हिंदू धर्म और उनके देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक बातें करना, उसे ‘सामाजिक न्याय’ और ‘तर्कवाद’ का नाम देना, आजकल एक गलत चलन बनता जा रहा है। ऐसे ही एक ताजे मामले में खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले सतीश बौद्ध ने हिंदू आस्था पर एक और हमला किया। सतीश ने 18 अप्रैल 2026 को दिल्ली के अशोक नगर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणियाँ की। उनके इन बयानों के बाद लोगों में भारी नाराजगी है और कई लोग उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।
यह कार्यक्रम डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। अपने भाषण में सतीश बौद्ध ने पहले मनुवाद, जाति व्यवस्था और अंधविश्वास जैसे मुद्दों पर बात की। इसके जरिए सतीश ने दलित हिंदुओं को बौद्ध धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। लेकिन इसके बाद उसने हिंदू देवी-देवताओं, धर्मग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें कहीं, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
सतीश बौद्ध ने किया माता सीता का अपमान
माता सीता के दिव्य जन्म की कथा का मजाक उड़ाते हुए सतीश बौद्ध ने कहा, “एक राजा और रानी थे। उन्हें संतान नहीं हो रही थी, तो किसी डॉक्टर के पास जाना चाहिए था, लेकिन एक ऋषि ने कहा कि अगर राजा और रानी मिलकर खेत जोतेंगे, तो उन्हें संतान होगी। फिर जब हल जमीन में अटक गया, तो वहाँ एक घड़ा मिला। उस घड़े में एक लड़की थी, उसी लड़की का नाम सीता राखा गया।”
सतीश बौद्ध ने आगे कहा, “मैं एक बात नहीं समझ पाया। क्या खुदाई करने पर बच्चे निकलते हैं, क्या वे बच्चे होते हैं या आलू-मूली। हमने इसे सच मान लिया, क्योंकि हमने बुद्ध का सहारा नहीं लिया, क्या सच में ऐसा हो सकता है कि जमीन खोदने पर एक लड़की बाहर निकल जाए।”
अंबेडकरवादी सतीश ने गंदे इशारे करते हुए भगवान कृष्ण की जन्मकथा का उड़ाया मजाक
अपने भाषण में सतीश बौद्ध ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके जन्म की कथा का भी मजाक उड़ाया। सतीश ने हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित श्रीकृष्ण के जन्म और शिशु की अदला-बदली की कहानी पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की।
सतीश ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके जन्म की कथा का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वासुदेव, ओ बाबूजी… बड़ी मुश्किल से उनका रिश्ता हुआ था… कंस ने दोनों को एक साथ बंद कर दिया… जबकि पुरुषों को अलग और महिलाओं को अलग बंद किया जाता है, लेकिन कंस ने दोनों को साथ ही कैद कर दिया। फिर वहाँ खेती शुरू हो गई, आठवें बच्चे का जन्म होने वाला था… वासुदेव उस लड़के को लेकर निकल पड़े… वहाँ जाकर बच्चे बदल दिए… मैंने लड़के को वहाँ दे दिया और लड़की को यहाँ ले आया। जो लड़की यहाँ आई… वह उससे भी ज्यादा चालाक निकली, वह हवा में उड़ते हुए कह रही थी… ‘कंस बेटा तुम्हारे इंतजाम हो चुके हैं’… इस तरह हम अंधकार से और गहरे अंधकार की ओर बढ़ रहे हैं।”
सतीश ने यह बात वहाँ मौजूद खुश और समान विचारधारा वाली भीड़ के बीच कही। सतीश ने आगे भगवान श्रीकृष्ण को ‘महिलाओं के पीछे भागने वाला’ बताया और लोगों को यह कहकर ताना मारा कि वे ऐसे व्यक्ति के सम्मान में उनका जन्मदिवस मनाते हैं और केक काटते हैं।
महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण और उनके सम्मान से जुड़े प्रसंग का उड़ाया मजाक
माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने के बाद सतीश बौद्ध ने महाभारत की महारानी द्रौपदी का भी अपमान किया। सतीश ने द्रौपदी चीरहरण की घटना का जिक्र किया। इस दौरान सतीश ने गलत तरीके से दावा किया कि पांडव द्रौपदी का चीरहरण करना चाहते थे, जबकि वास्तव में यह कौरवों ने किया था। इतना ही नहीं, सतीश ने इस घटना में दलित-सवर्ण का मुद्दा जोड़कर सवर्ण हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश भी की।
