Saturday, July 20, 2024
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15 साल के लड़के का पादरी ने घर जाकर किया यौन शोषण, शिकायत के लिए परिजन 5 थाने भटके: 1 साल बाद सुनवाई, 3 पर केस दर्ज

आरोपित पादरी ने पीड़ित लड़के के जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। पीड़ित ने अपनी शिकायत में कहा है कि पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने इस घटना के बारे में पुणे के पादरी थॉमस डाबरे और बॉम्बे के आर्कबिशप कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस को सूचित किया था। हालाँकि, दोनों ने परेरा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की।

महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार (21अक्टूबर 2022) को 15 वर्षीय लड़के का यौन शोषण करने के आरोप में 3 पादरियों के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। इस मामले का मुख्य आरोपित फादर विंसेंट परेरा फरार बताया जा रहा है। जबकि, दो अन्य पादरियों पर इस यौन उत्पीड़न को दबाने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला सितंबर 2021 का है। हालाँकि, पीड़ित लड़के व उसके परिवार वालों की लाख कोशिशों के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। लेकिन, अब एक्टिविस्ट की सहायता के बाद आरोपित पादरियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

यौन शोषण केस की सजा भुगत चुका है पादरी, घर जाकर दूसरे लड़के को निशाना बनाया

रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्षीय लड़के के साथ यौन शोषण का मुख्य आरोपित पादरी विंसेंट परेरा यौन शोषण के एक अन्य मामले में पुणे की यरवदा जेल में 18 महीने बिता चुका है। तब, उसने साल 2018 में पैट्रिक हाई स्कूल में प्रिंसिपल रहते हुए 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र के साथ मारपीट करते हुए अश्लील वीडियो दिखाए थे। इसके बाद, जब वह जमानत पर जेल से बाहर आया तो उसने 15 वर्षीय लड़के को अपने शिकार बनाया है।

हालिया घटना की बात करें तो आरोपित पादरी, पीड़ित लड़के के घर गया था। जहाँ, उसने लड़के का यौन उत्पीड़न किया। पीड़ित ने अपनी शिकायत में कहा है कि पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने इस घटना के बारे में पुणे के पादरी थॉमस डाबरे और बॉम्बे के आर्कबिशप कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस को सूचित किया था। हालाँकि, दोनों ने परेरा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की।

शिकायत लेकर दर-दर भटके परिजन

पीड़ित के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कथित यौन उत्पीड़न होने के बाद अगले तीन माह में शिकायत दर्ज कराने के लिए 5 थानों में गए थे। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। हालाँकि, इसके बाद लेकिन अगस्त में पुणे के दो एक्टिविस्ट से संपर्क करने के बाद शिकायत दर्ज हो सकी है।

एक्टिविस्ट मारुति भापकर और डोमिनिक लोबो ने इस मामले को लेकर अगस्त महीने में पुणे पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया था। इसके बाद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने सितंबर में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में जाकर पीड़ित लड़के के बयान दर्ज करवाए और पुलिस को नोटिस जारी करवाया। एक्टिविस्ट भापकर की शिकायत के जवाब में 30 सितंबर को हडपसर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है और बाद में मामला कोंढवा थाने ले जाया गया है।

नहीं गिरफ्तार हुए आरोपित

इस संबंध में पुणे के पुलिस कमिश्नर का कहना है कि मामले के मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य दो आरोपितों पर लगे आरोपों की जाँच की जा रही है। हालाँकि, कोंढवा थाने के इंस्पेक्टर सरदार पाटिल ने कहा है कि मामले का मुख्य आरोपित परेरा अब भी फरार है चल रहा है। उन्होंने कहा है “परेरा फरार है लेकिन हम उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लेंगे। हमने बिशप और कार्डिनल को गिरफ्तार नहीं किया है क्योंकि ऐसा लगता है कि वे इस कृत्य में शामिल नहीं थे, लेकिन हमने उन्हें कोई क्लीन चिट नहीं दी है। हमने उनके खिलाफ अपराध की जानकारी होने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं करने का मामला दर्ज किया है।”

इस बीच, आरोपित थॉमस डाबरे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है, वह पोप और उनके कर्मचारियों के प्रति आभारी है। वह बोले, “यह पूरी बात मनगढ़ंत है। मैं केवल चर्च कानून के अनुसार कार्य करता हूँ। आपको यह समझना होगा कि मैं उन सिविल अधिकारियों के प्रति आभारी हूँ जिनकी मैं आज्ञा मानता हूँ। लेकिन मैं पोप और उनके कर्मचारियों के प्रति भी आभारी हूँ। मैंने उन्हें मामले की सूचना दी है और मैं वही कर रहा हूँ जो मुझे उनके द्वारा बताया गया था। मेरा काम केवल पुलिस को सूचित करना था, मेरा काम एफआईआर दर्ज करना नहीं था।”

वहीं, इस मामले में पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पुणे के पाँच पुलिस स्टेशनों- हडपसर, कोंढवा, वानावाड़ी, बुंद गार्डन और पुणे रेलवे स्टेशनों पर दिसंबर, जनवरी और फरवरी में शिकायत की, लेकिन कहीं भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। फिर उन्होंने बॉम्बे के आर्कबिशप, कार्डिनल ग्रेसियस से इस मामले में जानकारी दी। इसके बाद, उन्होंने पुणे के फादर को इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए कहा।

चर्च और पुलिस दोनों ने नहीं की मदद: परिवार का आरोप

इसके बाद अप्रैल में, पुणे में फादर विल्फ्रेड फ्रांसिस नाम के एक पादरी ने पुणे के फादर के कहने पर कोंढवा पुलिस स्टेशन पर शिकायत की थी। हालाँकि, पीड़ित के परिजनों के अनुसार पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवार आरोपित पादरी को अच्छी तरह से जानता था। इसलिए ही वह उनके घर चला गया था।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने चर्च और पुलिस दोनों से मदद माँगी थी। लेकिन, किसी ने भी उनका सहयोग नहीं किया। इसके बाद ही उन्हें एक्टिविस्ट से सहायता माँगनी पड़ी।

इस मामले में, पीड़ित परिवार की सहायता करने वाले एक्टिविस्ट मारुति भापकर ने कहा है कि दोनों ही पादरियों आर्कबिशप और कार्डिनल ग्रेसियस को मामले की पूरी जानकारी थी। दोनों ने मुख्य आरोपित को बचाने की कोशिश की है।

वहीं, पीड़ित परिवार की सहायता करने वाले एक अन्य एक्टिविस्ट डोमिनिक लोबो का कहना है “पॉक्सो एक्ट के तहत नियमों के अनुसार, संस्था के प्रभारी व्यक्ति को ऐसे मामलों की पुलिस को रिपोर्ट करने की आवश्यकता होती है। उनमें से किसी ने भी आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस बहुत दबाव में है क्योंकि इस मामले में हाई-प्रोफाइल लोग शामिल हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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