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कोलकाता का पार्क सर्कस एरिया आजादी के बाद से ही इस्लामी कट्टरपंथियों की उपद्रव-हिंसा का रहा केंद्र, पहली बार कसी लगाम: जानें मुस्लिमों ने कैसे अब तक की सरकारों पर बनाए रखा था दबाव

पथराव की घटना पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार बहुत सख्ती से निपटेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बंगाल में अब गुंडागर्दी बिल्कुल नहीं चलने दी जाएगी।

मध्य कोलकाता का पार्क सर्कस इलाका एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार सड़क पर नमाज पढ़ने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगी रोक के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था। इस दौरान अचानक हिंसा भड़क गई और प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई। भीड़ ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की, जिससे कुछ पुलिसवाले भी घायल हो गए हैं।

इस ताजा घटना के बाद पार्क सर्कस को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। दरअसल, यह इलाका पिछले कई सालों से बड़े प्रदर्शनों और भीड़ जुटाने का मुख्य केंद्र रहा है, खासकर तब जब मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं। अब इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि जो लोग भी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार अब किसी भी तरह की हिंसा या अशांति फैलाने की कोशिश को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।

CM शुभेंदु अधिकारी की चेतावनी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पथराव की घटना पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार बहुत सख्ती से निपटेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बंगाल में अब गुंडागर्दी बिल्कुल नहीं चलने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को कानून के तहत कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी गई है। अब वह समय बीत चुका है जब पुलिसवालों को बिना किसी सरकारी समर्थन के अकेले छोड़ दिया जाता था। अब सरकार पुलिस के साथ मजबूती से खड़ी है।

CM शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि कुछ लोगों को पहले की ढीली व्यवस्था की आदत हो गई थी। उन्हें लगता था कि वे कुछ भी करेंगे और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन अब सरकार साफ संदेश देना चाहती है कि पथराव करना, शांति भंग करना या मजहबी नारों की आड़ में तनाव फैलाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस सोशल मीडिया पर नजर रख रही है, क्योंकि ऐसी खबरें आई हैं कि घटना होने से पहले ही इसके बारे में जानकारी इंटरनेट पर डाल दी गई थी।

मुख्यमंत्री ने कोलकाता पुलिस को और मजबूत बनाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को बेहतर सुविधाएँ और गाड़ियाँ दी जाएँगी। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की है कि राज्य में पहले से मौजूद पैरामिलिट्री (अर्धसैनिक बलों) की कंपनियों को कुछ समय के लिए यहीं रहने दिया जाए, क्योंकि उनके अचानक जाने से पुलिस पर काम का दबाव बढ़ सकता है। आखिर में उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे शांति बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें।

पुलिस की कार्रवाई

यह हिंसा पार्क सर्कस सेवन पॉइंट चौराहे के पास हुई, जहाँ सड़क पर नमाज पढ़ने और लाउडस्पीकर की आवाज सीमित करने के सरकारी नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बुलाया गया था। इस दौरान इस्लामी कट्टरपंथी वहाँ इकट्ठा हो गए और सड़क जाम कर दी, जिससे ट्रैफिक रुक गया। खुफिया जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने पहले से ही वहाँ सुरक्षा बल तैनात कर रखा था।

अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही पुलिस ने सड़क से जाम हटाने की कोशिश की, माहौल बिगड़ गया। इस्लामी भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों और वहाँ खड़ी गाड़ियों पर पत्थर और ईंटें फेंकनी शुरू कर दीं, जिससे पुलिस की गाड़ियाँ और कई दूसरी गाड़ियाँ टूट गईं। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को खदेड़ दिया, जिसके बाद वहाँ भारी पुलिस बल तैनात किया गया और ट्रैफिक को दोबारा शुरू कराया गया।

पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है और इलाके में फ्लैग मार्च भी किया है। प्रशासन ने इस घटना को कुछ दिन पहले राजाबाजार में शुक्रवार की नमाज के दौरान हुए विवाद से भी जोड़कर देखा है, जहाँ पुलिस ने सड़क पर नमाज न पढ़ने की सरकारी नीति को लागू करने की कोशिश की थी और तब भी झड़प हुई थी।

दरअसल, नई सरकार ने सड़क पर होने वाली मजहबी गतिविधियों को लेकर बहुत कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी नेताओं का साफ कहना है कि नमाज सिर्फ मस्जिदों के अंदर होनी चाहिए और इससे सड़कों पर आम लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी नीति के तहत प्रशासन अब लाउडस्पीकर की आवाज और सड़कों पर भीड़ जुटाने के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रहा है।

पार्क सर्कस: क्यों बनता है यह बड़े प्रदर्शनों का केंद्र?

पार्क सर्कस में हुई इस घटना ने एक बार फिर इस इलाके के पुराने इतिहास की याद दिला दी है। यह इलाका लंबे समय से बड़े-बड़े प्रदर्शनों और भारी भीड़ जुटाने का मुख्य केंद्र रहा है। जब भी समुदाय से जुड़ा कोई बड़ा आंदोलन होता है, तो पार्क सर्कस उसका मुख्य अड्डा बन जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस इलाके की बनावट और यहाँ की सड़कें ऐसी हैं, जहाँ बहुत ही कम समय में बहुत बड़ी भीड़ आसानी से इकट्ठा हो जाती है।

