Homeदेश-समाज'एक और गोधरा की साजिश': गुजरात में कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने श्रद्धालुओं से भरी...

‘एक और गोधरा की साजिश’: गुजरात में कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने श्रद्धालुओं से भरी बस को रोका, कहा – हमारे इलाके में नहीं चलेगा ‘जय श्री राम’

हिंदू यात्री बस में बैठकर 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए रामधुन गा रहे थे। बस जैसे ही दाणीलीमडा के चंडोला पहुँची, वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने बस को रोक लिया।

गुजरात के अहमदाबाद से इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ की नापाक हरकत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें कई कट्टरपंथी मुस्लिम हिंदू कार्यकर्ताओं से भरी एक बस को बीच सड़क पर घेरकर धमकाते नजर आ रहे हैं।

बजरंग दल ने 8 अक्टूबर, 2023 को अहमदाबाद के रिवरफ्रंट पर ‘शौर्य यात्रा’ का आयोजन किया था। यात्रा समाप्त होने के बाद हिंदू कार्यकर्ता अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान यह घटना सामने आई। शुरुआत में यह वीडियो जमालपुर का बताया जा रहा था। लेकिन, ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया कि वीडियो दाणीलीमडा के चंडोला इलाके का है।

बताया जा रहा है कि हिंदू यात्री बस में बैठकर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए रामधुन गा रहे थे। बस जैसे ही दाणीलीमडा के चंडोला पहुँची, वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने बस को रोक लिया। इसके बाद उन कट्टरपंथियों ने हिंदुओं से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया। वीडियो में मुस्लिमों को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “तुम हमारे क्षेत्र में (‘जय श्री राम’ के) नारे क्यों लगा रहे हो? अगर नारे लगाना चाहते हो तो अपने क्षेत्र में जाओ वहाँ लगाओ।” बता दें कि चंडोला मुस्लिम बाहुल्य इलाका है।

वहीं, वीडियो में एक अन्य मुस्लिम धमकी भरे लहजे में हिंदुओं से सवाल करता नजर आ रहा है। वह कहता है, “अगर हम तुमलोगों के इलाके में नारा-ए-तकबीर और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाएँ तो क्या होगा?” इस वीडियो में पुलिसकर्मी भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ के आगे वे भी बेबस नजर आए।”

इस मामले में ऑपइंडिया ने ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) गुजरात के प्रवक्ता हितेंद्र सिंह राजपूत से बात की। इसमें उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। क्या अब गुजरात में हिंदुओं के ‘जय श्री राम’ बोलने पर प्रतिबंध है? मुस्लिम भीड़ का हिंदू तीर्थयात्रियों की बस रोकने के पीछे आखिर क्या मकसद था?”

साल 2002 में हिंदू कारसेवकों से भरी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की कोच में आगे लगाने की घटना को याद करते हुए हितेंद्र ने आगे कहा, “हिंदू तीर्थयात्री अपने घर लौट रहे थे। इसको रोकने का क्या मतलब था? इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है? कहीं ये लोग एक और गोधरा कांड को तो अंजाम नहीं देना चाहते थे?”

इसके अलावा उन्होंने गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी और गुजरात पुलिस के डीजीपी से मामले की गहराई से जाँच करने का अनुरोध किया है। उन्होंने वायरल वीडियो के आधार पर इसमें दिख रहे इस्लामी कट्टरपंथियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बता दें कि इस मामले में अब तक किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। लेकिन, इसको लेकर सोशल मीडिया में हिंदू अपना गुस्सा दिखाते नजर आ रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -