‘The Wire’ फिर से झूठ बोलते पकड़ा गया, फर्जी निकला ‘कश्मीर में अख़बार नहीं छप रहे’ का दावा

'The Wire' और फर्जी प्रोपेगंडा का पुराना रिश्ता किसी को दोबारा बताए जाने की ज़रूरत नहीं है। इसके पहले वह कश्मीर में जीवनरक्षक दवाओं की कमी का भी दावा कर चुका है, जोकि बाद में झूठा ही निकला था।

जम्मू-कश्मीर से 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पत्रकारिता का समुदाय विशेष लगातार वहाँ के हालात और सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर अनर्गल झूठ बोले जा रहा है। इन्हीं झूठों की श्रृंखला में The Wire का वह वीडियो है जिसमें ‘वरिष्ठ पत्रकार’ जयशंकर गुप्ता, प्रेम शंकर झा और उर्मिलेश के पैनल डिस्कशन में दावा किया जाता है कि 5 अगस्त (अनुच्छेद 370 हटने का दिन) से कश्मीर में कोई समाचार पत्र प्रकाशित नहीं हुआ है। The Wire के इस डिस्कशन में कश्मीर की कथित स्थिति को “(1975-77 के) आपातकाल से भी बदतर” भी इसी आधार पर बताया गया था।

The Wire के इस झूठ की पोल खोलते हुए दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने एक टीवी डिबेट में इस दावे की क्लिप चलाने के बाद कश्मीर में छप और बँट रहे अख़बारों के न केवल नाम गिनाए, बल्कि उनकी तस्वीरें भी दिखाईं। वह तस्वीरें उनके रिपोर्टर ने कश्मीर से मुहैया कराईं थीं। इनमें ग्रेटर कश्मीर, राइज़िंग कश्मीर, कश्मीर उज़्मा (उर्दू अख़बार), तामीर इरशाद (उर्दू अख़बार), कश्मीर इमेज, कश्मीर रीडर, कश्मीर टाइम आदि बहुत से अख़बार शामिल हैं। उन्होंने हाल के दिनों में प्रकाशित अख़बारों के साथ ही कुछ पुरानी प्रतियाँ (18-19 अगस्त, 2019) भी गिनाईं।

नया नहीं है प्रोपेगंडा

‘The Wire’ और फर्जी प्रोपेगंडा का पुराना रिश्ता किसी को दोबारा बताए जाने की ज़रूरत नहीं है। इसके पहले वह कश्मीर में जीवनरक्षक दवाओं की कमी का भी दावा कर चुका है, जोकि बाद में झूठा ही निकला था।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई (बार एन्ड बेच से साभार)
"पारदर्शिता से न्यायिक स्वतंत्रता कमज़ोर नहीं होती। न्यायिक स्वतंत्रता जवाबदेही के साथ ही चलती है। यह जनहित में है कि बातें बाहर आएँ।"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

112,393फैंसलाइक करें
22,298फॉलोवर्सफॉलो करें
117,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: