भारत और श्रीलंका के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महिला क्रिकेट विश्व कप 2025, जिसे महिलाओं के खेल का उत्सव होना चाहिए था, वह अब एक राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है। पाकिस्तान की पूर्व कप्तान और कमेंटेटर सना मीर ने कमेंट्री के दौरान एक बयान दे डाला।
बांग्लादेश के खिलाफ पाकिस्तान के मैच के दौरान सना ने एक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने खिलाड़ी नतालिया परवेज को ‘आजाद कश्मीर से आने वाली’ बताया।
इस टिप्पणीको लेकर भारत काफी निंदा कर रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के नियमों के अनुसार खेल में राजनीति का कोई स्थान नहीं है। जिस हिस्से को मीर ने ‘आजाद कश्मीर’ कहा, वह असल में भारत का वह हिस्सा है जिसपर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा किया है। वर्तमान में उस क्षेत्र में पाकिस्ती फौज के अत्याचारों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी चल रहे हैं।
हजारों भारतीय प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर ICC और BCCI को टैग करते हुए सना मीर को कमेंट्री पैनल से हटाने की माँग की। उनका आरोप है कि मीर ने क्रिकेट में भू-राजनीति को घसीट कर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश की है।
Player ‘from Azad Kashmir’ is this kind of commentary allowed?
— Lala (@FabulasGuy) October 2, 2025
And then they say keep politics away from sports. pic.twitter.com/1HSHjRWMZG
पाकिस्तान की वैचारिक दिवालियापन आया सामने
असल में ये पाकिस्तान की दशकों की कट्टरता से पैदा हुई घटिया सोच से का इशारा करता है। स्कूल और मस्जिद से लेकर टीवी स्टूडियो और खएल के मैदान तक पीढ़ियों को यह सिखाया गया है कि भारत के लिए दुश्मनी रखना असल में सम्मान है और जिहादी हिंसा ‘शहीदों का प्रतिरोध’।
इस विकृत सोच के जरिए हार को जीत बताया जाता है, झूठ को सच की जगह दी जाती है और यहाँ तक कि प्रसिद्ध खिलाड़ी भी प्रोपेगेंडा की बातों को दोहराते रहते हैं।
हरिस रऊफ की फाइटर-जेट नकल और फरहान की बंदूक सलामी कोई एक दम से हुए भावनात्मक विस्फोट नहीं थे, बल्कि ये उस सैन्यीकृत मानसिकता की ओर इशारा था जो हिंसा और इनकार को आगे बढ़ाने का काम करता है। पाकिस्तान के लिए स्कोरबोर्ड से ज्यादा मायने उस ‘सर्वोच्चता के भ्रम’ का है।
एशिया कप की ‘ट्रॉफी चोरी’
ये प्रोपेगेंडा महज मैदान तक ही सीमित नहीं रहा,बल्कि प्रशासन का भी हिस्सा बन गया। एशिया कप फाइनल उस समय विवादों में घिर गया जब पीसीबी प्रमुख और एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ट्रॉफी लेकर चले गए। इसे वैश्विक स्तर पर ‘ट्रॉफी चोरी’ कहा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, नकवी ट्रॉफी और मेडल्स को अपने दुबई होटल रूम तक ले गए।
बीसीसीआई के नेताओं राजीव शुक्ला और आशीष शेलार ने एसीसी की बैठक में नकवी का कड़ा विरोध किया और कहा कि ट्रॉफी भारत की है। नकवी ने माफी माँगने से इनकार कर दिया और बीसीसीआई ने चेतावनी दी कि यह मुद्दा नवंबर की आईसीसी बैठक में उठाया जाएगा। यह विवाद एशियाई क्रिकेट की साख पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर जब 2026 का टी20 विश्व कप नजदीक है।
पहलगाम की छाया और ऑपरेशन सिंदूर
इन खेल विवादों के पीछे आतंकवाद की भयावह सच्चाई है। अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पहलगाम में 26 से अधिक हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी, पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछने के बाद पैंट उतार कर पुष्टि भी की गई और फिर उन्हें निशाना बनाया गया। इस बर्बरता ने भारत में बड़े स्तर पर आक्रोश पैदा किया और भारतीय टीम ने नकवी से एशिया कप ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।
