Sunday, April 11, 2021
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BHU में मशाल जुलूस के बाद आज भिक्षाटन कर ‘धर्म विज्ञान संकाय’ के छात्रों ने फिरोज की नियुक्ति का किया विरोध

"हर बार परीक्षा से सनातन धर्म गुजरा है और विजयी रहा है, इस बार भी विजय धर्म की होगी, सत्य की होगी, इसके लिए हम सभी संघर्ष के लिए तैयार हैं।"

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धार संकाय के छात्रों द्वारा डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध जारी है। एक ओर इस आंदोलन के तहत एक ओर छात्र कक्षाओं का बहिष्‍कार कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो दूसरी ओर विवि प्रशासन की ओर से किसी नतीजे पर नहीं पहुँचने से संकाय में पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित है।

बीएचयू प्रशासन द्वारा अब तक छात्रों की माँग पूरी न होने पर यहाँ तक कि क़ानूनी लड़ाई लड़ने और महामना के सम्मान की रक्षा के लिए संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों द्वारा संचालित आंदोलन के अगले क्रम में आज गुरुवार को सामान्य जनता का समर्थन लेने के लिए दोपहर दो बजे से ही लंका सिंह द्वार से भिक्षाटन किया जा रहा है।

संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रदर्शनकारी छात्रों से ऑपइंडिया ने बात कि तो शशिकांत मिश्र ने बताया कि विवि की ओर से कोई हल न निकाले जाने की वजह से छात्र अब भिक्षाटन कर आम जनता को इस पूरे प्रकरण के बारे में अवगत करा रहे हैं ताकि आम लोग भी हमारे धर्म की रक्षार्थ चलाए जा रहे आंदोलन को समझे और खुद को जोड़ सकें। वहीं छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन से BHU परिसर का माहौल एक बार फ‍िर से गरम होने लगा है। क्योंकि अब प्रशासन द्वारा माँगे गए 10 दिन में से मात्र 2 दिन शेष हैं।

भिक्षाटन करते SVDV के छात्र

बता दें कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फ़िरोज़ की नियुक्ति के विरोध में 15 दिन तक चले धरने के बाद कार्यवाही के लिए BHU प्रशासन द्वारा माँगे गए 10 दिन के समय मे से आंदोलन के कल सातवें दिन छात्रों द्वारा मशाल जुलूस निकाला गया था। जुलूस में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों का समर्थन करने के लिए कला संकाय व सामाजिक विज्ञान संकाय के भी छात्र और SVDV के पूर्व छात्र भी बड़ी पहुँचे थे। मशाल जुलूस सिंह द्वार से जयघोष करते हुए रविदास गेट तक गया और पुनः वहाँ से सिंहद्वार पर आकर सभा के बाद समाप्त हुआ।

सभा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र व डॉ. अरविंद शुक्ल ने कहा, “महामना के मूल्यों व उनके सपनों को कभी मिटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि BHU के छात्रों के दिल में महामना के प्रति कितना सम्मान है, इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ से पढ़े हुए लगभग हर छात्र चाहे वह जहाँ हो ऑफिस या घर में महामना की प्रतिमा अवश्य रखता है।”

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मुनीश मिश्र ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा, “अगर प्रशासन ने छात्रों की बात नहीं मानी और अपना वादा पूरा नहीं किया तो धर्म की रक्षा के लिए काशी विद्वत परिषद, शंकराचार्यों, पूर्व प्रोफेसरों, आचार्यों सहित देश के कोने-कोने में रह रहे संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व छात्र भी विशाल आंदोलन में शामिल होने को तैयार हैं।”

कला संकाय के इतिहास विभाग के अभिषेक सिंह ने कहा, “हमारे इतिहास में शिलालेख के आधार पर ही संस्कृति व सभ्यता का प्रमाणीकरण किया जाता है। महामना के शिलालेख को फर्जी कहने वाले उसकी जाँच करा लें, खुद ही पता चल जाएगा, कितना पुराना है। उसको न मानना महामना का अपमान है और महामना के सम्मान के लिए पूरा कला संकाय जरूरत पड़ने पर साथ खड़े होने के लिए तैयार है।”

