राजस्थान: मुसलमानों के हाथों मारे गए हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

हरीश जाटव के परिजन जल्द न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की तैयारी में हैं। परिजनों का दावा है कि पुलिस के काम करने के तरीके से परेशान होकर ही रत्तीराम ने आत्महत्या की।

राजस्थान में मुस्लिम भीड़ की पिटाई के कारण जान गॅंवाने वाले युवक हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता रत्तीराम के शव के साथ भिवाड़ी में लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों की पुलिस से झड़प हो गई।

जाटव मामले की पुलिसिया जॉंच से परेशान होकर उसके पिता ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उसके परिवार के लोगों ने न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह करने की चेतावनी प्रशासन को दी थी। जाटव के परिजन और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को दबाने में जुटी है।

राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस घटना को लेकर प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा है, “सरकार एक तरफ तो मॉब लिंचिंग पर कानून लाकर दिखावा कर रही, दूसरी ओर हरीश जाटव हत्याकांड को दबाने में लगी।”

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हरीश जाटव के परिजन जल्द न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की तैयारी में हैं। परिजनों का दावा है कि पुलिस के काम करने के तरीके से परेशान होकर ही रत्तीराम ने आत्महत्या की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अलवर पुलिस मॉब लिंचिंग के इस मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।

गत 16 जुलाई को हरीश जाटव बाइक पर सवार होकर अलवर के भिवाड़ी से अपने गाँव झिवाणा जा रहा था। रास्ते में फलसा गाँव में हरीश की बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद मुस्लिम महिला के परिजनों ने हरीश की जमकर पिटाई की। वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान 18 जुलाई को हरीश की मौत हो गई। हरीश के परिजन इसे मॉब लिंचिंग की घटना बता रहे, वहीं अलवर एसपी ने प्रेसवार्ता कर हरीश की मौत को एक एक्सीडेंट करार दिया।

इस मामले में पुलिस की कथित लापरवाही और हरीश के नेत्रहीन पिता की आत्महत्या के बाद दलित समाज के लोग टपूकड़ा में एकत्रित हो गए थे और आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की चेतावनी दी थी।

मामला सामने आने के बाद बसपा और भाजपा के नेता भी टपूकड़ा में हैं। दलित समाज के आक्रोश को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दलित समाज के प्रमुख लोगों को समझाने के प्रयास में जुटे है।

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