Sunday, March 3, 2024
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2.5 लाख का वेंटिलेटर 4 लाख में… PM CARES का ‘वेंटिलेटर घोटाला’: कॉन्ग्रेसियों की फैलाई फर्जी खबर का फैक्ट चेक

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पीएम केअर फंड से अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए। इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थकों ने ट्विटर पर एक झूठी साजिश के तहत इन वेंटिलेटरों की खरीद पर आरोप लगाते हुए इसे 'वेंटिलेटर घोटाला' बता कर वायरल कर दिया। झूठ की पोल तब खुली जब...

भारत इस वक़्त चीन के द्वारा फैलाए गए कोरोना वायरस को निपटाने की पुरजोर कोशिश में लगा है। दूसरी ओर हमारे सैनिक सीमा पर दुश्मनों का मुकाबला कर रहे हैं। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस अपनी घटिया राजनीति से बाज नहीं आ रहा।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पीएम केअर फंड से अस्पतालों में पहले बैच के वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए। जिसके बाद मंगलवार (16 जून, 2020) को कॉन्ग्रेस समर्थकों ने ट्विटर पर एक झूठी साजिश के तहत लाए गए वेंटिल्टर्स पर आरोप लगाते हुए इसे ‘वेंटिलेटर घोटाला’ बता कर वायरल कर दिया।

इस फर्जी खबर को फैलाने वाले साकेत गोखले पहले शख्स थे। उन्होंने ट्वीट कर पूछा, पीएम केयर्स फंड के तहत वेंटिलेटर खरीदने के लिए अलॉट किए गए फंड से 750 करोड़ से अधिक रुपए कैसे गायब हो गए?

वेंटिलेटर मॉडल skanray CV200 को मैसूर स्थित स्कैनरे टेक्नोलॉजिज से खरीदा गया है। गोखले ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्कैनरे टेक्नोलॉजिज फिलिप्स वेंटिलेटर के निर्माण का लाइसेंस पार्टनर है, इसलिए स्कैनरे उसी फिलिप्स CV200 मॉडल को दे रहा है, जैसा कि भारत में बनाया गया है।

इसके बाद उन्होंने ‘फिलिप्स CV200’ मॉडल के लिए एक ई-कॉमर्स पोर्टल इंडिया मार्ट से इसकी प्राइस लिस्ट निकाली। इसमें दावा किया गया कि यह 2.5 लाख रुपए प्रति पीस पर इंडिया मार्ट पर बेचा जा रहा है।

गोखले इसके बाद हाई स्कूल स्तर का गणित लगाते हुए कहते हैं कि 50,000 वेंटीलेटर की खरीद के लिए पीएम केअर फंड के 3,100 करोड़ रुपए में से अलॉट किए गए 2,000 करोड़ रुपए में से सरकार 2.5 लाख रुपए के बजाय 4,00,000 रुपए प्रति वेंटिलेटर का भुगतान कर रही है।

इस खबर को देखते ही कॉन्ग्रेस के अन्य समर्थकों ने आँख बंद कर इस मनगढ़ंत सच्चाई को फैलाने में जुट गए। साथ यह भी दावा किया कि किस तरह वेंटिलेटर की आड़ में घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी को समर्थन देने वाले कुछ लेखकों ने भी इसे महत्वपूर्ण सूचना के तौर पर लिया। बता दें कि कोठारी ‘द लॉजिकल इंडियन’ की मैनेजिंग एडिटर हैं। ये वही हैं, जिन्होंने फेसबुक पर अरविंद केजरीवाल के फैन पेज के रूप में शुरुआत की थी।

कुछ लोगों ने तो गोखले की मनगढ़ंत कहानी को तथ्य मान लिया।

इससे पहले हम खबर की सच्चाई के बारे में आपको बताए, हम साकेत गोखले की कुछ मामूली बातें जान लेते हैं।

जिस “फिलिप्स सीवी 200” को लेकर गोखले का दावा था, वास्तव में वह इंडिया मार्ट पर 11 लाख रुपए में बिक रहा है।

और तो और, गोखले के ट्विटर थ्रेड को भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के सीएमडी द्वारा खंडन किया गया। बीइएल भारत की एक प्रॉफेशनल डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक कंपनी है, जो भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के नवरत्न डिफेंस पब्लिक सेक्टर के अधीन है।

बीईएल के सीएमडी ने कहा कि ट्वीट्स में इतनी सारी फर्जी जानकारी कैसे गढ़ी गई। क्योंकि उनकी जानकारी के अनुसार फिलिप्स ऐसे किसी भी मॉडल का निर्माण नहीं करता है। उन्होंने कहा कि इन ट्वीट्स को देख कर ऐसा लग रहा जैसे फिलिप्स के ब्रांड नाम के तहत एक काल्पनिक प्रोडक्ट को वर्चुअल मार्केटप्लेस पर प्रचारित किया जा रहा है।

ऐसे समय में पीएसयू के सीएमडी सोशल मीडिया पर इन मनगढ़ंत खबरों पर रिप्लाई दे कर इसे फर्जी साबित कर रहे हैं। जबकि उनके पास करने के लिए और भी कई जरूरी काम हैं। उन्होंने बताया कि कैसे CV200, 2 घंटे की बैटरी बैकअप के साथ एक उच्च कोटि का वेंटिलेटर है। साथ ही इसमें कई अन्य सुरक्षा विशेषताएँ भी हैं।

उन्होंने कहा, “निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले कॉम्पोनेन्ट प्रतिष्ठित वैश्विक मेडिकल ग्रेड कंपोनेंट्स के सप्लाई चैन पार्टनर हैं। CV200 वेंटिलेटर की कीमत इसके विन्यास, विशेषताओं और प्रदर्शन को देखते हुए विचार विमर्श करके किया जाता है।”

सीएमडी ने आगे कहा कि वेंटिलेटर पर पीएम केअर फंड का लोगो इसलिए लगा है, क्योंकि वेंटिलेटर अलॉट किए गए फंड के तहत ही खरीदे जा रहे हैं। और इस पर लगाया गया लोगो इसकी पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

सीएमडी ने बताया कि कैसे डीआरडीओ ने कोरोनो वायरस प्रकोप के बीच वैश्विक लॉकडाउन स्थिति के बीच बड़ी संख्या में वेंटिलेटर के निर्माण के लिए आवश्यक व महत्वपूर्ण कंपोनेंटस के विकास और स्वदेशीकरण में सहयोग किया है।

आखिरकार इन मनगढ़ंत कहानियों का पर्दाफाश होने के बाद गोखले को विश्वास ही नहीं हुआ कि उसे जवाब देने वाला शख्स बीईएल का सीएमडी है।

इन तथ्यों से यह बात साबित होती है कि भारत सरकार ने 2.5 लाख रुपए में बिकने वाले वेंटिलेटर को 4 लाख रुपए में नहीं खरीदा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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