भारत की जवाबी प्रतिक्रिया निर्णायक और विध्वंसक थी। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेनाओं ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। संघर्ष बढ़ने पर भारत ने कम से कम 11 पाकिस्तानी एयरबेस भी तबाह कर दिए। इन हमलों ने पाकिस्तान को युद्धविराम की गुहार लगाने पर मजबूर कर दिया, जो दशकों में उसकी सबसे शर्मनाक सैन्य हारों में से एक थी।
इसके बावजूद पाकिस्तान की सेना और प्रोपेगेंडा मशीन ने इस हार को जीत में बदलने की कोशिश की। हरिस रऊफ का 6-0 इशारा निजी बहादुरी नहीं था, बल्कि रावलपिंडी की दुष्प्रचार रणनीति का प्रतीक था, जिसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र की हार से ध्यान भटकाना और आकर्षक नारों से भ्रम फैलाना था।
BCCI सुनिश्चित करे कि सना मीर अगली उड़ान से इस्लामाबाद लौटें
महिला विश्व कप विवाद, हरिस रऊफ की हरकतें, नकवी की ट्रॉफी चोरी, और पहलगाम नरसंहार अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। ये एक ही पहेली के टुकड़े हैं: एक ऐसा देश जो श्रेष्ठ होने का भ्रम लिए बैठा है, जहाँ क्रिकेटर, मौलवी, कमेंटेटर और जनरल एक ही प्रोपेगेंडा की बोली बोलते हैं।
ICC के लिए चुनौती कड़ी है: सना मीर को जवाबदेह ठहराना और यह सुनिश्चित करना कि क्रिकेट को जियोपॉलिटिक्स के मंच बनाने के लिए हाइजैक न किया जाए। अगर इसे अनदेखा किया गया, तो यह दूसरों को क्रिकेट के वैश्विक मंच का दुरुपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
भारत और BCCI के लिए सबक और भी साफ है। पाकिस्तान के साथ जुड़ाव चाहे वह कूटनीति के लिए हो या क्रिकेट के मैदान पर, परिणाम हमेशा एक ही है- प्रोपेगेंडा, झूठ और नफरत की प्रतिस्पर्धा का पैकेज बना कर पेश करना। भारत और श्रीलंका की ओर से सह-आयोजित टूर्नामेंट में मीर को कमेंट्री बॉक्स में बैठने देना और ‘आजाद कश्मीर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने देना, ये सब असल में BCCI की ओर से पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता देने और भारत का अपमान करने की मंजूरी देने जैसा होगा।
इसका जवाब सिर्फ एक जरिया नहीं हो सकता। BCCI को तय करना चाहिए कि मीर अगली फ्लाइट से इस्लामाबाद लौटें और यह साफ तौर पर बताया दिया जाए कि कोई भी पाकिस्तानी कमेंटेटर क्रिकेट मंच का दुरुपयोग अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिए नहीं कर सकता।
यह केवल सना मीर के बारे में नहीं है। यह PCB, पाकिस्तान के खेल संस्थानों और उस प्रोपेगेंडा मशीनरी के लिए एक लाल रेखा खींचने के बारे में है जो हर अंतरराष्ट्रीय मंच में घुसपैठ करती है।
BCCI दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है। कम से कम इतना तो कर ही सकता है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे PCB और पाकिस्तानियों को यह सिखाए कि बॉस कौन है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का हिस्सा बने रहने के लिए उन्हें किस अनुशासन का पालन करना होगा। इसे अपनी वित्तीय ताकत का इस्तेमाल करके ICC को मजबूर करना चाहिए कि मीर को पाकिस्तान वापस भेजा जाए।
उन्हें घर भेजना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है; यह एक आवश्यक संदेश है कि भारत क्रिकेट के मैदान पर या कमेंट्री बॉक्स में पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को ऑक्सीजन नहीं देगा।
ये खबर मूल रुप से अंग्रेजी में जिनित जैन ने लिखी है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।


