निर्मोही अखाड़ा ने खुद को पंजीकृत संस्था बताते हुए कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर अपना दावा उसके कई वर्षों बाद 1961 में किया था। कई दशक पहले मुस्लिमों ने वहाँ नमाज पढ़ना बंद कर दिया था।
दिग्विजय अकेले नहीं हैं कॉन्ग्रेस में। पार्टी के तौर पर जहाँ कॉन्ग्रेस ने दोनों सदनों में बिल के खिलाफ मतदान किया, वहीं लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली थी।
इस वर्ष की शुरुआत में चार ननों का सिर्फ़ इसीलिए ट्रांसफर कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने बलात्कार आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था। मुलक्कल को पिछले वर्ष सितम्बर में गिरफ़्तार किया गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद अनुयायियों ने बड़ी संख्या में इकठ्ठा होकर उसका स्वागत किया था।
नामग्याल ने कहा कि विपक्ष के लोग सिर्फ़ एक रोड और छोटे से मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं। अगर असली करगिल देखना है तो ज़न्स्कार, वाखा, मुलबेक, शर्गोल, आर्यन घाटी आदि जगहों पर जाना चाहिए। उन्होंने कहा की 70% भू-भाग के लोग निर्णय का स्वागत करते हैं।
जब 1977 में जॉर्ज फर्नांडीस ने जेल से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा तो सुषमा ही दिल्ली से मुजफ्फरपुर पहुॅंचीं और हथकड़ियों में जकड़ी जॉर्ज की तस्वीर दिखा प्रचार किया। उन दिनों 'जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा' का उनका दिया नारा सबकी ज़ुबान पर था।
सुषमा स्वराज ने ट्विटर डिप्लोमेसी का दरवाजा खोला। ट्विटर पर सक्रिय रहते हुए लोगों की मदद करना इतना चर्चित हुआ कि वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें 'सुपरमॉम ऑफ द स्टेट' कहा। उनके देहांत के साथ ही भारतीय राजनीति का एक शालीन अध्याय समाप्त हो गया है।
आर्टिकल 370 हटाने के मोदी सरकार के इस कदम का कई कॉन्ग्रेस के नेताओं ने भी पार्टी लाइन से हटकर समर्थन किया है। मिलिंद देवड़ा और जनार्दन द्विवेदी के बाद अब इस कड़ी में राहुल गाँधी के करीबी और कॉन्ग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी जुड़ गया है।
"हम भारत की विधायी इकाई में अपना प्रतिनिधित्व माँग रहे हैं। जम्मू-कश्मीर को बाँटकर बनाए गए दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में रिजर्व सीटों पर गिलगिट-बाल्टिस्तान के लिए भी सीटें होनी चाहिए। हमारा मानना है कि भारत की राज्यसभा और लोकसभा में भी हमारा प्रतिनिधित्व होना चाहिए। हम भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।"
पाकिस्तान के संसद में इमरान खान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में भारत के सभी नागरिकों के अधिकार समान नहीं हैं।
याचिका में कहा गया है कि आर्टिकल 370 को हटाने के लिए सरकार ने आर्टिकल 367 में जो संशोधन किया है, वह असंवैधानिक है। सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक ढंग से ये बदलाव किया। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से अपील है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए।