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पटरी पार करने में होती परेशानी, इसलिए वृन्दावन-मथुरा ट्रेन प्रोजेक्ट का स्थानीयों ने किया विरोध: अब रेलवे ने बंद ही कर दी ₹400 करोड़ की योजना, पटरियाँ बिछा के छोड़ा

मथुरा-वृंदावन रेल योजना बंद कर दी गई है। स्थानीय लोगों ने मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने की योजना का विरोध कर रहे थे। इससे पटरी पार करने में परेशानी होती।

रेल मंत्रालय ने मथुरा-वृंदावन रेलवे लाइन को मीटर गेज से ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। परियोजना पर ₹402 करोड़ खर्च होना था। रेल मंत्रालय ने इसे ‘अलाभकारी’ कहा है।

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) जोन में मथुरा-वृंदावन क्षेत्र आता है। रेलवे ने स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कुछ महीने पहले इसे स्थायी रूप से खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। रेलवे बोर्ड ने इसकी जाँच भी की, जिसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने रद्द करने की मंजूरी दे दी।

रेल मंत्रालय ने 6 जून को एनसीआर जोन के महाप्रबंधक को लिखे पत्र में कहा, ” अधिकारियों ने उत्तर मध्य रेलवे के आगरा डिवीजन के मथुरा वृंदावन खंड को स्थायी रूप से बंद करने की मंजूरी दे दी है।” इसने आगे कहा कि यह निर्णय रेल मंत्रालय के वित्त निदेशालय की सहमति से लिया गया है और जोन से आवश्यक कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।

मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदलना था

परियोजना से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दोनों शहरों के बीच रेल संपर्क का काम करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और मथुरा और वृंदावन दोनों तरफ से पटरियाँ बिछाने में काफी समय और पैसा खर्च किया गया था।

रेलवे बोर्ड ने 2017-18 में मथुरा और वृंदावन के बीच मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने की मंजूरी दी थी। इसपर ₹402 करोड़ खर्च होने थे।

फरवरी 2023 में आईएससी नामक कंपनी को ₹191 करोड़ का ठेका दिया गया। 31 मार्च 2023 को मौजूदा ट्रैक को हटाने और नया ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया शुरू की गई। ठेकेदार को 30 मार्च 2025 तक दो साल में काम पूरा करना था।

100 साल से भी अधिक समय से अंग्रेजों द्वारा निर्मित मीटर गेज ट्रैक पर एक कोच वाली रेल बस चलती थी। 2023 की शुरुआत तक दिन में इसे दो बार चलाया जाता था। ब्रॉड गेज के निर्माण के लिए ये सेवा बंद कर दी गई थी।

स्थानीय लोगों ने किया विरोध

गेज परिवर्तन का काम वृंदावन से शुरू किया गया था, लेकिन जून 2023 में मथुरा की तरफ से काम शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई।

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय लोग आसानी से ट्रैक पार कर लेते थे क्योंकि मीटर गेज ज़मीनी स्तर पर था और रेल- बस की गति 1000 मीटर प्रति घंटा थी।

अधिकारियों के अनुसार, नया ट्रैक बाँध पर बनाया जाना था। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे उन्हें पहले की तरह ट्रैक पार करने में असुविधा होगी।

1 सितंबर, 2023 को एनसीआर जोन के वरिष्ठ अधिकारियों, मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त, स्थानीय निवासियों और उनके प्रतिनिधियों सहित अन्य लोगों के बीच एक बैठक हुई। इसमें अधिकांश लोगों ने ब्रॉड गेज रेल लाइन के बजाय रेलवे की भूमि पर सड़क निर्माण की माँग की।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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