Saturday, June 19, 2021
Home विविध विषय अन्य नए डेटा तो छोड़िए, पुराने हिसाब से भी मोदी सरकार के दौरान महंगाई घटी...

नए डेटा तो छोड़िए, पुराने हिसाब से भी मोदी सरकार के दौरान महंगाई घटी और रोजगार बढ़े

आँकड़े कहते हैं कि महंगाई दर में स्पष्ट रूप से कमी आई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में 400bps (बेस पॉइंट्स) की कमी दर्ज की गई। यह 9% के औसत से घटकर 5% की औसत पर पहुँच गया।

भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) के अंतर्गत नेशनल सैम्पल सर्वे कार्यालय द्वारा जारी किए गए डेटा को 108 अर्थशास्त्रियों ने सरकार द्वारा छेड़छाड़ किया हुआ बताया है। नेशनल सैम्पल सर्वे कार्यालय (NSSO) के प्रमुख एक महानिदेशक होते हैं, जो अखिल भारतीय आधार पर विभिन्‍न क्षेत्रों में व्‍यापक स्‍तर पर सर्वेक्षण करने के लिए जिम्‍मेदार होते हैं। प्रारंभिक डेटा विभिन्‍न सामाजिक-आर्थिक विषयों पर राष्‍ट्रव्‍यापी स्‍तर पर घरों का सर्वेक्षण, वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण (एएसआई) आदि करके एकत्र किया जाता है। इन सर्वेक्षणों के अलावा, एनएसएसओ गाँव और शहरों में क़ीमतों से संबंधित डेटा एकत्र करता है।

अर्थशास्त्रियों ने इस डेटा को नकारते हुए सरकार पर सांख्यिकी संस्थाओं पर हमले करने का आरोप लगाया था। अपने अपील में उन्होंने सभी पेशेवर अर्थशास्त्रियों, सांख्यिकीविदों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं से अनुरोध किया था कि वे सरकार द्वारा ‘असहज डेटा को दबाने’ की प्रवृत्ति के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए एक साथ आएँ। और सरकार पर सार्वजनिक आँकड़ों की पहुँच और अखंडता को बहाल करने और संस्थागत आज़ादी को फिर से स्थापित करने का प्रयास करें।

इस बयान में कहा गया है, “हाल ही में, भारतीय आँकड़े और इससे जुड़े संस्थानों को राजनीतिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है। वक्तव्य में एनएसएसओ के समय-समय पर जारी होने वाले श्रम बल सर्वेक्षण के आँकड़ों को रोकने और 2017- 18 के इन आँकड़ों को सरकार द्वारा निरस्त किए जाने संबंधी समाचार रिपोर्ट पर भी चिंता जताई गई है।”

इसके जवाब में 131 चार्टर्ड अकॉउन्टेंट्स के समूह ने उनकी चिंता को ख़ारिज कर दिया और उनके आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। चार्टर्ड अकॉउन्टेंट्स ने इसकी तुलना अवॉर्ड वापसी से की। अर्थशास्त्रियों की इस चिंता का जवाब देते हुए अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने फाइनेंसियल एक्सप्रेस में एक लेख लिखा है। इस लेख में सिलसिलेवार ढंग से 108 अर्थशास्त्रियों द्वारा जताई गई चिंताओं का उत्तर दिया गया है। उस लेख के कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में आपको जानना ज़रूरी है। यहाँ हम उस लेख में लिखी महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करेंगे।

2015 में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने एक नया सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) सीरीज शुरू किया था, जिसमें 2012-13 और 2013-14 से पहले के मुक़ाबले ज्यादा विकास दर की बात कही गई थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय देश में सांख्यिकीय क्रियाकलापों में समन्‍वय करता है और सांख्यिकीय मानक तैयार करता है।

नए जीडीपी सीरीज ने सीएसओ के डेटा को रिप्लेस किया है, जो 2006 से पहले उपलब्ध नहीं था। इसे ‘Annual Survey Of Industries (ASI)’ के नाम से जारी किया जाता था। इस कारण पिछले डेटा से इसकी तुलना कैसे की जाए, इसी को लेकर विवाद हो रहा है। अब कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इंडस्ट्री बैलेंस शीट को लेकर विवाद हो रहा है। आपको बता दें कि विवाद शुरू होने से एक दिन पहले ही एएसआई का 2016-17 सीएसओ की वेबसाइट पर जारी किया गया। याद रखिए कि अभी तक एएसआई के डेटा की आलोचना नहीं की गई है। इसीलिए यहाँ उसी के आँकड़ों का जिक्र किया जा रहा है।

