यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

इन तीनों में एक बात कॉमन है, लोग इन तीनों को करतब दिखाते देखना पसंद करने लगे हैं। लोग इन्तजार करते हैं कि कब ये तीनों कोई नया करतब दिखाएँ और वो सब वाह-वाही करते हुए इनके मजे लूट सकें।

KRK यानी, कमाल रशीद खान बॉलीवुड से लेकर भोजपुरी फिल्मों का एक बेहद जाना-पहचाना नाम है। कुछ साल पहले ही दीपिका पादुकोण के ‘माय लाइफ माय रूल्ज़’ के जवाब में KRK ने अपने विचार पेश किए थे। इन विचारों को जानने की लोगों में इतनी उत्सुकता रही कि लोगों ने जा-जाकर KRK को यूट्यूब पर तलाशा और उनको सब्स्क्राइब करने लगे। इतना ही नहीं, KRK के रोचक और महीन जानकारियों से भरपूर फिल्म रिव्यु देखने वालों का भी एक बड़ा फैन वर्ग है। फिल्म रिलीज बाद में होती है और दर्शक रिव्यु के लिए KRK के पास
पहले पहुँच जाते हैं।

फिल्म रिव्यु के मामले में KRK को एक ही बार ट्रैफिक और TRP से जूझना पड़ा था, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल नए-नवेले मुख्यमंत्री हुआ करते थे। लेकिन फिर अरविन्द केजरीवाल को जबसे सड़कों पर कंटाप पड़ने लगे उन्होंने फिल्म रिव्यु देने ही बंद कर दिए और KRK के यूट्यूब पर आने वाले ट्रैफिक में जबरदस्त बढ़ोत्तरी देखने को मिली।

KRK के बाद यूट्यूब पर दीपक कलाल नाम के एक सज्जन को भी देखने के लिए लोग खूब दैनिक इंटरनेट का हिस्सा खर्च करते हैं। इस प्रकार यह तय कर पाना भी एक बड़ा चैलेंज है कि यूट्यूब पर आखिर किसके लिए लोग ज्यादा दीवाने हैं, KRK या फिर दीपक कलाल?

… लेकिन मैदान में अब एक और सिपाही भी है

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अम्बानी द्वारा दिए जा रहे दैनिक सस्ते इंटरनेट का लाभ उठाते हुए कई लोगों ने आजकल ना जाने कितनों की ही आत्ममुग्धता में चार चाँद लगाए हैं। इनमें कुछ कॉन्ग्रेस द्वारा मोदी की इमेज की धज्जियाँ उड़ाने के लिए रखे गए कुणाल कामरा जैसे सस्ते कॉमेडियंस हैं, तो कुछ इंटरनेट ट्रोल और आम आदमी पार्टी के प्रोपेगैंडा मंत्री ध्रुव राठी जैसे ‘फैक्ट एंड फिगर्स’ में बात कर के विश्वसनीयता साबित कर चुके लोग भी हैं। मोदी घृणा में इतनी शक्ति है कि फर्जी न्यूज़ फैलाने की ध्रुव राठी की अद्भुत क्षमता को आँकते हुए NDTV और BBC जैसे निष्पक्ष मीडिया संस्थानों ने उन्हें अपना प्रोपेगैंडा पत्रकार बना लिया है।

लेकिन ये सब नए लोग हैं, इनकी आत्ममुग्धता माफ़ की जा सकती है क्योंकि ये लोग कैमरा के सामने नए आए हैं। लेकिन एक ऐसे वयस्क पत्रकार को आत्ममुग्धता ने घेर लिया है, जो दशकों से (जैसा कि उनका लेटेस्ट फेसबुक पोस्ट बताता है) रोजाना TV पर बैठकर दर्शकों से TV ना देखने की अपील करता रहता है। ये नाम है NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार।

रवीश कुमार एग्जिट पोल के दिन से ही खुद को और दूसरों का हौंसला बढ़ाते नजर आ रहे हैं। ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने यह भविष्यवाणी कर डाली थी कि रवीश एग्जिट पोल देखकर शायद अब किसी अज्ञात गुफा की ओर ‘कुछ नहीं रखा है दुनियादारी में’ कहते हुए रवाना हो जाएँ। ऐसा ही हुआ भी। वो एग्जिट पोल के दिन से ही लोगों से लम्बी साँसे खींचकर श्वसन करने की अपील कर रहे हैं। ताकि कम से कम एग्जिट पोल और 23 तारीख के बीच के समय को तो इस वहम में गुजार सकें कि कोई मोदी लहर इस देश में नहीं है और मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बन रहे हैं।

यूँ ही नहीं मैं जीरो TRP एंकर बन जाता हूँ

रवीश ने आज एक फेसबुक पोस्ट लिखा है और अभी उम्मीद है कि वो इसका भी विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करवाएँगे। लेकिन मैं हिंदी का पाठक हूँ और मैने बिना चतुराई दिखाए ही इस पोस्ट को समझ लिया है। एग्जिट पोल्स के नतीजों तक को वहम मानकर चल रहे रवीश कुमार के पास अब आखिरी विकल्प यही बच गया है कि वो घर बैठकर अपनी लोकप्रियता का हिसाब लगाएँ।

