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मजदूरों को मुफ्त ट्रेन नहीं… सांसदों का चुपके से बढ़ा दिया भत्ता, अब मिलेगा ₹49000/महीना: योगेन्द्र यादव के झूठ का Fact Check

योगेंद्र यादव ये बताना भूल गए कि सांसदों के भत्ते को कितने रुपए से बढ़ा कर 49,000 रुपए किया गया है। अगर वो ये बात बता देते तो उनकी पोल खुल जाती। इसीलिए, उन्होंने आदेश की एक कॉपी शेयर कर दी और लोगों को भ्रम की स्थिति में डालने के उद्देश्य से झूठ फैलाया। क्योंकि सच्चाई यह है कि भत्ते को 70000 से घटाकर 49000 किया गया है, न कि बढ़ाया गया है।

योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सरकार ने ‘चुपचाप’ सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते (Salary Allowance) में बढ़ोतरी कर दी है। ‘स्वराज इंडिया’ के संस्थापक ने आदेश की प्रति शेयर करते हुए ऐसा दावा किया। उन्होंने लिखा कि जब सरकार को मजदूरों के लिए मुफ्त में ट्रेनें चलानी चाहिए थी, उसने ‘चुपके से’ सांसदों को मिलने वाले निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को बढ़ा कर 49,000 रुपए कर दिया है। ये आदेश अप्रैल 7, 2020 को आया।

हालाँकि, इस दौरान योगेंद्र यादव ये बताना भूल गए कि सांसदों के भत्ते को कितने रुपए से बढ़ा कर 49,000 रुपए किया गया है। अगर वो ये बात बता देते तो उनकी पोल खुल जाती। इसीलिए, उन्होंने आदेश की एक कॉपी शेयर कर दी और लोगों को भ्रम की स्थिति में डालने के उद्देश्य से झूठ फैलाया। योगेंद्र यादव इससे पहले भी सीएए और एनआरसी को लेकर ऐसी हरकतें कर चुके हैं। अजीबोगरीब पोल प्रेडिक्शन तो उनका पेशा ही है, जो सच ही नहीं होता।

अब आते है सच्चाई पर। दरअसल, सांसदों को पहले निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Salary Allowance) के रूप में 70,000 रुपए मिलते थे, जिसमें 30% की कटौती की गई। कटौती के बाद उनका भत्ता 21,000 रुपए कम हो गया और अब ये 49,000 रुपए प्रति महीने आएगा। संसद की जॉइंट कमिटी ने ये सिफारिश की थी, जिसे राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था।

इस आदेश को ‘Members of Parliament (Constituency Allowance) Amendment Rules, 2020’ नाम दिया गया है। अब आते हैं इससे पहले के भी एक फ़ैसले पर। कंस्टिटूएंसी अलाउंस से पहले MPLADS फण्ड (सांसद निधि) को भी सस्पेंड कर दिया गया था। अगले दो साल तक ये सस्पेंड रहेगा। यानी 2020-21 और 2021-22 में सांसदों को सांसद निधि की रकम नहीं दी जाएगी। ये रकम कोविड-19 से लड़ने में ख़र्च होगी। कई लोगों द्वारा ध्यान दिलाए जाने के बावजूद योगेंद्र यादव ने अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया।

इससे सरकार के पास 7900 करोड़ रुपए बचेंगे, जिसे कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया में डाला जाएगा। ये रकम कोरोना आपदा के बीच जनता की भलाई के लिए ख़र्च होगी। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी राज्यों के राज्यपालों से स्वेच्छा से ‘पे कट’ का फ़ैसला लिया और इसे सामाजिक दायित्व बताया। एक ख़बर के अनुसार, सरकार हर महीने एक सांसद पर औसतन 2.7 लाख रुपए ख़र्च करती है। संसद में फिलहाल कुल 795 सदस्य हैं, जिनमें से 545 लोकसभा में हैं और 250 राज्यसभा में।

फ़रवरी 2020 में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक इवेंट में मंच साझा करते हुए मंच से ही योगेंद्र यादव ने यह कह सनसनी फैला दी थी कि, “भारत हिंदी, हिन्दू , हिन्दुस्तान से नहीं बनेगा, हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान देश को तोड़ देगा… आज यह करने की कोशिश हो रही है।” राम मंदिर पर फ़ैसले को लेकर उन्होंने कहा था कि राम मंदिर कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ भारत में सेक्युलर पॉलिटिक्स की परीक्षा होगा। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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