Thursday, August 5, 2021
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जब हिन्दू राजा हुआ ‘लव जिहाद’ का शिकार और श्रीविजय बन गया मलक्का सल्तनत, धोखे की आज भी वही कहानी

जब परमेश्वर ने उस महिला को शादी का प्रस्ताव दिया तो पूर्व-नियोजित षड्यंत्र के तहत महिला ने परमेश्वर के सामने शर्त रख दी। शर्त यह थी कि परमेश्वर को इस्लाम कबूल करना पड़ेगा। निःसंतान परमेश्वर के सामने कमजोर हो रहा साम्राज्य था, जिसे मुस्लिम सैनिकों की सहायता की आवश्यकता थी और अपने साम्राज्य के लिए उत्तराधिकारी की भी।

लव जिहाद कोई नई अवधारणा नहीं है। यह कई सदियों से चली आ रही है एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके चलते मुस्लिमों ने दुनिया भर के कई क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व स्थापित किया। दक्षिण-पूर्वी एशिया भी उन क्षेत्रों में से एक है, जहाँ मुस्लिमों ने व्यापार के बहाने कदम रखा और स्थानीय समुदायों में शादियाँ की। 14वीं शताब्दी तक मुस्लिमों को दक्षिण-पूर्वी एशिया के इस्लामीकरण में उतनी सफलता प्राप्त नहीं मिल सकी जितनी वो चाहते थे, लेकिन उन्हें एक ऐसा अवसर प्राप्त हुआ जहाँ से दक्षिण-पूर्वी एशिया का भाग्य बदलने वाला था।

यह अवसर था एक हिन्दू राजा को मुस्लिम बनाने का। लव जिहाद की वर्तमान प्रक्रिया के विपरीत उस समय श्रीविजय (वर्तमान मलेशिया) का राजा परमेश्वर एक महिला के प्रेम जाल में फँस गया और विवाह के लिए उसके सामने मुस्लिम बन जाने की शर्त रखी गई थी। तत्कालीन परिस्थितियों में राजा के सामने दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था। अंततः राजा परमेश्वर बना सुल्तान इस्कंदर शाह और श्रीविजय साम्राज्य बदल गया मलक्का सल्तनत में।

दक्षिण-पूर्वी एशिया में इस्लाम का धीरे-धीरे विस्तार

13वीं से 15वीं शताब्दी के दौरान जब इस्लाम इंडोनेशिया और उसके आसपास के इलाकों में अपनी पैठ जमाने में लगा हुआ था, तब यहाँ तीन बड़े साम्राज्य थे, श्रीविजय (मलेशिया), मजापहित (इंडोनेशिया) और सियाम (थाईलैंड)। इन साम्राज्य के निवासी हिन्दू और बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। इस दौरान मुस्लिम व्यापारियों का इंडोनेशिया और उसके आसपास के द्वीपीय इलाकों में आना-जाना शुरू हो चुका था।

ये व्यापारी भारत होते हुए यहाँ पहुँच रहे थे। उस समय भारत के गुजरात, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी इलाकों में अरब व्यापारियों की अच्छी-खासी संख्या थी। इन मुस्लिमों का व्यापार चीन से भी चलता था और इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले दक्षिण-पूर्वी द्वीपों पर भी इनकी उपस्थिति बढ़ती गई।

इन मुस्लिम व्यापारियों ने श्रीविजय राज्य के तटीय शहरों मलक्का और पसई में अपनी रिहायश बनानी शुरू कर दी। हालाँकि, ये मुस्लिम व्यापारी केवल व्यापार के उद्देश्य से किसी स्थान पर रुकते ही नहीं थे। इन मुस्लिमों ने उत्तरी सुमात्रा के इन इलाकों में ‘काफिर’ (गैर-इस्लामी के लिए निम्न शब्द) महिलाओं से निकाह करके अपनी संख्या को बढ़ाना शुरू कर दिया। मुस्लिम व्यापारियों का शुरुआती मजहबी मकसद तब पूरा होता हुआ दिखाई दिया, जब उनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि उन्होंने पसई और परलैक में 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दो छोटे-छोटे राज्य बसा लिए।

इसके बाद संख्या में बढ़ते मुस्लिमों ने आसपास के इलाकों में भी ‘काफिर’ महिलाओं के खिलाफ एक सुनियोजित जिहाद शुरू कर दिया। ये मुस्लिम स्थानीय संस्कृति का विरोध करने लगे और उसे खत्म करने के लिए लगातार अलग-अलग इलाकों की महिलाओं के साथ निकाह करने लगे।

श्रीविजय राज्य का राजा परमेश्वर:

14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की बात है। श्रीविजय का तत्कालीन राजा परमेश्वर राजधानी पालेमबैंग से शासन करता था, लेकिन उस समय श्रीविजय साम्राज्य कमजोर हो रहा था और मजापहित उसी तेजी से मजबूत। श्रीविजय और मजापहित के संघर्ष के दौरान परमेश्वर को अपनी राजधानी छोड़नी पड़ी और वह तेमासेक आइलैंड आ गया, जिसे उसने अपनी राजधानी बनाई। मजापहित के साथ चल रहे संघर्ष में परमेश्वर के हाथों सियाम के राजकुमार तेमागी की मौत हो गई, जिसके बाद मजापहित के सहयोगी सियाम ने परमेश्वर के खिलाफ अपना संघर्ष और भी तीव्र कर दिया।

मजापहित और सियाम किसी भी हाल में परमेश्वर को पकड़ना और उसे मारना चाहते थे। यही कारण था कि परमेश्वर को तेमासेक आइलैंड भी छोड़ना पड़ा और अंत में वह सन् 1402 में मलक्का आ गया और उसे ही अपने राज्य की राजधानी बनानी पड़ी। मलक्का आने के बाद ही संभवतः अब परमेश्वर और उसके राज्य का भाग्य मुस्लिमों के हाथों में आ चुका था।

