Homeदेश-समाजMP में पुलिस के सामने मरीज़ के परिजनों ने की डॉक्टर की पिटाई, वीडियो...

MP में पुलिस के सामने मरीज़ के परिजनों ने की डॉक्टर की पिटाई, वीडियो हुआ Viral

अश्चर्य की बात तो यह है कि वहाँ पुलिस भी मौजूद थी, बावजूद इसके परिजन डॉक्टर को थप्पड़ मारने से बाज नहीं आए। इसी से पता चलता है कि दूसरों को जीवनदान देने वाले डॉक्टर मध्य प्रदेश में ख़ुद कितने सुरक्षित हैं।

मध्य प्रदेश के भिंड में एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की पिटाई किए जाने की ख़बर सामने आई है। दरअसल, अटेर के नावली हार गाँव के निवासी लवली यादव का किसी से पुराना विवाद था। इस विवाद के चलते सोमवार (1 जुलाई 2019) को कुछ लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। 

पुलिस की मौजूदगी में डॉक्टर को थप्पड़ मारते परिजन

पुलिस को इस मारपीट की जब सूचना मिली तो वो घटना-स्थल पर पहुँची। घायल अवस्था में पुलिस लवली को एमएलसी के लिए ज़िला अस्पताल ले गई। वहाँ पहुँचकर लवली के परिजनों ने पहले तो डॉक्टर से अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया और इसके बाद वो पुलिस के सामने ही डॉक्टर के साथ हाथापाई पर उतर आए।

डॉक्टर की पिटाई का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस पूरे घटना में आप देख सकते हैं कि मरीज़ के साथ आए परिजनों ने किस तरह से डॉक्टर रुम में ही डॉक्टर की सरेआम पिटाई कर दी। अश्चर्य की बात तो यह है कि वहाँ पुलिस भी मौजूद थी, बावजूद इसके परिजन डॉक्टर को थप्पड़ मारने से बाज नहीं आए। इसी से पता चलता है कि दूसरों को जीवनदान देने वाले डॉक्टर मध्य प्रदेश में ख़ुद कितने सुरक्षित हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

JNU छात्रों को बांग्लादेश की तर्ज पर उकसा रही जिहादन आरफा, राहुल गाँधी ने DU को धमकाया: जानिए कैसे छात्रों को हिंसा की तरफ...

राहुल गाँधी और आरफा खानुम का यूनिवर्सिटी की एडवाइजरी का न सिर्फ विरोध करना, बल्कि धमकाया और छात्रों को उकसाना बांग्लादेश जैसा ही है।

‘प्रतिरोध की राजनीति’ से ‘सड़क की लोकतांत्रिक राजनीति’ तक: योगेंद्र यादव, ये भीड़-तंत्र को सामान्यीकृत करने की खतरनाक कोशिश

क्या योगेंद्र यादव की 'प्रतिरोध की राजनीति' लोकतांत्रिक विरोध है या भीड़तंत्र को वैधता देने की कोशिश?क्या सड़क को संसद से ऊपर रखने की तैयारी?
- विज्ञापन -