सतीश ने कहा, “वहाँ एक महिला खड़ी थी, उसका नाम द्रौपदी था। जब पांडवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने की योजना बनाई, तब उस सभा में कोई दलित था क्या… वे शूद्र नहीं थे बल्कि अतिशूद्र थे, जिन लोगों ने उस महिला का अपमान किया वे भी ऊँची जाति के थे, जिसने जुए में उस महिला को दाँव पर लगाया… वह भी सवर्ण था… इन लोगों की कहानियों ने हमें बर्बाद कर दिया है। दोस्त… हम अंधकार से और गहरे अंधकार की ओर बढ़ रहे हैं… इन लोगों की कहानियों ने हमें बर्बाद कर दिया है।”
हिंदू विरोधी ईसाई मिशनरियों या नफरत फैलाने वाले किसी इस्लामी कट्टरपंथी की तरह सतीश बौद्ध ने भी हिंदू देवी-देवताओं और धर्मग्रंथों का खुलकर मजाक उड़ाया। उनकी बातें अपमान, अश्लील इशारों और शास्त्रों की गलत व्याख्या पर आधारित थी, जिनका मकसद दलित हिंदुओं को सनातन धर्म से दूर करना था। सतीश बौद्ध ने जानबूझकर हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित घटनाओं को उनके सही नैतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक संदर्भ से अलग करके पेश किया। इस तरह सतीश ने शास्त्रों की मूल शिक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की।
यह भी गौर करने वाली बात है कि सतीश बौद्ध, ईसाई मिशनरी और TCS नासिक कांड में आरोपित इस्लामी कट्टरपंथी, सभी हिंदुओं के प्रति एक जैसी नफरत रखते हैं और हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने में समान रूचि दिखाते हैं। पहले भी रिपोर्ट में सामने आया था कि TCS नासिक कांड के मुस्लिम आरोपित हिंदू आस्था का मजाक उड़ाते थे। वे ‘भगवान श्रीकृष्ण को महिलाओं के पीछे भागने वाला’ बताते थे, ‘शिवलिंग को लिंग’ बताते थे और ‘द्रौपदी को चरित्रहीन’ बताते थे।
सतीश बौद्ध के खिलाफ हिंदुओं की सख्त कार्रवाई की माँग
यह भारत जैसे हिंदू बहुल देष की एक दुखद सच्चाई है कि गौतम खट्टर जैसे हिंदुओं पर केवल एक 16वीं सदी के ईसाई मिशनरी की आलोचना करने पर मुकदमा दर्ज हो जाता, जबकि उस मिशनरी पर हजारों हिंदुओं को प्रताड़ित करने, उनकी हत्या करने और जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप हैं। वहीं, भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाने वाले इस्लामी कट्टरपंथी मशहूर हो जाते हैं और सतीश बौद्ध जैसे लोग हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करके खुद को ‘तर्कवादी’ और ‘सामाजिक न्याय का योद्धा’ कहलवाने लगते हैं।
सतीश बद्ध का भाषण सोशल मीडिया पर कोई खुद को ‘अंबेडकरवादी’ बताने वाले अकाउंट्स ने तेजी से शेयर किया। उनके हिंदू विरोधी बयानों वाले कई वीडियो वायरल होने के बाद हिंदुओं में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और तुरंत गिरफ्तारी की माँग की है।
इसी क्रम में ‘एक्स’ पर एक यूजर ने लिखा,”नई दिल्ली के अशोकनगर में इस व्यक्ति ने हिंदू धर्म और हिंदू देवी-देवताओं का लगातार अपमान किया। इसने माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण और महादेव का मजाक उड़ाया। इतना ही नहीं, वासुदेव के लिए भी बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद इस वीडियो को @BahujanDastakTV के सोशल मीडिया चैनलों पर शेयर किया गया। इन बयानों से हमारी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। मैं @DelhiPolice और @DCPSouthDelhi से आग्रह करता हूँ कि इस वक्ता, सोशल मीडिया हैंडल चलाने वालों और कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, क्योंकि ये लोग समाज में नफरत फैलाने और लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं।”
In Ashoknagar, New Delhi
— INDIAN MERIT (@UnreservedMERIT) April 23, 2026
This man kept on mocking Hindu Dharm , Hindu Dieties .
> Mocked Mata Sita .
> Mocked Shri Krishna .
> Called Vasudev – R**dwa .
> Mocked Mahadev
and so on .. and published video on their social media channels @BahujanDastakTv .
