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मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, माइक पर अजान की इजाजत देने से इनकार

इससे पहले 2020 में एक फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लाडस्पीकर से अजान की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा है कि लाडस्पीकर से अजान देना मौलिक अधिकार नहीं है। इसको लेकर पहले ही कानून पास हो चुका है। जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने इरफान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के बदायूँ के रहने वाले इरफान ने एसडीएम तहसील बिसौली, जिला बदायूं द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसमें अजान के समय गाँव की मस्जिद में लाउडस्पीकर/माइक के इस्तेमाल की अनुमति माँगी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की माँग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि कोई भी धर्म पूजा या इबादत के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता। इरफान का कहना था कि एसडीएम द्वारा पारित आदेश पूरी तरह से अवैध था और मस्जिद से लाउडस्पीकर बजाने पर रोक उसके मौलिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी दलीलें खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अब यह कानून पास हो गया है कि मस्जिद से लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मौलिक अधिकार नहीं है। इस तरह से याचिका स्पष्ट रूप से गलत है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

गौरतलब है कि 2020 में एक फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा था कि अजान इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकता। इसके लिए कोर्ट ने तर्क दिया था कि लाउडस्पीकर के आने से पहले मस्जिदों से मानव आवाज में अजान दी जाती थी। मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है। गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी ने इस संबंध में याचिका डाली थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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