कौन हैं संदीपा विर्क
संदीपा सोशल मीडिया इन्फ्लएंसर हैं, जो इंस्टाग्राम पर 12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनके इंस्टाग्राम आईडी के मुताबिक वह एक बिजनेसमैन और अभिनेत्री हैं। साथ ही hyboocare.com वेबसाइट की ऑनर हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का मामले को लेकर 12 और 13 अगस्त को ईडी ने दिल्ली और मुंबई के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद 14 अगस्त को संदीपा को हिरासत में लिया गया।
Instagram Influencer Sandeepa Virk arrested in Rs 40 Crore money laundering scam.
— Ankur Singh (@iAnkurSingh) August 13, 2025
She made Fake website to launder money.
Sandeepa virk supports Rahul Gandhi and Ravish.
Why all scamsters support Rahul? pic.twitter.com/3gQT6oBFk0
पूछताछ के दौरान संदीपा ने कहा कि hyboocare.com वेबसाइट त्वचा की देखभाल से जुड़ी प्रोडक्ट को बेचने का प्लेटफॉर्म है। जबकि ईडी का कहना है कि ये वेबसाइट मनी लॉन्ड्रिंग के लिए मुखौटा है।
सेतुरमन और संदीपा के करीबी रिश्ते
संदीपा विर्क और अब बंद हो चुके रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अंगाराई नटराजन सेतुरमन के बीच काफी करीबी रिश्ता था। सेतुरमन के घर पर भी ईडी ने तलाशी ली थी, उस वक्त गैरकानूनी लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और फंड डायवर्जन समेत कई सबूत मिले थे, जिससे पता चलता है कि पर्सनल फायदे के लिए पैसों का दुरुपयोग किया गया।
ईडी की जाँच में सामने आया है कि 2018 में सेतुरमन को नियमों को ताक पर रख कर रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड ने 18 करोड़ रुपए का लोन दिया था। लोन का व्याज और मूलधन भी नहीं दिया गया। इसके बाद फिर 22 करोड़ रुपए का रिलायंस कैपिटल ने दिया। इसकी रकम अभी भी बकाया है।
पंजाब पुलिस ने इसको लेकर पहले एफआईआर दर्ज किया था। जिसके बाद पीएमएलए के तहत 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद ईडी ने जाँच शुरू की। इस दौरान एक व्यक्ति फारुख अली को पकड़ा गया जो खुद को संदीपा का मददगार बता रहा था। उसके बयान भी दर्ज किए गए।
वेबसाइट पर दिखाए गए प्रोडक्ट पर सवाल
संदीपा वर्क की वेबसाइट पर जो सौंदर्य उत्पाद बेचा जा रहा है। उसमें जो दावा किया जा रहा था वह उत्पाद में नहीं थे। एफडीए अप्रूवल भी फर्जी था और पोर्टल में कंज्यूमर रजिस्ट्रेशन का कोई ऑपशन नहीं था। ईडी का कहना है कि वेबसाइट की जाँच में पता चलता है कि इसके सोशल मीडिया, व्हाट्सअप नंबर निष्क्रिय हैं और पारदर्शिता का अभाव है। ये लोगों को गलत जानकारी देती है। ईडी इसकी जाँच भी कर रहा है।