These statements… pic.twitter.com/f7BjyeSOcV
साकेत ने लिखा, “अगर गोवा पुलिस मध्यकाल के एक पादरी के बारे में तथ्य साझा करने पर किसी व्यक्ति को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर सकती है, तो फिर @DelhiPolice खुलेआम ईशनिंदा करने और समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं कर सकती?”
If Goa Police can go to Uttarakhand and pick someone for posting facts on a priest from medieval era, why cannot @DelhiPolice do the same for straight forward blasphemy and attempt to create disharmony. https://t.co/GzmYOkysOi
— saket साकेत ಸಾಕೇತ್ 🇮🇳 (@saket71) April 23, 2026
‘सवर्ण वॉइस’ नाम के एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली के अशोकनगर में एक व्यक्ति ने @BahujanDastakTV के कार्यक्रम में माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण, वासुदेव और महादेव का अपमान किया। इसके बाद इस पूरे वीडियो को गर्व के साथ अपने सोशल मीडिया चैनलों पर भी शेयर किया। यह कैसी समानता की बात है, जहाँ हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करके करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जाती है और फिर इसे सामाजिक न्याय का नाम दिया जाता है। मैं @DelhiPolice और @DCPSouthDelhi से माँग करता हूँ कि वक्ता, सोशळ मीडिया हैंडल चलाने वालों और कार्य़क्रम के आयोजकों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए। क्या धार्मिक भावनाएँ आहत होना केवल तब अपराध माना जाता है, जब मामला हिंदुओं से जुड़ा न हो? समाज में फूट डालने और नफरत फैलाने की इस कोशिश को तुरंत रोका जाना चाहिए।”
🚨 Ashoknagar, Delhi just dropped the most revolutionary content ever 😂
— Sawarn Voice 🔥 (@Bhairaviyogi) April 23, 2026
Some genius from @BahujanDastakTv spent his evening mocking Mata Sita, roasting Shri Krishna, calling Vasudev a straight-up Rdwa**, and dragging Mahadev too.
Then they proudly uploaded the whole circus on… pic.twitter.com/exnea6YMCj
सतीश बौद्ध कौन है?
सतीश बौद्ध खुद को अंबेडकरवादी बौद्ध कार्यकर्ता और सार्वजनिक वक्ता बताता है। वह अंबेडकरवादी कार्यक्रमों में हिंदू विरोधी भाषण देने के लिए बदनाम है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का मजाक उड़ाने वाले पोस्ट और वीडियो बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, सतीश बौद्ध गाजियाबाद का रहने वाला है और खुद को एक ‘इंडिपेंडेंड कॉरपोरेट ट्रेनिंग कंसलटेंट’ बताता है। साल 2017 में सतीश ने एक मुस्लिम भीड़ को संबोधित करते हुए हिंदुओं, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। सतीश ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘भगवा गुंडा’ कहा और भीड़ को भड़काने की कोशिश की। इतना ही नहीं, BJP पर हमला करते हुए सतीश ने EVM हैकिंग के आरोप भी लगाए और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल तक खड़े किए।
हाल ही में सतीश बौद्ध ने कई भ्रामक दावे किए। सतीश ने कहा कि मनुवादी पुरुष विधवाओं को जबरन अपने मृत पतियों की चिता पर बैठाकर ‘सती’ बनने के लिए मजबूर करते थे। इतना ही नहीं सतीश मध्यकाल में इस्लामी आक्रमणकारियों से अपनी इज्जत और धर्म की रक्षा के लिए हिंदू महिलाओं द्वारा किए गए ‘जौहर’ का भी मजाक उड़ाया।

हैरानी की बात नहीं है कि सतीश बौद्ध हिंदू विरोधी विचारों के लिए चर्चित ऐर पेरियार के नाम से प्रसिद्ध ईवी रामास्वामी नायकर का भी महिमामंडन करता है। ये वही पेरियार है, जो अपने अनुयायियों से कहते थे कि अगर रास्ते में कभी ब्राह्मण और साँप एक साथ मिल जाएँ, तो पहले ब्राह्मण को मारो।

सतीश बौद्ध की हालिया हिंदू विरोधी टिप्पणियों से भले ही व्यापक आक्रोश फैल गया हो, लेकिन यह पहली बार नहीं है। खुद को अंबेडकरवादी बताने वाला सतीश बौद्ध लंबे समय से अपने भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हिंदू देवी-देवताओं, धर्मग्रंथों और परंपराओं को निशाना बनाते रहे हैं। वह यह सब ‘तर्कवादी सोच’, सामाजिक न्याय और बौद्ध धर्म के प्रचार के नाम पर करता आया है।
(मूलरूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)