सुरजीत भल्ला लिखते हैं कि उन्होंने इस प्रकार की आलोचना पहले कभी नहीं देखी। फैक्ट और फिक्शन की बात करते हुए उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि महंगाई दर का कम होना सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में से एक बताती रही है। यूपीए कार्यकाल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ऊँची महंगाई दर की मार झेल रही थी। सुरजीत ने 108 अर्थशास्त्रियों के दावों पर करारा प्रहार करते हुए लिखा है कि ये अर्थशास्त्री वैश्विक बाजार में तेल के घटते दामों का मोदी सरकार को फ़ायदे पहुँचाने की बात तो करते हैं लेकिन वे यह नहीं बताते कि यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान मनमोहन सरकार को ‘विस्फोटक ग्लोबल ग्रोथ’ का फ़ायदा मिला था। यही कारण था कि भारत की जीडीपी ऊँचे स्तर पर पहुँची थी।

मुद्रास्फीति डेटा, CPI और WPI (ग्राफ़िक्स साभार: फाइनेंसियल एक्सप्रेस)

ये अर्थशास्त्री 2008 के बाद आए वित्तीय संकट के दौरान ऊँची महंगाई दर का विशाल भारतीय अर्थव्यवस्था पर गलत प्रभाव पड़ने की चर्चा करने से भी बचते हैं। आलोचकों का मानना है कि नोटेबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था गड़बड़ अवस्था में चली गई थी। नोटेबंदी के आलोचकों ने इसे एक बड़ा ब्लंडर बताया था। लेकिन, एएसआई का डेटा क्या कहता है? आँकड़े कहते हैं कि महंगाई दर में स्पष्ट रूप से कमी आई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Customer Price Index) मुद्रास्फीति में 400bps (बेस पॉइंट्स) की कमी दर्ज की गई। यह 9% के औसत से घटकर 5% की औसत पर पहुँच गया।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की गणना थोक बाजार में उत्पादकों और बड़े व्यापारियों द्वारा किए गए भुगतान के आधार पर की जाती है। इसमें उत्पादन के प्रथम चरण में अदा किए गए मूल्यों की गणना की जाती है। इसी तरह थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) में 420bps की औसत से कमी दर्ज की गई। अर्थात यह कि CPI मुद्रास्फीति में और WPI मुद्रास्फीति से तेज़ गिरावट दर्ज की गई।

एएसआई के पुराने विश्वसनीय डेटा भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मोदी के कार्यकाल में आउटपुट ग्रोथ भी अच्छा रहा है। हाँ, नॉमिनल वेज ग्रोथ में ज़रूर छोटी सी कमी दर्ज की गई है, लेकिन महंगाई काफी नीचे गिरी है। अतः, यह रियल वेजेज में तेज़ वृद्धि की ओर इशारा करता है। रोजगार की बात करें तो एएसआई के डेटा के मुताबिक़ उसमे भी वृद्धि दर्ज की गई है। रोजगार के मामले में अगर NDA के तीन वर्ष के शासनकाल और UPA-2 के पीछे तीन वर्षों के कार्यकाल की तुलना करें तो पता चलता है कि मोदी के शासनकाल में रोजगार में दोगुनी दर से वृद्धि दर्ज की गई है।

वो 3 टर्म जिन्हें जानना जरूरी

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
  • ग्रामीण मूल्य संग्रह (RPC)
  • थोक मूल्य सूचकांक (WPI)

शहरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-U): यह पूरे देश भर की शहरी आबादी के लिए प्रासंगिक खुदरा कीमतों के सामान्य स्तर में समय के साथ बदलाव को मापने के लिए बनाया गया है। शहरी क्षेत्रों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के संकलन का आधार वर्ष 2010 रखा गया है। इन कीमतों का संग्रह NSSO के द्वारा 310 चुनिंदा शहरों के 1114 कोटेशन से किया जाता है। CPI-U जनसंख्या के तीन व्यापक खंडों (संपन्न, मध्यम-वर्गीय और गरीब) के आधार पर वस्तुओं की कीमतों का संकलन करती है।

ग्रामीण मूल्य संग्रह (RPC): ग्रामीण खुदरा मूल्य पर एकत्र किए गए डेटा का उपयोग कृषि श्रमिकों/ग्रामीण मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के संकलन के लिए किया जाता है। वर्तमान में, श्रम ब्यूरो, श्रम और रोजगार मंत्रालय, कृषि श्रमिकों/ग्रामीण मजदूरों के लिए CPI का संकलन और प्रकाशन करता है। इसके लिए 1986 में 260 कमोडिटिज़ की लिस्ट बनाई गई थी। कृषि श्रमिकों/ग्रामीण मजदूरों के उपभोग पैटर्न के संबंध में कीमतों में हो रहे परिवर्तन के आँकड़ों को इन्हीं 260 कमोडिटिज़ के आधार पर लिखा जाता है। देश के सभी राज्यों में फैले चुनिंदा 603 गाँवों/बाजारों से यह आँकड़ा हर महीने एकत्र किया जाता है। इसके अलावा कृषि-आधारित 12 जबकि 13 गैर-कृषि व्यवसायों से संबंधित दैनिक मजदूरी के आँकड़े भी जमा किए जाते हैं।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI): वर्तमान में WPI की मौजूदा सीरीज के लिए कीमतों के डेटा संग्रहण की सुविधा NSSO ही प्रदान करती है। इसे आर्थिक सलाहकार, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के साथ-साथ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा संकलित किया जाता है। वर्तमान में इसके लिए हर सप्ताह 3813 यूनिटों से 4548 कोटेशनों का संग्रह किया जाता है। यानी पूरे देश में एक महीने में 18192 कोटेशन। यह भी जानें कि WPI की यह मौजूदा सीरीज का आधार वर्ष 2004-05 है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आंध्र प्रदेश: टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगा रहे जगन रेड्डी के MLA और मुस्लिम, विरोध करने पर BJP नेताओं की गिरफ्तारी

