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आज योगेश है, कल हरीश था: अलवर में 2 साल पहले भी हुई थी दलित की मॉब लिंचिंग, अंधे पिता ने कर ली थी आत्महत्या

जुलाई 2019 में दलित युवक हरीश जाटव की मॉब लिंचिंग हुई थी। कारण- बाइक से मुस्लिम महिला का टकराना। इस घटना के लगभग एक महीने बाद दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने भी ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली थी।

आज जब राजस्थान के अलवर में योगेश जाटव नाम के दलित युवक की मॉब लिंचिंग की खबर सुर्ख़ियों में है, मुस्लिम भीड़ द्वारा 2 साल पहले हरीश जाटव की हत्या को भी याद कीजिए। ताज़ा घटना 15 सितंबर, 2021 की है। पिछली घटना 16 जुलाई, 2019 की। राज्य में तब भी अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। आइए, जानते हैं कि दलित हरीश जाटव के साथ क्या हुआ था।

जुलाई 2019: दलित हरीश जाटव की कर दी गई थी हत्या

राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित युवक को इस कदर पीटा गया था कि दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक का कसूर केवल इतना था कि उसके बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। उक्त युवक अलवर जिले के चौपांकी थाना इलाके में फसला गाँव से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक से हकीमन नाम की महिला को टक्कर लग गई। हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने हरीश की पिटाई शुरू कर दी।

इस घटना के लगभग एक महीने बाद बेटे की हत्या मामले में संवेदनहीनता दिखाने से परेशान दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने भी ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया था कि रतिराम जाटव पुलिस से परेशान थे क्योंकि वो उसके बेटे हरीश जाटव की मौत की जाँच को दबाने की कोशिश कर रही थी। अपने अंतिम क्षणों में भी पुलिस पर आरोप लगाया कि वो उसके बेटे की हत्या के आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है।

राजस्थान में मजहबी भीड़ की पिटाई के कारण जान गॅंवाने वाले युवक हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता रत्तीराम के शव के साथ भिवाड़ी में लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान लोगों की पुलिस से झड़प हो गई थी। न्याय न मिलने के कारण परिवार ने आत्मदाह की चेतावनी दी थी। अलवर एसपी ने प्रेसवार्ता कर हरीश की मौत को एक एक्सीडेंट करार दिया था। भाजपा नेताओं ने पीड़ित परिजनों व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिल कर न्याय की माँग की थी।

सितंबर 2021: अब दलित युवक योगेश जाटव की मॉब लिंचिंग

वहीं ताज़ा घटना की बात करें तो बड़ौदामेव के मीना का बास इलाके में बुधवार (15 सितम्बर, 2021) को भटपुरा निवासी योगेश जाटव बाइक से गाँव की तरफ जा रहे थे। रास्ते में एक गड्ढा था, ऐसे में दुर्घटना हो गई और उनकी बाइक एक महिला से टकरा गई। इसके बाद शुरू हुआ मुस्लिम भीड़ का आतंक। दलित युवक की इतनी पिटाई की गई कि वो कोमा में चला गया। 3 दिन इलाज चला, जिसके बाद जयपुर में शनिवार को योगेश की मौत हो गई

अगले ही दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने बडौदामेव में अलवर-भरतपुर रोड पर दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन के साथ किसी तरह समझौता हुआ, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने को परिजन राजी हुए। आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर के जेल भेजे जाने की माँग के साथ-साथ ग्रामीणों ने पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता देने के लिए सरकार से माँग की है।

इस घटना के अगले ही दिन परिजनों ने FIR दर्ज करवा दी थी, जिसमें 6 लोगों को आरोपित बनाया गया था। रसीद पुत्र नामालूम, साजेत पठान, मुबीना पत्नी नामालूम तथा अन्य चार लोगों के नाम FIR में शामिल थे। ग्रामीणों के आक्रोश के कारण अलवर-भरतपुर मार्ग घंटों जाम रहा। योगेश जाटव की उम्र मात्र 17 वर्ष ही बताई जा रही है। चार बहनों का वो इकलौता भाई था, ऐसे में परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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