Homeदेश-समाजराजीव गाँधी अस्पताल में कोरोना से जरनैल सिंह की मौत, 2009 में चिंदबरम पर...

राजीव गाँधी अस्पताल में कोरोना से जरनैल सिंह की मौत, 2009 में चिंदबरम पर जूता फेंक चर्चा में आए थे

अगस्त 2020 में हिन्दू देवी-देवताओं पर किए गए आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के कारण जरनैल सिंह को आप ने सस्पेंड कर दिया था, तब से वे राजनीति से दूर थे।

पत्रकार से नेता बने जरनैल सिंह का शुक्रवार (14 मई 2021) को दिल्ली में निधन हो गया। 47 साल के जरनैल सिंह कोरोना संबंधित जटिलताओं के कारण बीते 12-13 दिन से राजीव गाँधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती थे। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक रहे सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम पर जूता फेंक चर्चा में आए थे। वे 2015 में राजौरी गार्डन से विधायक चुने गए थे। पेशे से पत्रकार और लेखक जरनैल सिंह ने 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों के साथ काम किया था।

सिंह अप्रैल के आखिरी सप्ताह में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। इसके बाद उन्हें राजीव गाँधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया था जहाँ शुक्रवारको उनकी मृत्यु हो गई

सिंह का नाता विवादों से भी रहा। अप्रैल 2009 में कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को 1984 के सिखों दंगों में क्लीनचिट दिए जाने पर उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर जूता फेंका था। इस घटना के बाद जरनैल सिंह को उनके संस्थान ने निकाल दिया था। उस समय सिंह ने कहा था कि उनके विरोध करने का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन अपने किए के लिए वे माफी नहीं माँगेंगे।

2015 में विधायक बनने वाले जरनैल सिंह ने 2014 में पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके अलावा उन्होंने पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था। वे दिल्ली में पंजाबी अकादमी का उपाध्यक्ष भी रहे थे। अगस्त 2020 में हिन्दू देवी-देवताओं पर किए गए आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के कारण जरनैल सिंह को आप ने सस्पेंड कर दिया था, तब से वे राजनीति से दूर थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अगर विधायिका भी माँगने लगे जस्टिस जामदार जैसी छूट तो… बॉम्बे हाईकोर्ट की ‘वॉशिंग मशीन’ और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ जैसी टिप्पणी कितनी सही?

जस्टिस जामदार ने हॉर्स ट्रेडिंग, पाला बदलने और ‘वॉशिंग मशीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। लेकिन क्या न्यायपालिका अपने ऊपर कटाक्ष स्वीकार करेगी?

Uber, ओला, Rapido… एक ही जगह का किराया बार-बार क्यों बदलता रहता है?, कैसे बचाएँ अपनी जेब के पैसे

ओला, Uber या Rapido जैसी ऐप्स का सिस्टम एक ऐसे एल्गोरिदम से चलता है जिसे सिर्फ मुनाफा और संतुलन समझ आता है। जानें कैसे स्मार्ट यूजर बनें।
- विज्ञापन -