Thursday, October 1, 2020
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से इंकार, महीने भर से फरार सुलेमान, मलील, शरीफ को नहीं ढूँढ रही पुलिस: मधुबनी पीड़िता काला देवी के बेटे का आरोप

“मैंने, मेरे भाई ने और गाँव के लोगों ने भी देखा कि मलीन नदाफ ने मेरी माँ के सिर पर दो-तीन बार मारा। इसके बाद उसने इतनी जोर से उनका गला दबाया कि वह बेंच पर से नीचे गिर गईं और उनकी मौत हो गई।" सुरेंद्र ने थाना प्रभारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी पूरी शिकायत ही नहीं लिखी और आधी-अधूरी रिपोर्ट लिखकर आगे भेजा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 5 अप्रैल 2020 को दीप जलाने की वजह से बिहार के मधुबनी जिले में एक 70 वर्षीय महिला काला देवी की हत्या कर दी जाती है। हत्या के आरोपित सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ फरार हैं। इस घटना को एक महीना हो गया है, लेकिन अभी तक न तो आरोपितों को ही गिरफ्तार किया जा सका है और न ही पीड़ित परिवार को ही किसी तरह की मदद दी गई है।

इतना ही नहीं, अभी तक मधुबनी के पीड़ित परिवार को मृतक काला देवी का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी नहीं दिया गया। काला देवी के पुत्र सुरेंद्र मंडल बताते हैं कि वो बार-बार पुलिस स्टेशन जाते हैं और इंसाफ की गुहार लगाते हैं, लेकिन थाना प्रभारी उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। सुरेंद्र ने रहिका थाना प्रभारी राहुल कुमार से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट माँगी, मगर उन्होंने देने से इनकार कर दिया। थाना प्रभारी राहुल कुमार का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा है कि बुजुर्ग महिला की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

जब हमने इस बारे में सुरेंद्र से पूछा तो उन्होंने कहा, “मैंने, मेरे भाई ने और गाँव के लोगों ने भी देखा कि मलीन नदाफ ने मेरी माँ के सिर पर दो-तीन बार मारा। इसके बाद उसने इतनी जोर से उनका गला दबाया कि वह बेंच पर से नीचे गिर गईं और उनकी मौत हो गई।” सुरेंद्र ने थाना प्रभारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी पूरी शिकायत ही नहीं लिखी और आधी-अधूरी रिपोर्ट लिखकर आगे भेजा।

हालाँकि, इस बात की पुष्टि मधुबनी के विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष महेश प्रसाद, बीजेपी जिलाध्यक्ष शंकर झा और बीजेपी मंडल अध्यक्ष प्रभांशु झा उर्फ सोनू ने भी की। इन लोगों का भी यही कहना है कि थाना प्रभारी ने ही लापरवाही दिखाई। उन्होंने सच्चाई छुपाकर गलत रिपोर्ट बनाई। प्रभांशु झा ने बताया कि थाना प्रभारी ने FIR भी दो दिन बाद दर्ज किया। वो भी काफी आना-कानी के बाद, जब आरोपित फरार हो गए।

बीजेपी जिलाध्यक्ष शंकर झा और मंडल अध्यक्ष प्रभांशु झा का कहना है कि थाना प्रभारी राहुल कुमार के काम का पिछला रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही रहा है। उनका अपराधियों के साथ उठना-बैठना रहा है। उन्हें पुलिस स्टेशन में कई बार मुख्य अभियुक्त के साथ बैठे हुए, सेल्फी लेते हुए और वीडियो बनाते हुए देखा गया है। इस मामले में उनका कहना है कि वो आरोपित के साथ मिला हुआ है। उन्होंने बताया कि आरोपित का पैतृक घर पुलिस स्टेशन से मात्र आधा किलोमीटर दूर है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कभी भी वहाँ पर छापा नहीं मारा। आरोपित खुलेआम घूम रहा है। 

