Friday, July 19, 2024
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‘डूब मरो फुलवारी शरीफ के लोगों, असली मुसलमान कब बनोगे’: दो महीने से पटना में चल रही थी दंगा भड़काने की साजिश, पुलिस को जाँच में नहीं मिला कुछ

बताया जा रहा है कि इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) ने इस मामले में बिहार ATS को दानिश अहमद नाम के एक संदिग्ध का नाम, पता और उसका मोबाइल नंबर दिया था। IB की इनपुट के अनुसार, दानिश ही इस तरह नफरत भरे पोस्ट लिखता है और उसे शेयर करता है।

बिहार के पटना (Patna, Bihar) के फुलवारी शरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग सेंटर पर छापेमारी के बाद चरमपंथियों के खतरनाक इरादों का खुलासा है। मुस्लिमों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ-साथ भारत को इस्लामी राष्ट्र में बदलने के लिए तैयार रणनीति एवं कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे।

इस मामले में अब खुलासा हुआ है कि पुलिस को इस बात जानकारी एक महीना पहले ही मिल गई थी कि दानापुर और आसपास के मुस्लिमों को भड़काकर दंगा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए लोगों के मोबाइल पर आपत्तिजनक मैसेज भेजे जा रहे थे। इस संबंध में FIR भी दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई करने से बचती रही।

पिछले महीने की 10 तारीख (10 जून 2022) को थानेदार इकरार अहमद के मोबाइल पर भी एक ऐसा ही मैसेज मिला था। इकरार अहमद के सरकारी मोबाइल नंबर के WhatsApp पर एक पम्फलेट आया। इसमें भड़काने वाली बातेें लिखी हुई थीं और मुस्लिमों से आगे आने के लिए कहा गया था।

इसमें लिखा था, “शर्म करो, डूब मरो फुलवारी शरीफ के लोगों। असली मुसलमान कब बनोगे? सारी दुनिया के मुसलमान आवाज उठा रहे हैं। तुम कब आवाज उठाओगे?” इसके साथ ही एक अपील की गई थी। उसमें कहा गया था, “अपने रब को बाद नमाज-ए-जुमा 10.06.22 को जामा मस्जिद नया टोला पहुँचें और इश्क-ए-रसूल का सबूत दें।”

मैसेज मिलने के बाद फुलवारी शरीफ के थानेदार इकरार अहमद ने 11 जून को एक लिखित बयान देकर IPC की धारा 153A, 295, 295A, 120B और 34 के तहत FIR दर्ज कराई। थानेदार ने कहा था कि पम्फलेट के जरिए दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने, दंगा भड़काने और माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।

इस मामले में पुलिस जाँच करती रही है, लेकिन बिहार पुलिस अपनी स्थापित कार्यशैली की तहत ही आगे बढ़ती रही और किसी नतीजे पर नहीं पहुँची। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन अब तक किसी भी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। जाँच में पुलिस को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

बताया जा रहा है कि इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) ने इस मामले में बिहार ATS को दानिश अहमद नाम के एक संदिग्ध का नाम, पता और उसका मोबाइल नंबर दिया था। IB की इनपुट के अनुसार, दानिश ही इस तरह नफरत भरे पोस्ट लिखता है और उसे शेयर करता है।

इसके बाद बिहार एटीएस ने मोबाइल नंबर की जाँच की तो पता चला कि दानिश अहमद फुलवारी शरीफ के कब्रिस्तान के पास स्थित मुनीर कॉलोनी में रहता है और उसने अपनी पढ़ाई मदरसे से की है। इसके बाद उसे पकड़ा तो गया, लेकिन उसकी काउंसलिंग करके छोड़ दिया गया।

पटना पुलिस की लापरवाही के कारण राजधानी में प्रशासन के नाक के नीचे ट्रेनिंग कैंप चलता रहा। IB के इनपुट को भी पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया और FIR दर्ज कर टाल-मटोल करती रही। प्रधानमंत्री मोदी के पटना यात्रा को लेकर सतर्कता के दौरान देश विरोधी इस गतिविधि का खुलासा हुआ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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