नावेद पेशे से एक वकील है और लॉ स्टूडेंट भी। पूरी साजिश में नावेद ने ही दोनों हत्यारों को नेपाल पहुँचाने की जिम्मेदारी थी। साथ ही उनके मदरसे में ठहरने और उनके इलाज में भी उसने मदद की थी।
जमात-ए-इस्लामी कश्मीर में स्थानीय स्तर पर एक समानांतर स्कूली शिक्षा प्रणाली स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों में सरकार विरोधी नैरेटिव फैलाना और नफरत भरना है।
उन्होंने बताया कि अशफ़ाक़ के पास पिस्टल थी, जबकि दोनों चाकू पैंट में रख रखा था। आधा किलो वाले मिठाई के डिब्बे में सिर्फ़ रसीद थी। इसकी वजह थी कि वो ख़ुद चाहते थे कि जाँच में उनका नाम सामने आए।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा, "हमें प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। वह दिन दूर नहीं जब पीओके में भी तिरंगा (या निशान) फहराया जाएगा, वही निशान जिसके चलते श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी जान दी थी।"
"कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने स्वार्थ के लिए जनता में वोटों के बँटने के भय को खूब प्रचारित किया। इससे बीएसपी के समर्पित वोटर तो कतई नहीं डिगे परन्तु अन्य वोटर जरूर भ्रमित हो गए। इसका परिणाम यह हुआ कि बीएसपी इस बार हरियाणा विधानसभा आमचुनाव में सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी।"
अभी भी भाजपा और शिवसेना का गठबंधन बड़े आराम से बहुमत के लिए ज़रूरी 145 के आँकड़े के पार दिख रहा है, लेकिन शिवसेना ने साफ़ कर दिया है कि वह भाजपा से और दबने वाली नहीं है।
इस ऑडियो में हत्यारे के पिता-बीवी दोनों लगातार अशफाक से गुजरात आने की गुजारिश करते सुनाई पड़ रहे हैं। लेकिन अशफाक कह रहा है कि गुजरात आना उसके लिए पॉसिबल नहीं हैं।
महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश को लेकर अनुमति के सम्बन्ध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। मामले में अगली सुनवाई 5 नवम्बर को होनी है।