आंध्र प्रदेश के प्रोद्दुतुर में इस्लामिक शासक टीपू सुल्तान की प्रतिमा लगाने का विरोध करने पर भाजपा नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

विकिपीडिया पर 3 साल तक दौड़ती रही एक ऐसी ट्रेन जो थी ही नहीं, लाहौर यूनिवर्सिटी के शोध पत्र में भी हुआ कॉपी-पेस्ट

खुद को 'विश्वसनीय' बताने वाले विकिपीडिया पर मौजूद एक काल्पनिक ट्रेन का विवरण अकादमिक लेखों तक का हिस्सा बन गया।

उद्घाटन की लिस्ट जारी, कौन करेगा, क्या-क्या करेगा… सब क्लियर: मुख्यमंत्री-विधायक सबकी बल्ले-बल्ले

"जबसे कोरोना आया है, तब से नए काम हो नहीं रहे हैं। किसी पोस्टर पर अपना चेहरा देखे आठ महीने हो गए। उद्घाटनों की संख्या ड्रास्टिकली गिर गई है।"

फर्जी दस्तावेज, नौकरी, महिलाओं की तस्करी: भारत में घुसपैठियों को लाने वाले 4 रोहिंग्या को UP की ATS ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध रूप से भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के मामले में 4 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है।

ब्राह्मण होने के कारण जलाया गया ग्राम कसार का मुकेश? पत्नी ने कहा- उनको सजा नहीं हुई तो वहीं पेट्रोल छिड़ककर मरूँगी

शराब, हुड़दंग, छेड़खानी... किसी आंदोलन की पहचान हो सकते हैं? कसार के ग्रामीणों की मानें तो कथित किसान आंदोलन इसी के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है।

वुहान में मच्छरों पर प्रयोग, दिया जाता था वियाग्रा… गलती से निकल भागे हजारों: Fact Check

लोगों का कहना है कि आखिर दुनिया की हर मुसीबत चीन के वुहान शहर से ही क्यों शुरू होती है। कुछ कह रहे हैं कि चीन जो न करे, वो थोड़ा है।

प्रचलित ख़बरें

70 साल का मौलाना, नाम: मुफ्ती अजीजुर रहमान; मदरसे के बच्चे से सेक्स: Video वायरल होने पर केस

पीड़ित छात्र का कहना है कि परीक्षा में पास करने के नाम पर तीन साल से हर जुम्मे को मुफ्ती उसके साथ सेक्स कर रहा था।

BJP विरोध पर ₹100 करोड़, सरकार बनी तो आप होंगे CM: कॉन्ग्रेस-AAP का ऑफर महंत परमहंस दास ने खोला

राम मंदिर में अड़ंगा डालने की कोशिशों के बीच तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने एक बड़ा खुलासा किया है।

‘रेप और हत्या करती है भारतीय सेना, भारत ने जबरन कब्जाया कश्मीर’: TISS की थीसिस में आतंकियों को बताया ‘स्वतंत्रता सेनानी’

राजा हरि सिंह को निरंकुश बताते हुए अनन्या कुंडू ने पाकिस्तान की मदद से जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करने की कोशिश करने वालों को 'स्वतंत्रता सेनानी' बताया है। इस थीसिस की नजर में भारत की सेना 'Patriarchal' है।

वामपंथी नेता, अभिनेता, पुलिस… कुल 14: साउथ की हिरोइन ने खोल दिए यौन शोषण करने वालों के नाम

मलयालम फिल्मों की एक्ट्रेस रेवती संपत ने एक फेसबुक पोस्ट में 14 लोगों के नाम उजागर कर कहा है कि इन सबने उनका यौन शोषण किया है।

‘…इस्तमाल नहीं करो तो जंग लग जाता है’ – रात बिताने, साथ सोने से मना करने पर फिल्ममेकर ने नीना गुप्ता को कहा था

ऑटोबायोग्राफी में नीना गुप्ता ने उस घटना का जिक्र भी किया है, जब उन्हें होटल के कमरे में बुलाया और रात बिताने के लिए पूछा।

कम उम्र में शादी करो, एक से ज्यादा करो: अभिनेता फिरोज खान ने पैगंबर मोहम्मद का दिया उदाहरण

फिरोज खान ने कहा कि शादी सीखने का एक अनुभव है। इस्लामिक रूप से यह प्रोत्साहित भी करता है, इसलिए बहुविवाह आम प्रथा होनी चाहिए।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
104,798FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe