भारत सरकार ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार मंत्रालय ने शुक्रवार (28 नवंबर 2025) को एक आदेश जारी किया, जिसमें सभी नए स्मार्टफोन्स पर ‘संचार साथी’ ऐप को प्रीलोड करने का निर्देश दिया गया है। हालाँकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि जो लोग ये ऐप नहीं रखना चाहते, वो इसे डिलीट कर सकते हैं। ये वैकल्पिक है।
#WATCH | Delhi | "… If you don't want Sanchar Sathi, you can delete it. It is optional… It is our duty to introduce this app to everyone. Keeping it in their devices or not, is upto the user…," says Union Minister for Communications Jyotiraditya Scindia. pic.twitter.com/iXzxzfrQxt
— ANI (@ANI) December 2, 2025
आदेश के मुताबिक, एप्पल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी प्रमुख कंपनियों को 90 दिनों के अंदर यह सुनिश्चित करना होगा। सप्लाई चेन में पहले से मौजूद डिवाइसेज पर ओटीए (ओवर-द-एयर) अपडेट के जरिए ऐप पुश किया जाएगा। यह पहली बार है जब भारत में किसी सरकारी ऐप को हर डिवाइस पर अनिवार्य किया गया है, हालाँकि यूजर चाहे तो इसे बंद कर सकता है या डिलीट कर सकता है।
.@DoT_India issues directions for pre-installation of Sanchar Saathi App in mobile handsets to verify the genuineness of mobile handsets
— PIB India (@PIB_India) December 1, 2025
Pre-installed App must be Visible, Functional, and Enabled for users at first setup
Manufacturers must ensure the App is easily accessible…
संचार साथी ऐप की क्या है खासियत?
संचार साथी ऐप जनवरी 2024 में लॉन्च हुआ था और अब तक 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। यह ऐप यूजर्स को फ्रॉड कॉल्स रिपोर्ट करने, चोरी या खोए हुए फोन को आईएमईआई नंबर से ब्लॉक करने, डिवाइस की वैधता जाँचने और फर्जी सिम कनेक्शन्स काटने जैसे कई काम करता है। एक केंद्रीय रजिस्ट्री के जरिए यह सभी टेलीकॉम नेटवर्क पर काम करता है।
सरकार के आँकड़ों के मुताबिक, इस ऐप ने 7 लाख से ज्यादा खोए फोन रिकवर कराए हैं, जिसमें अक्टूबर में अकेले 50,000 फोन शामिल हैं। साथ ही, 3.7 करोड़ चोरी के फोन ब्लॉक किए गए और 30 मिलियन फर्जी कनेक्शन बंद हुए।
इस फैसले से साइबर सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फायदा होगा। भारत में 1.2 अरब से ज्यादा मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं और साइबर क्राइम में तेजी से इजाफा हो रहा है। डुप्लीकेट या स्पूफ्ड आईएमईआई नंबर्स से स्कैम और नेटवर्क दुरुपयोग आम हो गया है। ऐप से यूजर्स को फोन ट्रैकिंग, पुलिस को डिवाइस ट्रेस करने में मदद मिलेगी और ब्लैक मार्केट में नकली फोनों की बिक्री रुकेगी।
साइबर सुरक्षा के लिए बेहद अहम, चोरियों पर लगेगी लगाम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम साइबर थ्रेट्स को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा, “यह ऐप साइबर अपराधों को रोकने के लिए जरूरी है, लेकिन कंपनियों की ओर से चुनौतियाँ जरूर मिलेंगी।”
