Sunday, June 16, 2024
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‘हो गई गलती… अब क्या मर जाऊँ?’ – श्रृद्धा के 35 टुकड़े करने वाले आफताब को कोई पछतावा नहीं, माँगता है बिसलेरी का पानी और नए कपड़े

श्रद्धा वाकर को मार कर 35 टुकड़ों में काटने और फेंक देने वाले आफताब अमीन पूनावाला को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वो कहता है - "हाँ, मुझसे गलती हुई, हो गई मुझसे गलती। अब क्या मर जाऊँ?"

पालघर की रहने वाली श्रद्धा वाकर को मार कर 35 टुकड़ों में फेंक देने वाले आफताब अमीन पूनावाला को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वह जेल में आज कल श्रद्धा की हत्या में दाखिल की गई 6 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट को पढ़ कर अपना समय निकाल रहा है।

जेल अधिकारियों का कहना है कि आफताब को गिरफ्तार हुए लगभग एक वर्ष हो गया है लेकिन उसने कभी भी श्रद्धा की हत्या पर कोई पछतावा नहीं जताया। उससे जेल में उसके परिवार से भी कोई मिलने नहीं आता। इस मामले में जाँच अधिकारी रहे राम सिंह ने भास्कर को बताया कि आफताब मुंबई पुलिस को भी पूछताछ में गुमराह करता रहा था।

जाँच अधिकारी सिंह का कहना है कि आफताब गुस्सैल भी है। उसने आज तक इस बात पर दुख नहीं जताया कि उसने श्रद्धा की हत्या करके जान ले ली। उसने जाँच के दौरान एक दिन कहा था:

“हाँ, मुझसे गलती हुई, हो गई मुझसे गलती। अब क्या मर जाऊँ?”

आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा को मार दिया था और उसकी लाश के 35 अलग-अलग टुकड़े करके फ्रिज में स्टोर किया था। बाद में इन्हें उसने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में फेंके थे। उसने श्रद्धा की हड्डियों तक को पीस दिया था और रोड पर फेंक दिया था। उसे दिल्ली पुलिस ने 14 नवम्बर को श्रद्धा के पिता की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था

इतने खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले आफताब को अपने इस घिनौने काम पर कोई पछतावा नहीं है। हिंदी समाचार वेबसाइट दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि वह तिहाड़ की जेल नम्बर 4 की 15 नम्बर सेल में चुपचाप रहता है। वह यहाँ चार्जशीट पढ़ता रहता है। वह कभी-कभार बोतलबंद पानी भी माँगता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से सामने आया है कि आफताब को 5 दिसम्बर 2023 को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट वर्तमान में इस मामले की सुनवाई करते हुए 3 गवाहों के बयान दर्ज कर रहा था। इसमें वह डॉक्टर भी शामिल है, जिन्होंने श्रद्धा के शरीर के हिस्सों का पोस्टमॉर्टम किया था।

बताया जा रहा है कि आफ़ताब जब से जेल पहुँचा है, तब से उसका 15 किलोग्राम वजन घट गया है। साकेत कोर्ट में बनाए गए लॉकअप में वह कुछ खाता भी नहीं है। वह केवल अपने साथ ले गए बिस्किट खाकर ही काम चलाता है। उसे डर है कि उसके खाने में जहर मिला दिया जाएगा। यह जानकारी आफताब पर नजर बनाए रखने वाले एक अधिकारी ने दी है।

वह जेल के अंदर बोतलबंद पानी और नए कपड़े माँगता रहता है। हालाँकि, जेल के नियमों के अनुसार उसे इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जाती है। जेल में उसे वही चीजें उपलब्ध करवाई जाती हैं, जो अन्य कैदियों को दी जाती हैं।

आफताब इसलिए अपने खाने में जहर मिलाए जाने की आशंका जताता है क्योंकि जब उसे पहली बार कोर्ट लाया गया था, तब वकीलों ने उसकी पिटाई कर दी थी। उसे जेल में भी अन्य कैदियों ने मारा था। इसीलिए वह तब से डरा हुआ है।

जेल में आने के बाद आफ़ताब ने एक बार टेलीफोन के माध्यम से केवल अपने पिता से बात की है। इसके अलावा ना ही उसने किसी से फ़ोन पर बात की है, ना उससे कोई मिलने आया है। इस मामले में वकील सीमा कुशवाहा का कहना है कि आफ़ताब सुनवाई को लटकाने का प्रयास भी कर रहा है।

उसने अब तक तीन वकील बदले हैं। वर्तमान में अक्षय भंडारी नाम का एक वकील आफताब का केस लड़ रहा है। जब भी नया वकील आता है तो वह सुनवाई में यह कहता है कि उसे चार्जशीट पढ़ने और केस को समझने के लिए थोड़ा समय चाहिए, इसी कारण से सुनवाई में देर हो रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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