राज्य परमेश्वर के खिलाफ लव जिहाद

चूँकि मलक्का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बन चुका था और यहाँ मुस्लिम व्यापारियों का ही बोलबाला था। ये मुस्लिम धीरे-धीरे परमेश्वर के प्रशासन और उसके दरबार में अपनी पैठ बनाने लगे। अच्छी-खासी संख्या में मुस्लिम, सेना में भी शामिल हो गए। इन मुस्लिमों ने परमेश्वर के साथ राजनैतिक फैसलों में भी भाग लेना शुरू कर दिया। इसके बाद मुस्लिम सभासदों और प्रतनिधियों के द्वारा परमेश्वर को यह प्रस्ताव दिया गया कि यदि वह इस्लाम अपना ले तो मजापहित और सियाम के विरुद्ध लड़ने में और अधिक संख्या में मुस्लिम सैनिक उसकी सहायता करेंगे। हालाँकि, परमेश्वर ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

एमए खान के द्वारा इस्लामिक जिहाद पर लिखी गई पुस्तक का एक अंश

इसके बाद मुस्लिमों ने नया पैंतरा चला। अरब व्यापारियों ने परमेश्वर को पसई की एक खूबसूरत महिला भेंट की। यह महिला एक अरब मुस्लिम और इंडोनेशिया की स्थानीय महिला की संतान थी। परमेश्वर उस दासी के साथ प्रेम करने लगा। परमेश्वर निःसंतान था। इसी बात का फायदा मुस्लिम प्रतिनिधियों ने उठाया। समय के साथ परमेश्वर और उस दासी महिला के संबंधों के चलते वह महिला गर्भवती हुई।

इसके बाद जब परमेश्वर ने उस महिला को शादी का प्रस्ताव दिया तो पूर्व-नियोजित षड्यंत्र के तहत महिला ने परमेश्वर के सामने शर्त रख दी। शर्त यह थी कि परमेश्वर को इस्लाम कबूल करना पड़ेगा। निःसंतान परमेश्वर के सामने कमजोर हो रहा साम्राज्य था, जिसे मुस्लिम सैनिकों की सहायता की आवश्यकता थी और अपने साम्राज्य के लिए उत्तराधिकारी की भी। अंततः सन् 1410 में राजा परमेश्वर बन गया सुल्तान इस्कंदर शाह और श्रीविजय साम्राज्य के स्थान पर नींव पड़ी मलक्का सल्तनत की।

इस्कंदर शाह के इस सल्तनत की रानी बनी वही महिला दासी। इसके बाद उस महिला और दरबार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने इस्कंदर शाह बन चुके राजा परमेश्वर को एक कट्टर मुस्लिम में बदल दिया। इसके बाद से मलक्का सल्तनत इस्लामिक जिहाद का केंद्र बन गया। यहाँ से दूसरे पड़ोसी राज्यों के लिए भी मुस्लिम सैनिकों को जिहाद के लिए भेजा जाने लगा। इन मुस्लिम सैनिकों का एक ही उद्देश्य था अल्लाह के नाम पर इस्लामिक जिहाद करना और विभिन्न क्षेत्रों का राजनैतिक और सामाजिक इस्लामीकरण करना।

मुस्लिम राज्य के रूप में मलक्का ने न केवल मजापहित और सियाम को जीत लिया बल्कि सुमात्रा, बोर्नियो, वर्तमान सिंगापुर और मलेशिया के द्वीपों पर भी अधिकार कर लिया।

उस समय चीन के मुस्लिमों ने भी दक्षिण-पूर्वी एशिया में इस्लामीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालाँकि, चीन के मुस्लिम कभी भी सीधे तौर पर जिहाद में शामिल नहीं होते थे, लेकिन वो रणनीति के तहत राज्य सभाओं में और तत्कालीन राज्यों के राजनैतिक गलियारों में भरपूर हस्तक्षेप करते थे। इन चीनी मुस्लिमों की ताकत इनका व्यापार था, क्योंकि उस समय चीन का व्यापार भी भारत की तरह दुनिया के कई हिस्सों से हुआ करता था और खासकर अरब मुस्लिमों से इन चीनी व्यापारियों के संबंध भी बेहतर थे।

राजा परमेश्वर के साथ जो हुआ वो आज भी हो रहा है। आज भी मुस्लिम युवक अपनी पहचान छुपाकर गैर-इस्लामी महिलाओं (अधिकांशतः हिन्दू) महिलाओं को अपने प्रेम जाल में फँसाते हैं, उनके साथ संबंध बनाते हैं, उनका शारीरिक शोषण करते हैं और उनसे शादी करते हैं। इसके बाद कभी ब्लैकमेल करके तो कभी हिंसा के माध्यम से उन गैर-इस्लामी महिलाओं को उनका धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करते हैं। महिलाओं से उनकी धार्मिक पहचान छीन ली जाती है।

हालाँकि मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लव जिहाद को रोकने के लिए कानून बनाया गया है, जिसके तहत धोखे से धर्मांतरण करने और नाम बदलकर शादी करने जैसे अपराधों के लिए सख्त से सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, लव जिहाद के मामले सामने आ रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐसी प्रवृत्ति है जो गैर-इस्लामी लोगों को हीन समझती है और उनके सांस्कृतिक एवं नृजातीय धर्मांतरण को जायज ठहराती है।

राजा परमेश्वर के धर्मांतरण की यह घटना एमए खान द्वारा लिखी गई Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism and Slavery में सभी तथ्यों और जानकारियों के साथ दर्ज है।

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ओम द्विवेदी
Writer. Part time poet and photographer.

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