Thursday, May 23, 2024
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तिरंगा यात्रा निकालने वाले हिंदू छात्र नेता को भी AMU ने निकाला था, दानिश रहीम की गुहार के बाद लोगों को याद आए अजय सिंह

उन्हें 'तिरंगा यात्रा' निकालने के लिए भी विश्वविद्यालय की तरफ से 'कारण बताओ नोटिस' भेजा गया था। दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने पर भी उन्हें 'शो कॉज नोटिस' जारी किया गया था।

एक छात्र दानिश रहीम ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण उसे AMU प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उससे डिग्री वापस माँगी जा रही है। उसने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। हालाँकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र के आरोपों को नकार दिया है। PHD स्कॉलर दानिश रहीम ने इस मामले में हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की है। उसका कहना है कि AMU ने नोटिस भेजकर लिंग्विस्टिक की डिग्री लौटाने और इसके बदले LAM में डिग्री लेने को कहा। उसका कहना ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ की थी। इस घटना ने लोगों को ठाकुर अजय सिंह की याद दिला दी है।

याद दिला दें कि इस साल अप्रैल महीने में उत्तर प्रदेश में स्थित ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के हिन्दू छात्र नेता ठाकुर अजय सिंह को प्रतिबंधित कर दिया। इतना ही नहीं, उनके आगे की पढ़ाई करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। हिन्दू छात्रों पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर मुखर रहे ठाकुर अजय सिंह को एक तरह से AMU में शिक्षा के अधिकार से आजीवन वंचित कर दिया गया। उन्हें 13 फरवरी, 2019 को ही निलंबित किया जा चुका था। AMU से सम्बद्ध अन्य संस्थानों में भी उनके लिए एंट्री बैन कर दी गई थी।

इसके बाद अंतिम निर्णय के लिए AMU ने अपनी अनुशासन समिति के पास रिपोर्ट भेजी थी। उन्हें समिति के समक्ष और कुलपति के दफ्तर में हाजिरी लगाने के लिए समन भी भेजा गया था। AMU का दावा है कि ठाकुर अजय सिंह अनुशासन समिति के समक्ष पेश हुए और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया। AMU द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि छात्र ठाकुर अजय सिंह ने कहा कि वो विश्वविद्यालय का सम्मान करते हैं और वो किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि अगर कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हुआ भी तो वो अंडरस्टैंडिंग की कमी के कारण हुआ। दावा किया गया कि अपने व्यवहार के लिए वो अफ़सोस जता रहे हैं। अब कुलपति ने आदेश जारी किया है कि ठाकुर अजय सिंह के LLM परीक्षा के परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए। साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय में आगे की किसी प्रकार की भी पढ़ाई के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। हालाँकि, उनके पास इस निर्णय के खिलाफ AMU की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के पास अपील करने के विकल्प खुले हैं।

बता दें कि फरवरी 2019 में AMU में हिन्दू छात्रों की पिटाई और उनकी गाड़ियाँ जलाने के आरोप लगे थे, जिसमें अजय सिंह भी घायल हो गए थे। AMU के छात्रों ने मीडिया के साथ भी हाथापाई की थी। इस मामले में FIR भी दर्ज हुई थी। रीढ़ की हड्डी और सिर में जख्म के कारण अजय सिंह को एक सप्ताह अस्पताल में गुजारने पड़े थे। इसके बाद हिन्दू छात्रों ने AIMIM के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया गया कि उनके उकसाने पर ही हिन्दू छात्रों के खिलाफ हिंसा हुई।

ऑपइंडिया ने इस मामले में ठाकुर अजय सिंह से बात की। हिन्दू छात्र नेता ने बताया कि उन्होंने 2011 में AMU में दाखिला लिया था। उस दौरान वो लोग इतने सक्रिय नहीं थे। इंटरमीडिएट के बाद 2013 में उन्होंने स्नातक के कोइस के लिए दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि इसके बाद वो छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और हिन्दू छात्रों के हक़ के लिए आवाज़ उठाने लगे। उन्होंने 2017 में छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी लड़ा, जहाँ वो सेकंड रनर अप रहे।

उन्हें ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने के लिए भी विश्वविद्यालय की तरफ से ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा गया। दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने पर भी उन्हें ‘शो कॉज नोटिस’ जारी किया गया। उन्होंने कहा कि AMU में भाजपा नेताओं का विरोध होता था, यहाँ तक कि राष्ट्रपति का भी विरोध हुआ। ठाकुर अजय सिंह बताते हैं कि 2019 में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का यहाँ कार्यक्रम प्रस्तावित हुआ और देश की सभी इस्लामी पार्टियों को मिला कर एक मुस्लिम फ्रंट बनाने की कोशिश की गई।

बता दें कि ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने के बाद AMU ने हिन्दू छात्रों कई गंभीर आरोप लगाए थे– बिना अनुमति यात्रा निकालना, यूनिवर्सिटी कैंपस में शैक्षणिक माहौल को ख़राब करना, क्लास में पढ़ रहे छात्रों को बहका कर रैली में ले जाना, यात्रा में असामाजिक तत्वों का शामिल होना, AMU को बदनाम करना, और छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा करना। भाजपा सांसद सतीश गौतम ने तब केंद्र सरकार को पत्र लिख कर AMU प्रशासन पर कार्रवाई की भी माँग की थी।

वो बताते हैं, “हमने असदुद्दीन ओवैसी का विरोध किया। हमारे ऊपर गोलीबारी भी हुई। हमारी गाड़ियों को जला दिया गया। गाड़ियों के नंबर इंटरनेट पर सर्च कर-कर के 15 गाड़ियाँ जला दी गईं। उसी दौरान हमारा निलंबन कर दिया गया। मुझे अब आगे की पढ़ाई के लिए भी रोक दिया गया है। अब मैं विश्वविद्यालय से बाहर हूँ। मैं एक पारिवारिक समस्या में भी पड़ा हुआ था। अब मैं उच्च-न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊँगा। पहले भी न्यायालय से मुझे मदद मिली थी।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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