बता दें कि धर्म विज्ञान के छात्रों के समर्थन में अब तमाम विद्वानों के साथ ही अयोध्या के साधु-संत, आचार्य भी समर्थन में आ गए हैं। काशी विद्वत परिषद, शंकराचार्यों और पूर्व प्रोफेसरों आचार्यों के साथ काशी के कई सनातन धर्म संरक्षकों का साथ भी छात्रों को मिला है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और SVDV के पूर्व प्रोफ़ेसर आचार्य रामयत्न शुक्ल के नेतृत्व में कई विद्वानों ने संघ कार्यवाहक भैया जी जोशी से मिलकर इस बात पर आवश्यक कार्रवाई और उनको पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने कहा, “कुलपति (VC) राकेश भटनागर ने मालवीय मूल्यों और धर्म विज्ञान संकाय के नियमों का ध्यान नहीं रखा, जिससे आज विश्विद्यालय का माहौल ख़राब हो गया है।”

बता दें कि कुछ दिन पहले ही संघ के वाराणसी मंडल के एक प्रचारक की तरफ से फिरोज खान के समर्थन में बयान आया था जिसे मीडिया ने संघ का बयान कहकर चलाया था क्योंकि वहाँ भी उन्हें पूरा मुद्दा न बताकर मीडिया ने ‘संस्कृत भाषा’ को लेकर प्रश्न किया गया था। जिसका छात्रों ने विरोध करते हुए संघ के पदाधिकारियों से पूरे मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया था।

आज अयोध्या में स्वामी राघवचार्य जी की अध्यक्षता में अनेको मंदिरों के महंतों व लगभग 30 संस्कृत विद्यालयों के अध्यापकों ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और कहा, “यदि प्रशासन निर्धारित समय के अंदर आवश्यक निर्णय नहीं लेता है तो एक बड़े आंदोलन के लिए हम संत समाज के लोग भी आपके साथ हैं।”

पिछले दिनों संत समाज के कई लोगों ने भी मामले की जानकारी न होने के कारण मीडिया द्वारा संस्कृत भाषा को लेकर सवाल पूछने पर उसी सन्दर्भ में बयान दे दिया था। आज जब सुबह छात्र उनसे मिलाने गए थे तो स्वामी राघवाचार्य ने कहा कि संयोग वश धर्म विज्ञान संकाय के एक महत्त्वपूर्ण इतिहास व परम्परा से परिचय हुआ। उन्होंने एक सस्मरण सुनते हुए कहा, “तोताद्री मठ के पीठाधीश्वर स्वामी अनन्ताचार्य जी से ज्ञात हुआ था कि तोताद्री मठ के द्वितीय पीठाधीश्वर स्वामी राम प्रपन्नाचार्य जी संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ही छात्र रहे हैं। मिथिला में कभी शास्त्रार्थ हुआ था, महामना जी निर्णायक थे उस सभा मे निर्णय की स्थिति नहीं हो पाई तब प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि काशी स्वयं में प्रमाण है, काशी के व्यक्ति का वक्तव्य ही निर्णय व प्रमाण है। जिसकी सहमति स्वयं महामना ने ही की।”

छात्रों को भिक्षा देते हुए स्वामी राघवाचार्य

शशिकांत मिश्र ने बताया, “स्वामी जी ने आज उनसे मिलाने गए चक्रपाणि ओझा, कृष्ण, डॉ. मुनीश मिश्र सहित सभी छात्रों से आंदोलन की सारी जानकारी ली और भावुक हो गए। उनको जब पता लगा कि आज आंदोलन में भिक्षाटन है तो स्वयं ही वह भिक्षा देने के लिए तैयार हो गए। भिक्षा देते समय उनका दर्द उनकी आंखों से छलक गया।” स्वामी जी ने कहा, “हर बार परीक्षा से सनातन धर्म गुजरा है और विजयी रहा है, इस बार भी विजय धर्म की होगी, सत्य की होगी, इसके लिए हम सभी संघर्ष के लिए तैयार हैं।”

आंदोलन के तहत भिक्षाटन करते छात्र

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