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छांगुर पीर ने सरकारी तालाब को पाट कर की 30000 स्क्वायर फीट जमीन पर अवैध प्लॉटिंग, खड़ी की महँगी प्रॉपर्टी: धर्मांतरण के सरगना के नेटवर्क की हो रही पड़ताल, खुल रहीं परतें

छांगुर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर-फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की साजिश करने वाले सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करने के साथ-साथ छांगुर अपने काम को अंजाम देने के लिए भी कई तरकीबें खोजता था।

इसके साथ ही वह सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छांगुर ने उतरौला में कई लोगों के नाम पर पहले जमीन खरीदी और फिर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया। इसके लिए उन जमीनों पर गरीबों का नाम दिखा कर कागजों में हेर-फेर भी की।

उतरौला के पटेल नगर में एक सरकारी तालाब कुंडवा को भी छांगुर ने पटवा कर वहाँ पर लगभग 30,000 वर्ग फीट में अवैध प्लॉटिंग भी करवाई। इसके लिए गरीबों के नाम पर की गई जमीन को छांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर 93 लाख में खरीद ली।

लाताब पाटने के लेकर उस समय के ADM बलरामपुर ने उतरौला की नगर पालिका को लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आजतक की रिपोर्ट्स के अनुसार, उस जगह पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने छांगुर को लेकर कई खुलासे किए। छांगुर ने सांसद निधि से बनी पुलिया को भी अपने कब्जे में कर बंद कर दिया। इसकी वजह से बारिश के समय पर वहाँ के लोगों को काफी परेशानी होती है।

लड़कियाँ प्रोजेक्ट, धर्मांतरण की शर्तें

छांगुर के शब्दकोष में लड़कियों के लिए ‘प्रोजेक्ट’, धर्मांतरण के लिए ‘मिट्टी पलटना’, छांगुर से मिलने के लिए ‘दीदार’ और ब्रेन वॉश के लिए ‘काजल करना’ जैसे शब्द शामिल थे। इन कोडवर्ड्स का उपयोग करके वह अपने ज्यादातर मिशन को अंजाम देता था।

छांगुर लड़कियों को निकाह का वादा करके धर्मांतरित करता था और नए जीवन को लेकर कई शर्तें बताईं जाती थीं। इसके बाद युवाओं और लड़कियों को विदेश भेजने और पैसों का लालच दिखाया जाता था।

सभाओं में आते थे विदेशी

छांगुर पीर का एक बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था। ये नेटवर्क बलरामपुर के चाँद औलिया दरगाह से चलाता था। यहाँ पर ही छांगुर नियमित तौर पर सभा आयोजित करता था। इसमें भारत के अंदर के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल होते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच में यूपी ATS को छांगुर पीर के ठिकाने से ‘शिजर-ए-तैयबा’ नाम की किताब मिली है। यह किताब खुद छांगुर पीर ने छपवाई थी। इस किताब का मकसद लोगों का ब्रेनवॉश करना था।

किताब में ऐसे लोगों का जिक्र किया गया है, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे युवाओं को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जाए। यह किताब विदेशी पैसों से छपी थी।

इसके अलावा एजेंसियों के अनुसार, छांगुर पीर ‘मिशन आबाद’ का हिस्सा था। धर्मांतरण के बदले छांगुर पीर को विदेश से पैसा मिलता था। साथ ही छांगुर पीर के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से कनेक्शन थे। छांगुर पीर हाल ही में काठमांडू में हुए एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था।

जाँच में आ सकती है कई नई बातें

जानकारी के अनुसार, छांगुर पीर का संबंध कई अन्य संगठनों से भी रहा है। जाँच में पता चला है कि उसका जुड़ाव सऊदी अरब इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, दावत-ए-इस्लाम और इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल जैसे संगठनों से था।

छांगुर को लेकर लगातार जाँच चल रही है। ATS इस मामले पर कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं। इस्लामिक एंगल के साथ फंडिंग, क्षेत्रीय और अन्य पहलुओं पर भी सुरक्षा एंजेंसियाँ लगातार पड़ताल में जुटी हुई हैं। वहीं ED भी छांगुर के चल अचल संपत्तियों की पड़ताल के लिए छांगुर के परिवार-जानने वालों और बैंकों से संपर्क साध रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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