भौगोलिक नजरिए से देखें तो पार्क सर्कस कोलकाता के सबसे जुड़े हुए इलाकों में से एक है। इसके आसपास कई मुख्य सड़कें हैं और पास में ही घनी आबादी वाली बस्तियाँ भी हैं। इसके अलावा, हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के समय यहाँ वैसे भी भारी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। ऐसे में जब भी कोई सामाजिक या राजनीतिक तनाव होता है, तो यहाँ लोगों को एकजुट करना बहुत आसान हो जाता है। यही वजह है कि पिछले कई सालों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े जितने भी बड़े प्रदर्शन हुए हैं, वे या तो इसी इलाके से शुरू हुए हैं या फिर यहीं आकर उन्हें असली रफ्तार मिली है।

CAA-NRC के खिलफ पार्क सर्कस मैदान बना आंदोलन का बड़ा केंद्र

इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 2020 की सर्दियों में देखने को मिला था, जब नागरिकता कानून (CAA) और NRC के खिलाफ हुए आंदोलन ने पार्क सर्कस मैदान को एक बड़ा केंद्र बना दिया था। दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन से प्रेरणा लेकर यहाँ मुस्लिम महिलाओं ने दिन-रात का धरना शुरू कर दिया था। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि जब तक नागरिकता कानून और NRC से जुड़ी उनकी चिंताएँ दूर नहीं होतीं, वे वहाँ से नहीं हटेंगी।

इस आंदोलन में पार्क सर्कस और उसके आसपास के इलाकों की मुस्लिम महिलाएँ लगातार शामिल हुईं। कई महिलाएँ अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को भी साथ लाई थीं, जबकि छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनका साथ दिया। जैसे-जैसे यह प्रदर्शन बढ़ा, वहाँ नारेबाज़ी होने लगी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। आंदोलन के बड़ा होने पर प्रदर्शनकारियों ने टेंट, शौचालय और लाउडस्पीकर जैसी सुविधाओं की माँग भी की। इस आंदोलन को वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने ‘स्वतंत्रता आंदोलन 2’ यानी दूसरी आज़ादी की लड़ाई का नाम भी दे दिया था।

धरने पर बैठी कई मुस्लिम महिलाओं का कहना था कि उन्होंने इससे पहले कभी किसी राजनीतिक आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन नागरिकता छिन जाने के डर से वे इस बार सड़क पर उतरने को मजबूर हुईं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शन स्थल पर दिल का दौरा पड़ने से समीदा खातून नाम की एक महिला की मौत हो गई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।

इस दौरान कई बड़े कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने भी पार्क सर्कस मैदान का दौरा किया। यह प्रदर्शन कोलकाता में सीएए (CAA) के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा बन गया और इसके बाद पूरे देश में पार्क सर्कस की चर्चा होने लगी।

रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में बड़ी रैली

पार्क सर्कस एक बार फिर उस समय एक बड़े आंदोलन का केंद्र बना, जब म्यांमार वापस भेजे जा रहे रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में एक हजार से ज्यादा मुस्लिम लोग इकट्ठा हुए। म्यांमार सरकार द्वारा रोहिंग्याओं को वापस बुलाने के फैसले के खिलाफ कई मुस्लिम संगठनों ने मिलकर एक बड़ी रैली निकाली। यह मार्च पार्क सर्कस मैदान से शुरू हुआ था और वहाँ से होते हुए म्यांमार के दूतावास (कंसुलेट ऑफिस) की तरफ बढ़ा था।

इस प्रदर्शन के बाद बंगाल में भारी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। बीजेपी नेताओं ने तब की राज्य सरकार (ममता बनर्जी सरकार) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे के जरिए वोट बैंक की राजनीति कर रही है। इस बड़ी रैली के बाद पार्क सर्कस की यह पहचान और मजबूत हो गई कि जब भी मुस्लिम संगठनों से जुड़ा कोई मुद्दा होता है, तो भारी भीड़ जुटाने के लिए इसी इलाके को चुना जाता है।

नई सरकार के आते ही बदल गई पुलिस की सख्ती

पुलिस ने पार्क सर्कस मामले में जो कार्रवाई की, उसे नई बीजेपी सरकार के समर्थक एक बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि टीएमसी (TMC) का राज खत्म होने के बाद अब प्रशासन के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। नई सरकार का साफ कहना है कि अब कानून-व्यवस्था को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जो लोग भी सड़कें जाम करेंगे, पुलिस पर पत्थर फेंकेंगे या हिंसा फैलाएँगे, उनके खिलाफ तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के समर्थकों का कहना है कि पहले ऐसे मामलों में शामिल लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती थी और वे आसानी से बच जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब गड़बड़ी करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जा रहा है, संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है और पुलिस का सख्त रूप साफ दिखाई दे रहा है। संवेदनशील जगहों पर पुलिस का फ्लैग मार्च करना, सड़कों पर भीड़ जमा करने से रोकना और तुरंत एक्शन लेना इस नए बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण हैं।

एक बार फिर पार्क सर्कस राजनीति और चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस पूरी घटना ने यहाँ के पुराने इतिहास, पुराने आंदोलनों और अब सरकार की नई कड़क नीति को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तरफ से प्रशासन ने बिल्कुल साफ संदेश दे दिया है कि कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्वक काम करने की पूरी आजादी है, लेकिन अगर किसी ने भी प्रदर्शन की आड़ में हिंसा करने या शहर की शांति भंग करने की कोशिश की, तो पुलिस उसे किसी भी कीमत पर बख्शेगी नहीं।

(यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है। अंग्रेजी की रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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Divya Bharti
Divya Bharti
I am a digital journalist specializing in political analysis. My goal is to break down complex stories into easy, engaging reads for everyone.

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