फैक्ट चेक: जवान अमानुल्लाह को लुटेरों ने मारा, लिबरल गैंग ने दिया सांप्रदायिक एंगल, बताया मॉब लिंचिंग

अमेठी के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि मृतक और उसकी पत्नी अपने नव-निर्मित घर के बरामदे में सो रहे थे। तभी कुछ चोरों ने घर के बाहर एक खाली पड़े इलाके में ठेकेदार की सड़क निर्माण सामग्री चोरी करने की कोशिश की और जैसे ही अमानुल्लाह ने शोर माचाया, चोरों ने उन्हें.....

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रविवार (जुलाई 28, 2019) को बताया कि अमेठी में एक सेवानिवृत्त आर्मी ऑफिसर की मौत हो गई। जिसके बाद जल्द ही ये खबर फैला दिया गया कि आर्मी ऑफिसर की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। लोगों ने इसे मॉब लिंचिंग से जोड़कर पेश किया।

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गालीबाज कॉन्ग्रेस समर्थक और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त सेना अधिकारी अमानुल्ला भी मॉब लिंचिग का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिग को रोकने का एकमात्र उपाय “रासुका या मानव सुरक्षा कानून” को लाना है।

भारतीय बेरोजगार कामरेडों के नायक सीताराम येचुरी ने भी भारतीय राजनीति में प्रासंगिकता खोने के बाद अपने खाली समय का आनंद लेते हुए उसी फर्जी खबर को हवा दी। उन्होंने ‘नफरत फैलाने’ और उन्हें (मॉब लिंचिंग करने वाले को) बचाने के नाम पर भाजपा पर निशाना साधा।

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इसके अलावा सस्पेंडेड ब्यूरोक्रेट आशीष जोशी ने भी बिना खबर की पूर्ण सत्यता को जाने इसे मॉब लिंचिंग का नाम देकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की। बता दें कि, इन्होंने AAP से बगावत करने वाले नेता कपिल मिश्रा को अपने निजी लेटरहेड के जरिए अपनी धौंस दिखाते हुए धमकी दी थी।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के ट्रोल और समर्थक, जो कि स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ते हैं, उन्होंने काफी देर कर दी। लोकसभा चुनाव 2019 में अमेठी में राहुल को हार का मुँह देखना पड़ा था, जिसके बाद से अमेठी से शानदार जीत हासिल करने वाली स्मृति ईरानी पर लगातार निशाना साधते रहते हैं। अमेठी में घटित इस घटना पर वे स्मृति ईरानी के खिलाफ अपना विरोध दिखाने में थोड़ा पीछे रह गए।

वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले और दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले पत्रकार प्रशान्त कनौजिया ने भी इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रोपेगेंडा फैलाया। कनौजिया ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के अमेठी में सेना से रिटायर्ड कैप्टेन अमानुल्लाह का मॉब लिंचिंग हो गया। अब सेना से प्यार नहीं है, बस मुसलमानों से नफ़रत है। शुरुआत एहसान जाफरी से हुई, अंत अब तुम्हारे घर होगा अगर अब आवाज़ न उठाई।”

इस फर्जी घटना को न सिर्फ ए-ग्रेड ट्रोल्स और पत्रकारों ने फैलाया, बल्कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भी इस झूठी खबर को खूब भुनाया।

हालाँकि, सच्चाई इससे बिल्कुल परे है और वो ये है कि आर्मी कैप्टन अमानुल्लाह खान रविवार को अमेठी में मृत पाए गए थे। उनके घर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था। इसी दौरान उनकी मौत हुई, न कि मुस्लिम होने की वजह से उनकी मॉब लिंचिंग की गई। 

पुलिस ने बताया कि गोर्डियन के पुरवा गाँव में रात के 2 बजे कैप्टन अमानुल्लाह और उनकी पत्नी अमीना सो रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि घर के बाहर कुछ लोग कुछ सामान उठा रहे हैं। जब उन्होंने इसके लिए उन्हें टोका और अन्य ग्रामीणों को भी जगाने की कोशिश करने लगे, तो हमलावरों ने उन्हें बाँध दिया और अमानुल्लाह को लाठी से मारना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी प्रहलाद सिंह ने बताया कि कैप्टन के सिर पर काफी गंभीर चोट आई थी।  

अमेठी के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि मृतक और उसकी पत्नी अपने नव-निर्मित घर के बरामदे में सो रहे थे। तभी कुछ चोरों ने घर के बाहर एक खाली पड़े इलाके में ठेकेदार की सड़क निर्माण सामग्री चोरी करने की कोशिश की और जैसे ही अमानुल्लाह ने शोर माचाया, चोरों ने उन्हें मार डाला। हालाँकि, ये तथ्य प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नहीं मानेंगे, क्योंकि उनका एजेंडा तो पहले से ही तय होता है।

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शरजील इमाम
“अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे।"

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