इस बारे में जब हमने सुरेंद्र से पूछा तो उन्होंने भी हामी भरी। इसके साथ ही प्रभांशु झा ने बताया कि थाना प्रभारी पीड़ित परिवार के साथ कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। उसके पुलिस स्टेशन में जाने के बाद भी बात नहीं सुनते हैं और 4-5 घंटे तक बैठाने के बाद अगले दिन आने के लिए बोलते हैं। इसी तरह से लगभग 1 महीने से दौड़ा रहे हैं। बिस्फी के पूर्व विधायक और भाजपा नेता हरिभूषण ठाकुर बचौल ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि वो लॉकडाउन की वजह से फिलहाल कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

शंकर झा का भी कहना है कि थाना प्रभारी पर राजद विधायक फैयाज अहमद का दबाव है। कहीं न कहीं थाना प्रभारी प्रभावित हैं। वरना एक गाँव में मात्र दो मुस्लिम घर होने के बावजूद किसी को इतना संरक्षण कैसे मिल सकता है। यह यहाँ के राजद नेताओं की साजिश है। उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, उनका एक नेटवर्क है। खासकर जब घटना हिंदू परिवार के साथ होता है तो पूरे जिले में उनका नेटवर्क सक्रिय हो जाता है और बिना सबूत छोड़े इस तरह से काम करता है कि आपको कानों-कान खबर न हो। मगर फिर भी उनकी पार्टी के सांसद जो कर सकते थे, सब किया और अभी भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय और अपराधी को सजा मिल सके।

हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट तौर पर राजद विधायक का नाम तो नहीं लिया, लेकिन यह आशंका जताई कि उनके कहने पर थाना प्रभारी ने डॉक्टर को पैसे खिलाकर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बदलवाया है। बता दें कि इससे पहले सुरेंद्र मंडल ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि फकरे आलम ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश कर रहे हैं। 

जब हमने महेश प्रसाद, शंकर झा और प्रभांशु झा से पूछा कि उनके क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना हो गई है तो आपलोग क्या कर रहे हैं, तो उनका भी यही कहना था कि लॉकडाउन की वजह से हाथ बँधे हुए हैं। हमें तो पीड़ित परिवार को न्याय भी दिलाना है और कोरोना से भी लड़ना है।

इस सवाल के जवाब में कि लॉकडाउन हटने तक तो घटना के 2 महीने हो चुके होंगे, क्या तब तक फाइल दब नहीं जाएगी, प्रभांशु झा कहते हैं कि चाहे लॉकडाउन हटने में 2-4 या 6 महीने ही क्यों न लग जाए, हम फाइल को दबने नहीं देंगे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद हम इस मामले को उग्र रुप देंगे। अभी हमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना है।

हमने इस बाबत थाना प्रभारी राहुल कुमार का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया। हमने कई बार उनके नंबर पर कॉल किया, मगर हर बार वो किसी न किसी वजह से बाहर थे। इसलिए उनसे सीधा संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद हमने मधुबनी के एसपी, डीएसपी और डीएम से संपर्क किया। डीएम और एसपी ने व्यस्त होने की बात कहकर बात को टाल दिया। वहीं डीएसपी ने कहा कि उनके पास नीचे से फाइल ही नहीं आया है। उनके पास फाइल आएगा तो ही कुछ बता पाएँगी। जब हमने मामले में के बारे में और भी जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने यह कहकर फोन काट दिया कि अगर जानकारी चाहिए तो हमारे ऑफिस आइए। हम फोन पर जानकारी नहीं देते हैं। 

बता दें कि डीएसपी मैडम ने लगभग एक सप्ताह पहले सुरेंद्र मंडल को बयान लिखवाने के लिए बुलाया था। मगर जब वो वहाँ पहुँचा था तो वो ऑफिस में नहीं थीं और उनके स्टाफ ने सुरेंद्र को ऑफिस के अंदर भी नहीं आने दिया। उनसे बोला गया कि जो भी बोलना है, यहीं पर बोलो। इसके बाद सुरेंद्र बाहर से बयान लिखवाकर लौट आए थे। फिर सुरेंद्र ने डीएसपी और आईजी को पत्र लिखकर भी इस स्थिति से अवगत करवाया। हालाँकि, अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सुरेंद्र का कहना है कि उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए और कुछ नहीं।

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