Wednesday, January 27, 2021
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CCTV कैमरों और स्ट्रीटलाइट्स को तोड़ा, फिर धारदार हथियार से थाने पर हमला: बेंगलुरु दंगे की पूरी प्लानिंग

दंगाइयों से डर और खौफ का आलम यह था कि डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने आस-पास के इलाकों में भाग कर शरण ली और उन्हें अतिरिक्त सुरक्षाबल के आने का इंतजार करना पड़ा।

बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के दौरान उग्र भीड़ डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बेसमेंट में घुस गई और कथित तौर पर 200-250 वाहनों में आग लगा दी। खबरों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस विधायक के आवास पर तोड़फोड़ करने वाली संप्रदाय विशेष की भीड़ ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को पुलिस थाने में यह मानकर तोड़फोड़ और वाहनों को क्षतिग्रस्त किया कि पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में रखा है।

जिन पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की, उन पर भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप 60 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। मंगलवार रात पूर्वी बेंगलुरु में भड़की इस हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

इस बीच, बेंगलुरु अर्बन के उपायुक्त जीएन शिवमूर्ति ने डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन का दौरा किया और पुष्टि की कि हिंसा में बहुत सारी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा है। डीसीपी शिवमूर्ति ने कहा, “बीती रात हुई घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। सार्वजनिक संपत्ति को बहुत नुकसान हुआ है। मैं शहर के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि इस घटना से उत्तेजित या परेशान न हों।”

डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों का संप्रदाय विशेष की सशस्त्र दंगाई भीड़ ने पीछा किया और उन्हें आस-पास के इलाकों में शरण लेनी पड़ी, यहाँ तक ​​कि उन्हें सुरक्षाबल के आने का इंतजार करना पड़ा।

इन दंगों में कई मीडियाकर्मी भी घायल हुए, कुछ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। जबकि, कुछ लोगों को संप्रदाय विशेष की भीड़ के रोष का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ को दंगों की स्थिति को कवर करने के दौरान दंगाइयों की हिंसा का शिकार होना पड़ा।

इसके अलावा, पत्थरबाजी के दौरान लगभग 70 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। भीड़ ने उन पर धारदार हथियार भी फेंके। इनमें, 40 घायल पुलिस डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के थे, 10 केजी हल्ली स्टेशन के थे जबकि, शेष 20 अधिकारी आसपास के थानों से थे।

उपद्रवियों ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में स्ट्रीटलाइट्स और सीसीटीवी कैमरों को भी नुकसान पहुँचाया, ताकि वो निश्चिन्त रहें कि पुलिस बाद में उनकी पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने में कामयाब नहीं हो पाएगी।

डीसीपी गेल्ड के वाहन चालक वेलयुधा पर भीड़ ने हथियारों से हमला किया, जिस कारण उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पुलिस कमिश्नर कमल पंत द्वारा किए गए फोन के बाद भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया। भीड़ ने उनके वाहनों को निशाना बनाते हुए उन पर हमला कर दिया और उन्हें प्रतिक्रिया करने तक का समय नहीं दिया।

देवराजीवनहल्ली पुलिस स्टेशन और कडुगोंडानहल्ली पुलिस स्टेशन पर भीड़ ने हमला किया। यह सब तब शुरू हुआ, जब पुलिस अधिकारी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के एक कार्यकर्ता मुज़म्मिल पाशा की शिकायत पर बातचीत कर रहे थे।

मुजम्मिल पाशा ने कांग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन पी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। मुजम्मिल का आरोप था कि नवीन ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट किया था।

संप्रदाय विशेष की दंगाइयों की भीड़ इस बात से आक्रोशित थी कि पुलिस ने नवीन को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया और देखते ही देखते डीजे हॉल पुलिस स्टेशन में हिंसा भड़क उठी। कुछ ही देर बाद जब पुलिस की एक टीम नवीन के घर से वापस आ गई तो संप्रदाय विशेष की भीड़ ये देखकर नाराज हो गई कि पुलिस वैन में उनके साथ नहीं था।

कर्नाटक सरकार के रेवेन्यू मिनिस्टर आर अशोक ने विधानसभा में कांग्रेस नेता श्रीमूर्ति से मुलाकात की और कहा कि हमलावर चाहे जो हों, चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। अशोक का आरोप है कि संप्रदाय विशेष के दंगाई कॉन्ग्रेस विधायक की हत्या करना चाहते थे।

पहले से रची गई थी दंगों की साजिश

रेवेन्यू मिनिस्टर अशोक ने कहा कि इस मामले से बहुत सख्ती से निपटा जाएगा ताकि आगे इस तरह की घटनाएँ न हों। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दंगा भड़का, उससे स्पष्ट होता है कि इसके लिए गहरी साजिश रची गई थी।

अशोक ने कहा- “दंगाई शहर के दूसरे हिस्सों में आग फैलाना चाहते थे। जिस तरह से मूर्ति के घर तोड़फोड़ और लूटपाट हुई, उससे साफ हो जाता है कि हमलावर मूर्ति को मारने के इरादे से आए थे। हम ये पता लगा रहे हैं कि साजिश रचने वाले लोग राज्य के हैं या बाहर के। लेकिन, वे चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि भविष्य में लोग कानून को हाथ में लेने की हिम्मत नहीं करेंगे। हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हिंसा में PFI का हाथ है या SDPI का! जो गुनाहगार है, बो बख्शा नहीं जाएगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

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