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कैथोलिक स्कूल में 10 बधिर बच्चों का यौन शोषण: एक पादरी को 42 साल तो दूसरे को 45 साल की कैद

पीड़ितों के वकील ने एक साक्षात्कार में कहा कि इस घटना के लिए पोप फ्रांसिस को सार्वजनिक तौर पर माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चर्च ने इस मामले में उचित ढँग से काम नहीं किया है। पीड़ितों की शिकायतों का मजाक उड़ाया गया।

अर्जेंटीना के एक कैथोलिक स्कूल में 10 बधिर बच्चों का यौन शोषण करने के मामले में 2 पादरियों को कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए 40 वर्ष से अधिक कारावास की सजा सुनाई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेंडोजा में 3 न्यायाधीशों के पैनल ने सोमवार (नवंबर 25, 2019) को 83 वर्षीय पादरी निकोला कोराडी को 42 वर्ष और 59 वर्षीय पादरी होरासियो कोरबाचो को 45 वर्ष कारावास की सजा सुनाई।

इसके अलावा कोर्ट ने माली अरमांडो गोम्ज को भी 18 साल की सजा सुनाई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पादरी ने 2005 से 2016 के बीच में अपने कुकर्मों को अंजाम दिया। 2016 में इसका खुलासा हुआ था।

पोप फ्रांसिस भी अर्जेंटीना से हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें और अन्य चर्च अधिकारियों को 2014 की शुरुआत में ही इन पादरियों में से एक पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी थी। लेकिन फिर भी, उनके ख़िलाफ़ गिरफ्तारी से पहले किसी प्रकार की जाँच शुरू नहीं हुई। इस दौरान अर्जेंटीना में कैथोलिक स्कूलों को बंद करने की मॉंग भी जोर-शोर से उठी थी।

उल्लेखनीय है कि पीड़ितों के वकील सर्गियो सलिनास ( Sergio Salinas) ने एक साक्षात्कार में कहा कि इस घटना के लिए पोप फ्रांसिस को सार्वजनिक तौर पर माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चर्च ने इस मामले में उचित ढँग से काम नहीं किया है।

इस मामले में उन्होंने चर्च पर आरोप लगाया कि वे अपराधियों के ख़िलाफ़ न केवल सबूत पेश करने में विफल हुआ, बल्कि उसने जानकारियाँ भी छिपाई। पीड़ितों की शिकायतों का मजाक उड़ाया गया। सलिनास के अनुसार इस मामले में चर्च की गवाही अविश्वसनीय है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दशकों में पादरियों द्वारा यौन शोषण करने का काफी मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मामले दबाने का आरोप पोप फ्रांसिस पर है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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