योगिता इस पेशे में किसी ‘स्टीरियोटाइप को तोड़ने’ या ‘पितृसत्ता को चुनौती देने’ के लिए नहीं हैं- यह उनकी ज़रूरतों को पूरा करने का सबसे बेहतर तरीका भर है।
वीडियो में आप देख सकते हैं कि जिस वक्त वो महिला साँस लेने के लिए रुकती है उस समय लोग उसे गालियाँ देना शुरू कर देते हैं। जबकि सभी लोग हो-हल्ला मचाने के साथ-साथ उसका उपहास उड़ा रहे हैं। इस वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति नाचता हुआ भी दिखता है।
बृजेंद्र सिंह केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। लेकिन बेटे को टिकट मिलने से चौधरी बीरेंद्र सिंह नाराज हो गए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से राज्यसभा और मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश तक कर डाली है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की आशिकी लैला-मजनू जैसी है। जब इनकी दास्तां लिखी जाएगी तो मोहब्बत की जगह नफरत लिखी जाएगी। उसमें लिखा जाएगा कि जब से ये दोनों साथ आए हैं, हिंदुस्तान में हिंदू-मुस्लिम तनाव में हैं।
चिठ्ठी के मुताबिक, मुरली मनोहर जोशी ने सड़क किनारे पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बड़े-बड़े पोस्टरों का जिक्र करते हुए लिखा कि जिन सिद्धातों को लेकर उत्साह के साथ पार्टी बनाई गई थी, आज घर के लोगों ने ही अपमानित करके हमें बाहर कर दिया।
रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा में हिस्सा लेने वाले लोग जब अपने घर लौट रहे थे, तभी उन पर कुछ लोगों ने अपनी छतों पर से पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। अचानक पत्थरों की बौछार से शोभायात्रा में शामिल लोगों में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।
सिकनी गाँव में जुलूस निकालने के दौरान एक समुदाय के विरोध किए जाने के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और फिर पत्थरबाजी भी होने लगी। इस पथराव की वजह से जुलूस में शामिल लोगों के अलावा कई अधिकारियों को भी चोटें आई है।
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से एक भारतीय डॉ प्रीती यादव ने मुश्किल में फंसे दूसरे भारतीय परिवार की मदद के लिए सुषमा स्वराज से अपील की है।
फडणवीस ने कहा कि कॉन्ग्रेस के अशोक चव्हाण लोगों को रैलियों में लाने के लिए किराया दे रहे हैं। हम किराए पर मंच और कुर्सियाँ लाते हैं, लेकिन अशोक चव्हाण की शुक्रवार की रैली में नेताओं को किराए पर लाना पड़ रहा है। पूरा माहौल NDA के पक्ष में है।
इस समस्या से उबरने के लिए पूरी दुनिया को एक होने की जरुरत है, हम सब को अपने अपने स्तर पर कोशिश करते रहने की जरुरत है। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे भी यही मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके। लेकिन साल के किसी एक दिन को इस तरह की दिवस मनाकर हम इस विकराल समस्या को नही सुलझा सकते, इसके लिए पूरे वर्ष सतत प्रयास करते रहने की जरूरत है।