‘5 बंदूकें और दो फिर खेल देखो’: 7 लोगों का सिर कलम करवाने वाले का ‘संविधान’ सुनते रहे अधिकारी

इस घटना के बाद से हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद की सरकार निशाने पर है। असल में, शपथ लेने के बाद हेमंत सोरेन ने चार घंटे के भीतर ही पहली कैबिनेट बैठक में पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने का फैसला किया था।

झारखंड में ऐसा लग रहा है जैसे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनते ही वहाँ अपराधियों को एक तरह की छूट सी मिल गई है। राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गॉंव में उप मुखिया समेत 7 लोगों के सिर धड़ से अलग कर दिए गए। इस मामले का मुख्य आरोपित रांसी बुढ अब भी खुलेआम घूम रहा है। उसके आगे प्रशासन बेबस नजर आ रहा है।

उसका कहना है कि मारे गए सभी लोग उत्पात मचा रहे थे। उनकी हत्या जायज है। 7 लोगों की हत्या का आदेश देना बाला बुढ जब शेखी बघार रहा था, तब डीसी और एसपी उसके सामने झुक कर खड़े थे। पुलिस बल के साथ पहुँचे एसपी इंद्रजीत महथा और डीसी अरवा राजकमल के सामने पत्थलगड़ी नेता व हत्या का मुख्य आरोपी पूर्व मुखिया का पति रांसी बुढ़ ने कहा– “ये सातों मारे गए लोग उत्पाती थे। हमें पाँच बंदूकें और दे दो, फिर खेल देखो।” हत्या को जायज ठहराते हुए पत्थलगड़ी के नेता ने पुलिस से कहा कि जिन्हें मारा गया, वो उनके घरों में आकर उपद्रव करते थे, इसीलिए ग्राम सभा से सज़ा सुना दी। उसने सीधा कहा कि आपलोग आते नहीं हैं, इसीलिए हमने ही उन्हें मार डाला। पुलिस इस मामले में अब तक केवल तीन लोगों को ही गिरफ्तार कर पाई है।

भारी पुलिस बल के साथ पहुँची पुलिस किसी को भी गिरफ़्तार करने में कामयाब नहीं हो पाई। लापरवाही के आरोप में गुदड़ी थाना के थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर अशोक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। एडीजी मुरारी लाल मीणा ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन के आदेश के अनुसार जल्द ही एसआईटी बनाकर इस घटना के पीछे के जिम्मेदार लोगों का पता लगा लिया जाएगा। बता दें कि पत्थलगड़ी के उपद्रवियों का मनोबल बढ़ा हुआ है क्योंकि कई संगीन अपराधों में उनके ख़िलाफ़ दर्ज किए मामलों में नै सरकार ने किसी भी कार्रवाई से रोक लगा दी है।

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घटना 19 जनवरी के शाम की ही है। पुलिस को इसकी भनक मंगलवार को लगी। शव बुधवार को बरामद किए गए थे। मीडिया रिपोर्टों के बाद पत्थलगड़ी समर्थकों ने सातों युवकों की ग्रामसभा में पहले जमकर पिटाई की। अधमरे हालत में उन्हें घसीटकर करीब दो किमी जंगल में ले गए। वहॉं सभी के हाथ-पैर बॉंध कर सिर कलम कर दिया गया। दरअसल, घंटा कुछ यूँ है कि पथलगड़ी समर्थकों ने पश्चिमी सिंहभूम के गुलीकेरा गाँव से 7 ग्रामीणों को अपहृत कर मार डाला था।

इस घटना के बाद से हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद की सरकार निशाने पर है। असल में, शपथ लेने के बाद हेमंत सोरेन ने चार घंटे के भीतर ही पहली कैबिनेट बैठक में पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने का फैसला किया था। पिछली बार भी इस आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। अपहरण, गैंगरेप जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया था।

गौरतलब है कि पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत खूँटी से ही हुई थी। झारखंड में आदिवासी हितों के नाम पर राजनीति करने वाले हेमंत सोरेन ने चुनाव से पूर्व ही स्पष्ट कह दिया था कि उनकी सरकार बनते ही पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपितों पर से सभी केस हटा लिए जाएँगे और उन्होंने किया भी। मसलन वो दोपहर 2:19 पर शपथ लेते हैं और 5: 45 शाम में कैबिनेट की पहली मीटिंग में ही FIR वापसी का फैसला लेते हैं।

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