फोन खोने या चोरी की स्थिति में यह ऐप बेहद सहायक साबित होगा। यूजर ऐप के जरिए तुरंत आईएमईआई ब्लॉक कर सकता है, जिससे चोर फोन का इस्तेमाल न कर सके। केंद्रीय डेटाबेस से ट्रैकिंग आसान हो जाती है और पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने में मदद मिलती है। सरकार का दावा है कि इससे नुकसान कम होगा और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ेगी।
कुछ कंपनियाँ कर सकती हैं सरकार के फैसले का विरोध
हालाँकि, यह फैसला कई कंपनियों को नागवार गुजर रहा है। भारत में 4.5% स्मार्टफोन मार्केट शेयर रखने वाली एप्पल ने पहले ही सरकारी एंटी-स्पैम ऐप के लिए असहमति जताई थी। एप्पल की पॉलिसी में सेल से पहले किसी थर्ड-पार्टी ऐप इंस्टॉल करना मना है।
सूत्रों के मुताबिक, एप्पल ऐसी माँगों को हमेशा ठुकराती रही है। काउंटरपॉइंट के तरुण पाठक ने रॉयटर्स को बताया, “एप्पल मध्य मार्ग तलाशेगी, जैसे यूजर्स को इंस्टॉल के लिए नोटिफाई करना।” सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी भी चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन इनका विरोध प्राइवेसी और यूजर चॉइस पर केंद्रित है।
प्राइवेसी एडवोकेट्स ने भी कड़ी आलोचना की है। टेक्नोलॉजी वकील मिशी चौधरी ने कहा, “सरकार यूजर कंसेंट को खत्म कर रही है। यह यूजर चॉइस को नजरअंदाज करता है।” हालाँकि अब सरकार की सफाई के बाद ये तय हो गया है कि यूजर चाहे तो इस ऐप को हटा भी सकता है।
वैसे, एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में पहले से ही गूगल की तरफ से ‘Find My Device’ जैसे ऐप हैं, लेकिन इन तक सरकार की पहुँच नहीं थी, जिसका साइबर क्रिमिनल फायदा उठाते रहे हैं, क्योंकि ये ऐप फैक्ट्री री-सेट मारने के साथ ही गायब भी हो जाता है। ऐसे में इस ऐप का फायदा ग्राहकों को नहीं मिल पाता।
रूस में मैक्स मैसेंजर ऐप किया जा चुका है अनिवार्य
रूस में अगस्त 2025 में मैक्स मैसेंजर ऐप को अनिवार्य करने पर भी इसी तरह विरोध हुआ था। आलोचक कहते हैं कि बिना पब्लिक कंसल्टेशन के यह सर्विलांस का खतरा बढ़ा सकता है। लेकिन सरकार का तर्क है कि साइबर खतरे इतने गंभीर हैं कि यह कदम जरूरी है।
सिम-वॉट्सऐप को लेकर जारी डायरेक्शन के बाद ये कितना अहम कदम
यह फैसला हाल के सिम बाइंडिंग और वॉट्सऐप पर डायरेक्शन के बाद आया है, जो यूजर वेरिफिकेशन को मजबूत कर रहा है। सिम को बायोमेट्रिक से लिंक करने के बाद यह ऐप अगला कदम है, जो डिवाइस लेवल पर सुरक्षा लाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है, जहाँ रूस के बाद भारत भी स्टेट ऐप्स को पुश कर रहा है। दूरसंचार मंत्रालय ने कहा, “यह टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी को बचाने के लिए अनिवार्य है।”
बता दें कि अब वॉट्सऐप अपने फोन से दूसरी किसी जगह चलाने के लिए हर 6 घंटे में लॉगिन करने की जरूरत पड़ेगी। अब तक डेस्कटॉप पर लॉगिन करने के बाद बार-बार लॉगिन करने की जरूरत नहीं पड़ती थी और बिना सिम-नंबर के भी लंबे समय तक वॉट्सऐप का इस्तेमाल लैपटॉप-डेस्कटॉप पर किया जा सकता था। लेकिन इसका फायदा साइबर अपराधी उठाने लगे थे, जिसके बाद सरकार ने इस पर रोक लगा दी है।
कुल मिलाकर देखा जाएगा तो सरकार के आदेश के बाद सभी स्मार्टफोन में मौजूद संचार साथी ऐप से साइबर फ्रॉड कम होंगे, लेकिन प्राइवेसी बहस तेज हो गई है। बहरहाल, कंपनियाँ 90 दिनों में सरकार के आदेश का अनुपालन करेंगी या कोर्ट जाएँगी, यह देखना दिलचस्प होगा।


