नई दिल्ली के भारत मंडपम में 10 से 18 जनवरी तक आयोजित दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 केवल पुस्तकों की प्रदर्शनी नहीं बल्कि देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और वैचारिक साझेदारी का जीवंत मंच बनकर उभरा है। इस वर्ष मेले में भारत–रूस मित्रता की सशक्त उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों का रिश्ता केवल कूटनीति या राजनीति तक सीमित नहीं बल्कि साहित्य, संस्कृति और साझा मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय आयाम में रूस की मजबूत मौजूदगी
मेले में रूस की भागीदारी ने आयोजन को एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया। भारत मंडपम में स्थापित रूसी मंडप (पैवेलियन) आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ रूस से जुड़े प्रकाशक, साहित्यिक संस्थान और सांस्कृतिक प्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल हुए। प्रसिद्ध रूसी लेखक रोमन सेंचिन, इल्या कोचेरगिन और चर्चित नाटककार यारोस्लावा पुलिनोविच की उपस्थिति ने भारतीय पाठकों और साहित्य प्रेमियों को रूसी साहित्य से सीधे संवाद का अवसर दिया।
राजनीति से आगे, विचारों का रिश्ता
विश्व पुस्तक मेले के मंच से यह संदेश उभरकर सामने आया कि भारत–रूस संबंध केवल रणनीतिक या राजनीतिक सहयोग नहीं हैं, बल्कि यह रिश्ता विचारों, इतिहास और सांस्कृतिक समझ पर आधारित है। रूसी लेखकों और भारतीय साहित्यकारों के बीच हुई चर्चाओं में समाज, युद्ध और शांति, मानवीय संवेदनाएं, बच्चों का साहित्य और वैश्विक प्रकाशन जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ। इन संवादों ने दोनों देशों की साझा चिंताओं और समान दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मंच ने मेले की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को और अधिक सुदृढ़ किया और दर्शाया कि विश्व साहित्य में भारतीय मंच भी सक्रिय और प्रभावशाली भागीदार बन सकता है। रूसी लेखक और वन अधिकारी इल्या कोचेर्गिन ने लेखन को प्राकृतिक जगत के साथ संवाद के रूप में देखा। उनकी पुस्तक ‘इमरजेंसी एग्जिट’ के संदर्भ में, जो एक वृद्ध घोड़े के साथ उनके संबंधों का वृत्तांत है, ने साहित्य को ऐसे क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जहाँ मानव और गैर-मानव जीवन एक-दूसरे से मिलते हैं। जहाँ समकालीन पाठकों तक पहुँच बनाए रखने के लिए भाषा का निरंतर विकसित होना आवश्यक है।
नई पीढ़ी तक पहुँचती मित्रता
मेले में छात्रों और Gen-Z युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति यह संकेत देती है कि भारत–रूस मित्रता केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी भी है। युवा पाठकों की रूसी साहित्य, अनुवादित पुस्तकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचि यह दर्शाती है कि यह संबंध अगली पीढ़ी तक सहज रूप से स्थानांतरित हो रहा है। कई युवा पाठक रूसी बच्चों के साहित्य और समकालीन लेखन को लेकर विशेष उत्सुकता दिखाते नजर आए।
दशकों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का पुनर्पाठ
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को इस पुस्तक मेले में किताबों, अनुवादों और विचार-विमर्श के माध्यम से नए संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। 17 जनवरी को आयोजित एक विशेष सत्र में भारतीय प्रकाशन उद्योग में रूसी पुस्तकों की भूमिका और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। यह मंच दोनों देशों के प्रकाशकों के लिए सहयोग के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ।
साहित्य के माध्यम से मजबूत होती दोस्ती
इस वर्ष मेले की थीम भारतीय सैन्य इतिहास रही, जिसमें 35 से अधिक देशों ने भाग लिया। ऐसे में रूस की उपस्थिति ने यह भी रेखांकित किया कि ऐतिहासिक अनुभवों और संघर्षों को समझने में साहित्य की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। रूस और भारत दोनों ही देशों के इतिहास में संघर्ष, बलिदान और राष्ट्रीय चेतना की गहरी छाप रही है, जिसे साहित्य ने पीढ़ियों तक जीवित रखा है।
कुल मिलाकर, दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में भारत-रूस मित्रता शब्दों और विचारों के माध्यम से और अधिक सशक्त होती दिखाई दी। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब किताबें संवाद का माध्यम बनती हैं, तो देशों के बीच की दूरियाँ स्वतः ही कम हो जाती हैं और रिश्ते समय के साथ और गहरे होते जाते हैं।


