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भारत की छवि खराब करने वाली Homebound को ऑस्कर में क्यों भेजा? फिल्म के चयन पर उठ रहे सवाल, जानिए कौन लेता है इस संबंध में फैसला

लोग इस फिल्म के प्लॉट पर नाराज हैं। एक्स पर सक्रिय हैंडल्स का कहना है कि फिल्म से ऐसा लगता है कि भारत नागरिक अधिकारों का दमन करने वाला देश है।

ऑस्कर अवार्ड्स 2026 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए डायरेक्टर नीरज घायवान की ‘होमबाउंड’ का नाम भारत से जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दरअसल फिल्म में ये दिखाया गया है कि हमारे देश में दलितों-मुस्लिमों के साथ भेदभाव होता है और उन्हें आसानी से कुछ नहीं मिलता। ऐसे में लोगों का यही पूछना है कि ऐसी फिल्म जो देश की छवि को धूमिल करे उसे नॉमिनेशन के लिए क्यों भेजा जा रहा है।

कुछ लोग इसे लेकर सरकार पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं लेकिन हकीकत तो ये है भारत से ऑस्कर अवार्ड्स में फिल्मों के नाम भेजने का काम फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया करती है, सरकार नहीं।

ऑस्कर के लिए FFI करता है चयन

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI), जो कि एक स्वतंत्र संस्था है, हर साल यह जिम्मेदारी निभाती है। यह संस्था देशभर के 15-20 फिल्म समीक्षकों और जानकारों का पैनल बनाती है। यही पैनल तय करता है कि किस भारतीय फिल्म को उस साल ऑस्कर में आधिकारिक एंट्री दी जाएगी। इस प्रक्रिया में सरकार का कोई दखल नहीं होता। यह चयन संस्था स्वतंत्र रूप से करती है।

इस साल भी, पैनल ने कई भाषाओं और विधाओं की फिल्मों को देखने के बाद ‘होमबाउंड’ को चुना। उनके अनुसार उनका मकसद भारत की सबसे अच्छी सिनेमाई प्रस्तुति आगे बढ़ाना था। मगर, लोग इस फिल्म के प्लॉट पर नाराज हो गए। एक्स पर सक्रिय हैंडल्स का कहना है कि फिल्म से ऐसा लगता है कि भारत नागरिक अधिकारों का दमन करने वाला देश है।

चयन की प्रक्रिया कैसे होती है?

  1. फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) हर साल एक पैनल बनाता है।
  2. इस पैनल में देशभर के फिल्म समीक्षक, लेखक, तकनीकी विशेषज्ञ और फिल्म उद्योग से जुड़े अनुभवी लोग शामिल होते हैं।
  3. अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाती है।
  4. फिर बहुमत से तय होता है कि कौन सी फिल्म बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए भारत की ओर से जाएगी।
  5. यह फिल्म फिर आधिकारिक तौर पर अमेरिका की एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) को भेजी जाती है।

जाति और समुदाय पर आधारित कहानी

होमबाउंड’ की कहानी में दो ग्रामीण लड़के हैं, जिनके किरदार ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने निभाए हैं। सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं ताकि समाज में सम्मान पा सकें, लेकिन रास्ते में उन्हें दलित और मुस्लिम होने की वजह से भेद भाव का सामना करना पड़ता है।

फिल्म यह दिखाती है कि जाति और धर्म के आधार पर मिलने वाले भेदभाव आज भी युवाओं के सपनों को किस तरह प्रभावित करते हैं। फिल्म में जाह्नवी कपूर उनकी दोस्त की भूमिका में नजर आएंगी, जो उनकी संघर्ष यात्रा में साथ देती है।

कहानी को लेखक बशारत पीर की 2020 में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित सच्ची घटना से प्रेरणा मिली है। उस लेख का शीर्षक था “A Friendship, a Pandemic and a Death Beside the Highway”।

भारत और ऑस्कर का रिश्ता

अब तक केवल तीन भारतीय फिल्मों को ऑस्कर में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए नामांकन मिला है। ये फिल्में हैं – मदर इंडिया (1957), सलाम बॉम्बे (1988) और लगान (2001)। पिछले साल यानि 2025 में लापता लेडिज भी ऑस्कर में सिलेक्शन हुआ था। हालांकि, कोई भी फिल्म यह अवॉर्ड जीत नहीं पाई।

भारत के हिस्से अब तक जो ऑस्कर आए हैं, वे सभी ओपन कैटेगरी में मिले हैं। हाल ही में 2023 में एस एस राजामौली की फिल्म ‘RRR’ ने दो ऑस्कर जीतकर भारत का नाम रोशन किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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