PM मोदी ने किया चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ पद का ऐलान, कारगिल युद्ध के दौरान उठी थी माँग

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) के के सिन्हा ने सरकार के इस फ़ैसले को बहुत बड़ा कदम बताया है। मेजर जनरल (रिटायर्ड) विश्वम्भर दयाल ने भी सरकार के इस फ़ैसले का...

देश की तीनों सेनाओं यानी भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नेवी का आने वाले दिनों में एक ही चीफ़ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (15 अगस्त) को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ (CDS) के पद की घोषणा की। 

दरअसल, 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद जब 2001 में तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण अडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा की तो पाया कि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही है। तब इस बात पर ग़ौर किया गया कि अगर तीनों सेनाओं के बीच तालमेल सही से होता तो भारी क्षति न होती। उस समय चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस के पद पर विचार किया गया, जिसका क़रीब 20 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से आज प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया।

फ़िलहाल, देश में तीनों सेनाओं के अलग-अलग चीफ़ हैं। भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत हैं, एयर फोर्स के चीफ़ बीएस धनोआ हैं और भारतीय नेवी की कमान एडमिरल करमबीर सिंह के हाथों में है। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के अध्यक्ष होते हैं और रक्षा मंत्री तीनों सेनाओं का कामकाज देखते हैं। 

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रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) के के सिन्हा ने सरकार के इस फ़ैसले को बहुत बड़ा कदम बताया है। मेजर जनरल (रिटायर्ड) विश्वम्भर दयाल ने भी सरकार के इस फ़ैसले का तहे दिल से स्वागत किया है। चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस पद के होने से अब तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बैठाने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। सिंगल प्वॉइंट से आदेश जारी होने से सेनाओं की मारक क्षमता और प्रभावी होगी क्योंकि अब सेना के तीनों अंगों के मध्य किसी तरह की कन्फ़्यूज़न की स्थिति नहीं बन पाएगी। जैसा कि पााकिस्तान और चीन के युद्ध के समय देखने को मिली थी।

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