Tuesday, September 28, 2021
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ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक: काशी विश्वनाथ मंदिर केस आया नया मोड़

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इस विवाद से जुड़ा एक मामला पहले से ही जब हाईकोर्ट में पेंडिंग है तो वाराणसी की अदालत को इस मामले में फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने कहा कि यह फैसला गलत है औऱ इसे रद्द कर देना चाहिए।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (9 सितंबर 2021) को ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर भूमि विवाद मामले में वाराणसी की निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का व्यापक भौतिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था।

दरअसल, इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड और मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद HC में याचिका दायर कर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया था। 1991 के पूजा स्थल अधिनियम के अनुसार, 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी पूजा स्थल को दूसरे मंदिर में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इसी के आधार पर एएसआई के सर्वे को चुनौती दी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इस विवाद से जुड़ा एक मामला पहले से ही जब हाईकोर्ट में पेंडिंग है तो वाराणसी की अदालत को इस मामले में फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने कहा कि यह फैसला गलत है औऱ इसे रद्द कर देना चाहिए।

मुस्लिम संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील एसएफए नकवी ने इसको लोवर कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था, “उच्च न्यायालय ने मुकदमे की स्थिरता के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत को तब तक वाद में कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए था जब तक कि उच्च न्यायालय द्वारा मुकदमे की स्थिरता के मुद्दे पर फैसला नहीं किया जाता है।”

मंदिर पक्षकारों का कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था जिसकी वास्तविकता जानने के लिए मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराना जरूरी है। मंदिर पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर की खुदाई के बाद मंदिर के अवशेषों पर तामीर मस्जिद के सबूत अवश्य मिलेंगें। इसलिए एएसआई सर्वेक्षण किया जाना बेहद जरूरी है। मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण से यह साफ हो सकेगा कि मस्जिद जिस जगह तामीर हुई है वह जमीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं।

गौरतलब है कि वाराणसी की अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद की उस विवादित भूमि को लेकर याचिका दायर की गई थी जिसको लेकर दावा किया गया था कि मुगल आक्रान्ता औरंगजेब ने 2000 साल पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को ज्ञानवापी मस्जिद बनाने के लिए सन 1669 में ढहा दिया था।

उल्लेखनीय है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला इसी साल अप्रैल महीने में सुनाया था। कोर्ट ने मस्जिद के एएसआई सर्वे का आदेश देते हुए कहा था कि इसका सारा खर्च सरकार को वहन करना होगा।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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