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मुस्लिम दुकानदारों के साथ कारोबार जारी रखेगा बाँके बिहारी मंदिर, पहलगाम अटैक के बाद बहिष्कार की हो रही थी माँग: पुजारियों ने बताया ‘अव्यावहारिक’

काशी विद्वत परिषद के सदस्य नागेंद्र महाराज ने कहा था, "हमने मुस्लिम दुकानों की पहचान कर ली है। हिंदू दुकानदारों से कहा गया है कि वे उनके साथ व्यापार न करें और न ही उस समुदाय के लोगों को नौकरी दें।"

वृंदावन के मशहूर बाँके बिहारी मंदिर ने मुस्लिम समुदाय के साथ व्यापार बंद करने की माँग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। मंदिर के पुजारी और प्रबंध समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने इस माँग को व्यवहारिक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम बरसों से शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने वृंदावन और मथुरा में प्रदर्शन किए। इन संगठनों ने हिंदू तीर्थयात्रियों और दुकानदारों से मुस्लिम समुदाय के साथ लेन-देन न करने की अपील की। साथ ही, मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखें, ताकि उनकी पहचान हो सके।

काशी विद्वत परिषद के सदस्य नागेंद्र महाराज ने कहा था, “हमने मुस्लिम दुकानों की पहचान कर ली है। हिंदू दुकानदारों से कहा गया है कि वे उनके साथ व्यापार न करें और न ही उस समुदाय के लोगों को नौकरी दें।”

मुस्लिमों की बाँके बिहारी में आस्था

लेकिन मंदिर प्रशासन ने इस माँग को खारिज कर दिया। मंदिर के पुजारी और प्रबंधन समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने सोमवार (28 अप्रैल 2025) को बयान दिया, “यह माँग व्यवहारिक नहीं है। मुस्लिम कारीगर और बुनकर यहाँ बाँके बिहारी के लिए वस्त्र बुनते हैं। कई मुस्लिम भक्त भी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।” उन्होंने बताया कि भगवान के लिए मुकुट और चूड़ियाँ जैसे सामान भी मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। गोस्वामी ने कहा कि ज्यादातर स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मंदिर में सभी समुदायों का योगदान बना रहना चाहिए।

पहलगाम हमले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमले के दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम सरकार के साथ हैं। लेकिन वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते हैं।”

बता दें कि पिछले महीने भी मंदिर प्रशासन ने एक प्रस्ताव खारिज किया था, जिसमें मुस्लिम बुनकरों के बनाए भगवान कृष्ण के वस्त्रों पर रोक की बात थी। उस समय मंदिर ने कहा था कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता सबसे जरूरी है। अगर मुस्लिम कारीगर आस्था के साथ वस्त्र बनाते हैं, तो उनके वस्त्र लेने में कोई परेशानी नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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