इस लेख को पढ़कर ही पता चल जाता है कि यह वरिष्ठ पत्रकार ना ही विद्यार्थियों के लिए चिंतित हैं, ना ही इन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष से फर्क पड़ता है। यह पत्रकार संन्यासी किस्म का है, जो अब सिर्फ भाड़ में जाए दुनियादारी कहकर खुद तक सीमित हो चुका है। रवीश कुमार यहाँ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीछे छोड़ चुके हैं। नरेंद्र मोदी को लेकर उनके कैमरा पर नजर आने को खूब मुद्दा बनाया गया है। रवीश कुमार पर इससे एक कदम आगे जाते हुए अपने यूट्यूब चैनल्स के व्यूज तलाशने का जुनून सवार हो चुका है। लेकिन जिस पत्रकार को देशवासियों ने सर पर बिठाया था, जिसे लोग TV पर देखने को उत्साहित रहते थे, वो पत्रकार अपनी पहचान यूट्यूब में क्यों समेट रहा है?

रवीश का कहना है कि EVM पर उनके शो को यूट्यूब पर जमकर देखा जा रहा है। उन्हें यह ध्यान देना चाहिए कि यूट्यूब पर KRK और दीपक कलाल को भी खूब देखा जाता है। इस तरह से अब तीन लोग यूट्यूब पर अम्बानी द्वारा दिए जा रहे दैनिक सस्ते इंटरनेट से जमकर देखे जाएँगे; KRK, दीपक कलाल और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार।

इन तीनों में एक बात कॉमन है, लोग इन तीनों को करतब दिखाते देखना पसंद करने लगे हैं। लोग इन्तजार करते हैं कि कब ये तीनों कोई नया करतब दिखाएँ और वो सब वाह-वाही करते हुए इनके मजे लूट सकें। रवीश कुमार अब व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति होने के साथ-साथ ट्रोलाचार्य भी हो चुके हैं। अब उन्हें कला दिखाते रहना होगा वरना वो भुला दिए जाएँगे। वो उसी तरह से भुला दिए जाएँगे जिस तरह से उन्होंने रवीश को भुला दिया।

रवीश कुमार का त्याग बड़ा है, उन्होंने ट्रोलाचार्य बनने के लिए ‘रवीश की रिपोर्ट’ वाले रवीश को नकार दिया। रवीश ने उस रवीश की केंचुली को सिर्फ इसलिए उतार फेंका है क्योंकि वो अब घृणा में बहुत दूर निकल चुके हैं। रवीश कुमार की पत्रकारिता में विश्वास करने वाला मेरे जैसा दर्शक उनको यूट्यूब पर अपने व्यूज पर खुश होता देख निराश है।

वास्तव में देखा जाए तो रवीश के प्रशंसक का प्रेम में धोखा खाए प्रेमी जैसा हाल है। प्रेमिका अब बदल चुकी है, उसे प्रेमी के साथ कुछ भी अच्छा नहीं लगता। अब प्रेमी दफ्तर से छुट्टी लेकर प्रेमिका को लाजपत नगर में शॉपिंग करवाना चाहता है, लेकिन प्रेमिका को सरोजिनी नगर ही जाना है। रवीश कुमार की पत्रकारिता ने उनके प्रशंसकों के साथ ऐसा धोखा किया है, जिससे उनका प्रेमी प्रशंसक अब उबर नहीं पाएगा और ना ही किसी और खुदको पत्रकार कहने वाले पर यकीन कर पाएगा।

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।

रवीश कुमार पत्रकारिता की निराशा हैं। उन्हें जो यूट्यूब व्यूज के नंबर अपनी प्रशंसा लग रही है असल में ये वो लोग हैं जो रवीश कुमार का चेहरा देखना चाहते हैं। लाख बार EVM को कोसने और फासीवाद, लोकतंत्र की हत्या, गोदी मीडिया, बिकाऊ मीडिया चिल्लाने के बाद भी एग्जिट पोल ने उन्हें नकार दिया है। यदि 23 तारीख को एग्जिट पोल वाली भविष्यवाणी सच साबित होती है तो अभी रवीश के यूट्यूब चैनल्स के व्यूज और उछाल मारने वाले हैं।

23 मई को रवीश कुमार को देखने उनका एक एक समर्थक, आलोचक और विरोधी उनको देखना चाहेगा। इसलिए हो सकता है कि वो आँकड़े रवीश कुमार को चौंका दें। सम्भावना यही हैं कि असल ट्रैफिक जीरो टीआरपी एंकर के यूट्यूब चैनल पर 23 मई को आने वाला है, आप कमर कसकर बैठ जाइए। हो सकता है कि 23 मई की शाम तक रवीश कुमार के पास गर्व करने के लिए कम से कम यूट्यूब पर देखे जाने वाले आँकड़े तो होंगे।

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