरफ़्तारी नहीं की गई। इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के साथ पुलिस विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
''उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया था क्योंकि मैंने उनके दुर्व्यवहार का वीडियो बना लिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे वो सबूतों को मिटा सकें। इससे पहले सितंबर महीने में भारी बारिश के दौरान भी मुझे घर से निकाल दिया था पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद वे अपने घर में वापस लौट पाई थीं।''
CAA का किसी भी सूरत में भारत के नागरिकों से सरोकार नहीं है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। बावजूद इसके हिंसा। लगता है नागरिकता संशोधन कानून तो महज बहाना है। साजिशें गहरी हैं। इन साजिशों का पता लगाया जाना वक्ती जरूरत है।
अपने ट्वीट में अपर्णा यादव ने जामिया मिलिया, NRC बिल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है?”
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।