Thursday, July 25, 2024
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राम से ऐसे जुड़ा नाता कि स्कॉटलैंड से आगरा चली आईं जूली बेंटले, रामलला के दर्शन का कर रहीं इंतज़ार: मुँहबोले बेटे के गाँव में ढोल बजा कर स्वागत

भानु के परिवार ने उनका शानदार स्वागत किया। जूली भानु को अपना बेटा मानती हैं। पेशे से इंजीनियर रहीं जूली रामभक्त हैं। भगवान श्रीराम में उनकी आस्था है। वो राम भक्त भगवान हनुमान को भी मानती हैं।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में होने जा रहा है, लेकिन उनके दर्शन के लिए देश के लोग ही नहीं बल्कि विदेशी भी उतने ही उत्साहित है। यूके से उत्तर प्रदेश के आगरा आई 65 साल की महिला जूली बेंटले भी राम भक्तों में से एक है।

वो अपने मुंहबोले बेटे आगरा के 24 साल के भानु प्रताप सिंह के घर आई है। वो यहाँ रामलला के राम मंदिर में विराजने के साल ही उनके दर्शनों की चाह लेकर आई हैं। स्कॉटलैंड की बेंटले गुरुवार (11 जनवरी, 2024) को आगरा दिल्ली हाईवे पर रुनकता में भानु प्रताप के घर पहुँचीं।

भानु के परिवार ने उनका शानदार स्वागत किया। जूली भानु को अपना बेटा मानती हैं। पेशे से इंजीनियर रहीं जूली रामभक्त हैं। भगवान श्रीराम में उनकी आस्था है। वो राम भक्त भगवान हनुमान को भी मानती हैं। उन्हें भारतीय धर्म और हिंदू संस्कृति बहुत पसंद है।

जूली ने कहा, “मैं अपने बेटे से मिलने आगरा (भारत) आया हूँ। सभी ने ढोल बजाकर मेरा स्वागत किया जो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। मैंने भी खुशी-खुशी गाँववालों के साथ ढोल-नगाड़ों पर डांस किया। मैं यहाँ रुनकता में भानु के घर पर छह दिनों तक रहूँगी, धार्मिक स्थलों का दौरा करूँगी और भारतीय संस्कृति के बारे में सीखूंगी।”

बेंटेले का दिल 22 जनवरी, 2024 को श्रीराम के दर्शन करने अयोध्या जाने का था, लेकिन उन्हें वीजा को लेकर कुछ परेशानी पेश आ गई। उनका कहना है कि अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन इस साल ही करने हैं। इसके लिए वो इस साल फिर से भारत आएँगी और रामलला के दर्शन करेंगी। बेंटेले अयोध्या विवाद से वाकिफ हैं। वो कहती हैं, “भगवान राम 500 साल बाद अयोध्या में आ रहे हैं। यहाँ 22 जनवरी के दिन लोग दिवाली मना रहे हैं। मैं जल्द भारत वापस आकर अयोध्या दर्शन के लिए जाऊँगी।”

भानु एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में एंकर का काम करता है। भानु और जूली की पहली मुलाकात लगभग एक साल पहले राजस्थान के भरतपुर जिले के लक्ष्मी विलास पैलेस में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। उस दौरान जूली बेंटले भरतपुर में केवलादेव घाना पक्षी अभयारण्य देखने आई थीं।

जब जूली को समारोह और समृद्ध भारतीय संस्कृति का पता चला तो वह बेहद प्रभावित हुईं। तभी जूली बेंटले और भानु प्रताप की पहली मुलाकात हुई। समारोह में उन्होंने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर लिए और तब से वो संपर्क में हैं।

भानु बताते हैं कि जूली के साथ ऑनलाइन संपर्क में रहने के दौरान उनके बीच माँ-बेटे का रिश्ता बन गया। वो अपने मुँहबोले बेटे भानु से दुख-सुख भी शेयर करती हैं। बताते चलें कि जूली बेंटले की कोई संतान नहीं है जबकि 3 साल पहले उनके पति की भी मौत हो चुकी है।

भानु कहते हैं, “उन्होंने मुझे अपने बेटे के रूप में स्वीकार किया। मैं भी उन्हें अपनी माँ मानता हूँ। वह एक माँ की तरह मेरा ख्याल रखती हैं। अब हम माँ-बेटे हैं।” जूली भी कहती हैं कि भानु प्रताप को वो अपना बेटा मानती हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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