Fact Check: राजीव गाँधी के बेटे नहीं हैं राहुल गाँधी? झूठा है अमेरिकी ‘DNA विशेषज्ञ’ का दावा

हाल ही में राहुल गाँधी की नागरिकता पर भी सवाल उठे थे और मामला कोर्ट में है। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ‘गियासुद्दीन’ टाइप की अफ़वाह उड़ाने वाले गैंग ने यह खबर फैलाई है। व्हाट्सएप्प पर इस तरह की बातों को कई लोग सत्य मान लेते हैं क्योंकि यह अख़बार जैसा दिखता है।

आजकल जब राजीव गाँधी चुनावों में चर्चा का विषय हैं, तभी एक ऐसी तस्वीर सोशल मीडिया पर पाई गई जिसमें यह दावा किया गया है कि राहुल गाँधी राजीव गाँधी के पुत्र नहीं हैं। सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर इन दिनों अजीबो-गरीब दावा किया जा रहा है। जब राहुल गाँधी, ‘चौकीदार चोर है’ जैसी टिप्पणी पर माफ़ी माँगने और EVM हैक होने के नारों में व्यस्त है, उसी समय उनकी नाक के नीचे एक बेहद अजीबोगरीब और निंदनीय दावा ‘अमेरिकी DNA विशेषज्ञ’ के नाम से खूब चलाया जा रहा है।

दरअसल, अखबार की एक कटिंग इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि राहुल गाँधी, राजीव गाँधी के बेटे ही नहीं हैं। इस कटिंग में अमेरिकी डीएनए विशेषज्ञ मार्टिन सिजो के हवाले से इस खबर को लिखा गया है। दावा किया गया है कि मार्टिन सिजो के पास राजीव गाँधी और राहुल गाँधी के DNA हैं, जो अलग-अलग हैं।

अमेरिकी डीएनए विशेषज्ञ मार्टिन सिजो का दावा

इस अखबार की कटिंग को ट्विटर से लेकर फेसबुक पर कुछ लोगों द्वारा तत्परता से शेयर किया जा रहा है। एक सोशल मीडिया यूजर ने यह तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, “तुम EVM-EVM खेल रहे और यहाँ तो DNA भी हैक निकला। डॉ मार्टिन का दावा है राजीव गाँधी और राहुल गाँधी DNA आपस मे मैच नहीं होता। ध्यान दीजिए डॉ साहब ने प्रियंका पर ये दावा नहीं किया। डॉ साहब भारत आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को तैयार हैं। सिब्बल जी कृपया संज्ञान लें।”

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मजे की बात ये कि खबर में दावा किया जा रहा है कि कथित डीएनए विशेषज्ञ मार्टिन सिजो भारत आकर इस बात के सुबूत देने के लिए तैयार हैं।

क्या है सच्चाई?

डॉ मार्टिन के नाम के किसी शख़्स का ज़िक्र हमें इंटरनेट पर नहीं मिला जो ऐसे दावे कर रहा हो। साथ ही, कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस तरह की ख़बरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे सामने यही निकल कर आता है कि ये पूर्णतः एक फर्जी खबर है और राहुल गाँधी की छवि को धूमिल करने की कोशिश है।

हाल ही में राहुल गाँधी की नागरिकता पर भी सवाल उठे थे और मामला कोर्ट में है। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ‘गियासुद्दीन’ टाइप की अफ़वाह उड़ाने वाले गैंग ने यह खबर फैलाई है। व्हाट्सएप्प पर इस तरह की बातों को कई लोग सत्य मान लेते हैं क्योंकि यह अख़बार जैसा दिखता है। हमें ऐसी सूचनाओं को ध्यान से पढ़ कर डिलीट कर देना चाहिए। किसी भी इमेज को पुराना दिखाने के लिए इंटरनेट पर कई प्रकार के ऐप्स उपलब्ध होते हैं, जो उस पर फ़िल्टर लगाकर फोटो को पुराना जैसा बना देते हैं। ये सब बहुत ही आसानी से होता है। इन्हीं टूल्स का सहारा लेकर कुछ कुत्सित मानसिकता वाले लोग ऐसे कार्य करते हैं, जो कि बहुत ही गलत है।

निष्कर्ष

हमारी पड़ताल में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर जो दावा किया जा रहा है, वो गलत और झूठा है। पोस्ट में जिस DNA विशेषज्ञ मार्टिन सिजो का नाम लिया जा रहा है, उस नाम का कोई भी एक्सपर्ट मौजूद नहीं है और यह सिर्फ एक फेक न्यूज़ है।

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