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₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी फंडिंग और फर्जी रजिस्ट्री: छांगुर पीर के 22 अकाउंट खंगालने के बाद खुली सारी पोल; ‘रशीद शाह’ को सौंपी गई थी ‘मिशन धर्मांतरण’ की जिम्मेदारी

अब तक की जाँच में ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण मिल चुके हैं। ED को विदेशी संस्थाओं से संबंध, विदेशी मुद्रा, फर्जी रजिस्ट्री और संपत्तियों की खरीद के कई सबूत मिले हैं। जाँच अब कई राज्यों और इंटरनेशनल कनेक्शन की तरफ बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में छांगुर पीर उर्फ जलालुद्दीन शाह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। छांगुर पीर ने विदेशों से आए पैसे को जमीनों के सौदों में लगाकर काले धन को सफेद किया।

अब तक की जाँच में ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण मिल चुके हैं। ED को विदेशी संस्थाओं से संबंध, विदेशी मुद्रा, फर्जी रजिस्ट्री और संपत्तियों की खरीद के कई सबूत मिले हैं। जाँच अब कई राज्यों और इंटरनेशनल कनेक्शन की तरफ बढ़ रही है।

अवैध फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की जाँच में पता चला है कि छांगुर पीर को विदेशों से फंडिंग मिलती थी। इन पैसों को जमीन की खरीद-फरोख्त में इस्तेमाल करके सफेद किया जाता था। वे रजिस्ट्री में सही कीमत नहीं दिखाते थे, बल्कि पहले से तय की गई कीमत लिखते थे। इस तरीके से बैंकों से आसानी से पैसा निकाला जाता था और काले धन को वैध दिखाया जाता था।

ED ने छांगुर पीर और उसके करीबियों के 22 बैंक खातों की जाँच की। इसमें करीब ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण मिले। इनमें छांगुर पीर के अलावा नवीन रोहरा और उसकी बीवी नीतू उर्फ नसरीन की भी भूमिका पाई गई है।

छापों में क्या मिला?

जानकारी के मुताबिक, जाँच में खुलासा हुआ कि छांगुर पीर को मिले पैसों से यूपी और महाराष्ट्र में कई प्रॉपर्टी खरीदी गई। ज्यादातर संपत्तियाँ नवीन और नसरीन के नाम पर हैं। एक आलीशान कोठी बलरामपुर में भी बनाई गई, जहाँ से धर्मांतरण का पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था।

ED ने बलरामपुर, लखनऊ और मुंबई में कुल 15 ठिकानों पर छापे मारे। जाँच में कई संपत्ति दस्तावेज, फर्जी रजिस्ट्री, विदेशी खातों और छांगुर की विदेश यात्रा से जुड़े कागजात मिले। बलरामपुर के एक बुटीक में छिपाए गए दस्तावेज भी मिले, जिसे सील कर दिया गया है।

‘मिशन धर्मांतरण’ की जिम्मेदारी रशीद को

नवीन रोहरा के सहयोगी शहजाद शेख के फोन से क्रोएशिया की मुद्रा ‘कुना‘ की तस्वीर मिली है। ED को शक है कि धर्मांतरण रैकेट में विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल हुआ। इसके पीछे क्रोएशिया, पनामा और अन्य विदेशी नेटवर्क से लिंक होने की आशंका है।

छांगुर पीर की गिरफ्तारी से पहले ही उसने अपने साथी रशीद शाह को ‘मिशन धर्मांतरण‘ की जिम्मेदारी सौंप दी थी। रशीद शाह ने छांगुर के भतीजे के साथ मिलकर दोबारा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की। STF ने इसे समय रहते पकड़ा और रशीद शाह को गिरफ्तार कर लिया।

पुराने साथियों को जोड़ने की कोशिश

रशीद शाह ने छांगुर पीर की कोठी में रह चुके 55 लोगों से फिर से संपर्क साधा। माना जा रहा है कि ये सभी पहले भी धर्मांतरण अभियान में शामिल रहे थे। छांगुर का प्रभाव अब भी कमजोर नहीं हुआ है।

ED और STF दोनों मिलकर जांँच कर रहे हैं कि विदेशों से आए पैसे का इस्तेमाल किन-किन कार्यों में हुआ। बैंक दस्तावेजों, जमीन के सौदों और डिजिटल डेटा से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जाँच अब सिर्फ यूपी तक नहीं, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों तक फैल चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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