केरल की कोच्चि पुलिस ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और 10 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाली रीजास एम शीबा सिद्दीकी की गिरफ्तारी के खिलाफ बिना अनुमति के प्रदर्शन करने का आरोप है।
यह प्रदर्शन ‘रीजास सॉलिडेरिटी फोरम’ द्वारा आयोजित किया गया था और कप्पन इसमें मुख्य वक्ता था। यह कार्यक्रम हाई कोर्ट जंक्शन के पास आयोजित किया गया था।
पुलिस के अनुसार, इन सभी पर गैरकानूनी सभा, सार्वजनिक रास्ते में बाधा डालना, शांति भंग करना और पुलिस से झड़प करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस सभा के लिए न तो अनुमति ली गई थी और न ही साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की मंजूरी ली गई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रदर्शन में लगभग 30 लोग शामिल थे, जिन्होंने रीजास के समर्थन में नारेबाजी की। जब पुलिस ने उन्हें हटने को कहा तो कथित तौर पर झड़प हो गई और पुलिस ने बल प्रयोग करके भीड़ को हटाया। इसमें दो लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य मौके से फरार हो गए। FIR में जिन लोगों का नाम है, उनमें एडवोकेट प्रमोद पुझनकरा, सीपी राशिद, साजिद खालिद, डॉ हरी, भाबुराज भगवती, अम्बिका, मृदुला भवानी शामिल हैं।
इससे पहले बीजेपी नेताओं ने पुलिस से शिकायत की थी कि सिद्दीकी कप्पन ने अपनी जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है और इस कार्यक्रम को रोका जाना चाहिए। पूर्व DGP और बीजेपी समर्थक टी पी सेनकुमार ने फेसबुक पर लिखा, “जो राजनीतिक पार्टी इस तरह के कार्यक्रमों का विरोध करना चाहिए, वो चुप है क्योंकि कप्पन से करीबी एक व्यक्ति उस पार्टी के मुख्यालय में है। फिर ऐसे उग्रवादियों से हमें सुरक्षा कहाँ से मिलेगी?”
रीजास एम शीबा सिद्दीकी, एक छात्र कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार है, जिसे महाराष्ट्र ATS ने मई 2025 में नागपुर से गिरफ्तार किया था। उस पर ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन कगार (जो एक विरोधी-माओवादी अभियान है) के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट करने और भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप है।
सिद्दीकी कप्पन को अक्टूबर 2020 में हाथरस गैंगरेप केस की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ UAPA लगाया गया था। वो वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।


