मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामला: ब्रजेश ठाकुर समेत 19 दोषी, श्मशान में खुदाई के दौरान मिली थी हड्डियों की पोटली

इस मामले में CBI ने 21 आरोपितों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाखिल किया था। आरोप-पत्र में आरोपितों के ख़िलाफ़ बलात्कार, आपराधिक साज़िश व बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो) की धारा-6 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बिहार के बहुचर्चित मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले में सोमवार (20 जनवरी) को दिल्ली के साकेत स्थित विशेष कोर्ट ने आरोपितों के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया। कोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम कांड के मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत 19 आरोपितों को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपित को बरी कर दिया। अब दोषियों की सज़ा पर 28 जनवरी को बहस की जाएगी।

सोमवार को फ़ैसले की चौथी तारीख थी। आरोपितों के ख़िलाफ़ यह फ़ैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत की तरफ से सुनाया गया। इस मामले में CBI ने 21 आरोपितों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाखिल किया था। आरोप-पत्र में आरोपितों के ख़िलाफ़ बलात्कार, आपराधिक साज़िश व बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो) की धारा-6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप सिद्ध होने पर प्रावधान के तहत आरोपितों को कम से कम 10 साल की जेल व अधिकतम उम्रक़ैद की सज़ा हो सकती है।

दोषियों के नाम

  • ब्रजेश ठाकुर (संरक्षक)
  • इंदु कुमारी (अधीक्षिका)
  • मीनू देवी (हाउस मदर) 
  • मंजू देवी (काउंसलर)
  • चंदा देवी (हाउस मदर)
  • नेहा कुमारी (नर्स)
  • किरण कुमारी (हेल्पर) 
  • हेमा मसीह (प्रोबेशनरी अधिकारी) 
  • रवि रोशन (निलंबित सीपीओ- बाल संरक्षण पदाधिकारी) 
  • विकास कुमार (सीडब्लूसी- बाल कल्याण समिति सदस्य) 
  • रोजी रानी (तत्कालीन सहायक निदेशक)
  • विजय कुमार तिवारी (ब्रजेश का ड्राइवर) 
  • गुड्डू कुमार (रसोईया)
  • कृष्णा कुमार राम (सफाईकर्मी) 
  • रामानुज ठाकुर (गेटकीपर)
  • साइस्ता परवीन उर्फ़ मधु (ब्रजेश की क़रीबी) 
  • अश्विनी कुमार (कथित डॉक्टर)
  • दिलीप वर्मा (सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष) 
  • रामाशंकर सिंह उर्फ़ मास्टर साहब

इनके अलावा, विक्की जोकि मधु का भाँजा है, उसे कोर्ट ने बरी कर दिया और प्रेमिला (कथित डॉक्टर) अभी भी फ़रार है।

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दरअसल, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले में 4 मई, 2019 को CBI ने सुप्रीम कोर्ट में 11 लड़कियों के मर्डर की आशंका जताई थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफ़नामे में सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि जाँच के दौरान दर्ज किए गए पीड़ितों के बयान में 11 लड़कियों के नाम सामने आए थे, जिनकी आरोपितों ने कथित रूप से हत्या की थी। जाँच एजेंसी के मुताबिक़ एक आरोपित के कहने पर श्मशान के एक खास स्थान की खुदाई की गई, जहाँ से हड्डियों की पोटली बरामद की गई थी।

ग़ौरतलब है कि बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम में कई लड़कियों का कथित रूप से बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया गया था और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के बाद यह मामला सामने आया था। इसके बाद मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी और एजेंसी ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दायर किया था। फ़िलहाल, मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर, साइस्ता परवीन उर्फ़ मधु समेत 20 आरोपित जेल में हैं।

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