Saturday, October 1, 2022
Homeफ़ैक्ट चेकराहुल गाँधी, ठीक से याद कीजिए, नफ़रत की नर्सरी से लेकर झूठ के विश्वविद्यालय...

राहुल गाँधी, ठीक से याद कीजिए, नफ़रत की नर्सरी से लेकर झूठ के विश्वविद्यालय तक कॉन्ग्रेस से जुड़े हैं

ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी की याद्दाश्त खोती जा रही है या ये भी कह सकते हैं कि उनपर मोदी का डर इस तरह छाया हुआ है कि वो अपनी पार्टी में क्या चल रहा है, इसपर ध्यान ही नहीं देना चाहते।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के राजनीति में कदम रखने से लेकर आजतक उन्हें किसी न किसी मुद्दे पर ट्रोल किया जाता रहा है। लेकिन इसमें किसी और का कोई दोष नहीं हैं। राहुल की बातें, उनके भाषण, उनके द्वारा पेश किए गए तथ्य हर बार कुछ न कुछ ऐसी चीज़ लेकर आते हैं जो इंसान अपनी पूरी मानसिक क्षमता के साथ भी समझना चाहे तो उसे समझने में देर हो ही जाती है कि आख़िर राहुल जी कहना क्या चाहते हैं।

निराधार बातें करके अपनी छवि को बूस्ट करने वाले राहुल गाँधी एक बार फिर से अपनी कही बातों की वजह से पकड़ में आ गए हैं। इस बार भी उनकी बातों में अपना या अपनी पार्टी का कोई ज़िक्र नहीं था हमेशा की तरह सिर्फ़ मोदी ही थे।

ये बात उनके अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी की है। यहाँ पर राहुल सफ़ाई से झूठ बोलते हुए अमेठी की जनता के मन में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ बेवजह के सवाल-जवाब गढ़ते नज़र आए। जनता को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि पीएम सिर्फ नफ़रत फैलाने का ही काम करते हैं। समाज में हो रहे अलग-अलग समुदायों के बीच लड़ाई-झगड़े का आरोप भी बड़ी बेबाकी से कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष महोदय ने पीएम मोदी पर लगाया।

एनएनआई के ट्वीट में राहुल गाँधी की इन बातों को जस का तस पेश किया गया। ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी की याद्दाश्त खोती जा रही है या ये भी कह सकते हैं कि उनपर मोदी का डर इस तरह छाया हुआ है कि वो अपनी पार्टी में क्या चल रहा है, इसपर ध्यान ही नहीं देना चाहते।

सितंबर 2018 में गुजरात में कॉन्ग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ग़ैर-गुजराती (ख़ासकर यूपी और बिहार) लोगों के लिए द्वेष भरे भाषण देते हुए कैमरे में पकड़े गए थे। कैमरे में रिकॉर्ड हुए वीडियो में अल्पेश गुजरात के लोगों को ये कहते नज़र आए थे कि बाहर से आए लोग यहाँ पर आकर अपराध करते हैं जिसके कारण गुंडागर्दी में वृद्धि हो रही है। अल्पेश का कहना था कि ये लोग गाँव वालों को पीटकर अपने घर दूसरे राज्यों में भाग जाते हैं। वो जनता से पूछते नज़र आए कि क्या उनका गुजरात ऐसे लोगों के लिए है?

लोगों में नफ़रत की भावना भड़काते हुए अल्पेश ये भी कहते नज़र आए कि जो कंपनियाँ गुजरातियों को 85 प्रतिशत रोजगार नहीं प्रदान करेंगी, उनके कंटेनरों को रोक दिया जाएगा, ट्रकों को रोक दिया जाएगा और ज़रूरत पड़ी तो ट्रकों के टायरों को भी जला देंगे। वो अपनी इन्हीं बातों को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि उनका मानना है कि सभी गुजरातियों को उग्रता के साथ लड़ाई करनी चाहिए।

अल्पेश के बयानों पर ग़ौर करें तो साफ होगा कि उनके मन में क्या चल रहा था जो वो अपनी इन बातों को इतने बड़े स्तर पर बोलते हुए एक बार भी नहीं झिझके। कॉन्ग्रेस में सिर्फ अल्पेश ठाकोर ही नहीं हैं बल्कि एक और कॉन्ग्रेस विधायक जेनी बेन ठाकुर भी गुजरात में हिंसा भड़काती हुई पाई गई थीं।

एक तरफ जहाँ कोई भी नया कानून बनने पर कॉन्ग्रेस में संविधान के साथ छेड़-छाड़ पर हाय-तौबा मचना शुरू हो जाता है वहीं जेनीबेन का बयान था कि “भारतीय कानून का पालन किया जाना चाहिए लेकिन घटना के समय उसी दौरान… 500, 100, 50, 150 लोग वहाँ होते हैं… उन्हें पेट्रोल का इस्तेमाल करते हुए आग में झोंक देना चाहिए, इससे कुछ नहीं होगा।” उनका कहना था कि “…बलात्कारी पुलिस के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए उसे वहीं तुरंत समाप्त कर देना चाहिए।” इसके अलावा भी वो बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ हिंसात्मक बयान देती पाई गई हैं

पीएम मोदी को नफरत फैलाने के लिए दोषी ठहराने वाले राहुल अपनी पार्टी में काम कर रहे नेताओं के बयानों पर न जाने कैसे चुप्पी साध लेते हैं। अल्पेश और जेनी बेन के अलावा अभी हाल ही में मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के बाद कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ वहाँ पर यूपी और बिहार के प्रवासियों के लिए नफ़रत उगलते सुनाई पड़े थे।

लेकिन कमलनाथ के मुँह से ऐसे शब्द हैरान करने वाले बिल्कुल भी नहीं लगते हैं। ये वही लोग हैं जो 1984 में हुए सिख दंगों में रकाबगंज गुरुद्वारे के पास लगाई जाने वाली आग में भीड़ का नेतृत्व करने के आरोपित हैं। आज यही आदमी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर अगर यूपी और बिहार वालों के लिए ज़हर उगल रहा है तो अचंभे की बात नहीं है।

अपनी पार्टी में लगे इतने दागों के बावजूद भी राहुल गाँधी पीएम पर ऊँगली उठाने से पहले एक बार भी नहीं सोचते हैं। स्पष्ट है कि वो अगर अपनी ऐसी बेबुनियादी बातों पर ट्रॉल नहीं किए जाएँगे तो फिर कौन किया जाएगा। पीएम पर नफ़रत फैलाने का आरोप लगाते हुए वो अगर अपने पार्टी के नेताओं पर दो-तीन बात रखें तो शायद देश की जनता उनके अस्तित्व पर सवाल उठाते समय डाँवाडोल नहीं होंगे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मोदी को शक्ति मिली तो देश में सनातन का राज हो जाएगा…’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद पर मल्लिकार्जुन खड़गे का नामांकन, वायरल होने लगा पुराना...

मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के कुछ घंटों बाद उनका पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

भारत जोड़ो यात्रा पर आंदोलनजीवी, हसदेव अरण्य की कौन सुने: राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के राजनीतिक दोगलेपन से लड़ रहे सरगुजा के ST

राहुल गाँधी जिन्हें दिल्ली में 'मोदी का यार' बताते हैं, कॉन्ग्रेस की सरकारें अपने प्रदेश में उनकी ही एजेंट बनी हुई हैं। यही हसदेव अरण्य का दुर्भाग्य है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
225,416FollowersFollow
416,000SubscribersSubscribe