Homeदेश-समाजभगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पौराणिक मंदिर में बनाई अश्लील वीडियो, दिलशाद और अजीम पर...

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पौराणिक मंदिर में बनाई अश्लील वीडियो, दिलशाद और अजीम पर यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR: बाइकों से शहर में भरता है कुलाँचे

जिस मंदिर में दिलशाद और अजीम ने रील के नाम पर फूहड़ता फैलाई है, वह अमरोहा के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर शहर और आसपास के हिन्दुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। इस मंदिर को भगवान कृष्ण के समय का माना जाता है। कहा जाता है कि वासुदेव मंदिर में साक्षात् कृष्ण का वास होता है।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में हिन्दुओं के एक पौराणिक मंदिर के अंदर अश्लील रील बनाने का मामला सामने आया है। रील बनाने का आरोप अमरोहा के 2 मुस्लिम यूट्यूबरों- दिलशाद और अजीम पर लगा है। इस घटना से हिन्दू समाज में नाराजगी फ़ैल गई है। पुलिस ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मामला अमरोहा के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ शुक्रवार को पुलिस सब इंस्पेक्टर परशुराम ने अपने ही थाने में एक तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया कि गुरुवार (1 अगस्त) से पब्लिक एप पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक मंदिर जैसे दिखाई देने वाले एक भवन में 2 युवक दिखाई दे रहे हैं। इसमें से एक युवक ने महिलाओं के कपड़े पहन रखे हैं।

शिकायतकर्ता द्वारा जब इस वीडियो की जाँच की गई तो वीडियो बनाने वाली जगह अमरोहा शहर के पौराणिक वासुदेव मंदिर के तौर पर चिन्हित हुई। पुलिस का मानना है कि दोनों आरोपितों ने धर्मस्थल पर अश्लील वीडियो बनाए हैं। साथ ही इसे इंटरनेट पर वायरल भी किया जा रहा है। आगे की जाँच में पुलिस को पता चला कि वीडियो में दिख रहे एक आरोपित का नाम दिलशाद है।

दिलशाद के अब्बा का नाम कमरुद्दीन है। वहीं दूसरे आरोपित का नाम अजीम है। अजीम और दिलशाद, दोनों ही अमरोहा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं। पुलिस ने धर्मस्थल पर इन दोनों द्वारा दिखाई गई अश्लीलता को अपराध की श्रेणी में माना है। इसके बाद परशुराम की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार (2 अगस्त) को दिलशाद और अजीम को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली।

दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई गई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपितों के खिलाफ जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपितों द्वारा अश्लील वीडियो मंदिर के परिसर में बनाया गया है। दिलशाद लड़की बने अजीम से मंदिर में घुमाने की भी बात करता सुना जा सकता है।

फर्राटे मारता है बिना नंबर की बाइक से

अश्लीलता फैलाने का मुख्य आरोपित दिलशाद सोशल मीडिया पर जॉर्डन DS नाम से हैंडल चलाता है। वह फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ख़ासा सक्रिय रहता है। दिलशाद ने कई हिन्दू लड़कियों के साथ भी रील्स बनाई हैं। वह स्पोर्ट्स बाइक से अमरोहा में फर्राटे मारते हुए सोशल मीडिया पर रील शेयर करता है। रील्स में इस्तेमाल बाइक पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दिखता है।

दिलशाद की रील्स में लाल रंग की एक स्पोर्ट्स बाइक और सफेद रंग की दूसरी बाइक अक्सर दिखाई पड़ती है। उसने रील्स बनाने के लिए अमरोहा में अपना खुद का स्टूडियों बना रखा है। यहीं से वो गानों के साथ अपनी बनाई गई रील्स की एडिटिंग करता है। फिलहाल इस मामले में नेटिजंस ने भी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

अमरोहा में हिन्दुओं का सबसे पवित्र धर्मस्थल है वासुदेव मंदिर

जिस मंदिर में दिलशाद और अजीम ने रील के नाम पर फूहड़ता फैलाई है, वह अमरोहा के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर शहर और आसपास के हिन्दुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। इस मंदिर को भगवान कृष्ण के समय का माना जाता है। कहा जाता है कि वासुदेव मंदिर में साक्षात् कृष्ण का वास होता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर फैलाया जा रहा ‘अर्धसत्य’: इसे कानूनी वजहों से ZEE5 ने हटाया, सरकार ने नहीं लगाया कोई बैन; जानिए पूरा...

सतलुज पर सरकार ने बैन नहीं लगाया बल्कि फिल्म पहले IT नियम, 2021 के नियम 9 के तहत ZEE5 पर रिलीज हुई और बाद में उसी व्यवस्था के तहत उसे हटा भी दिया गया।

बाबू जगजीवन राम: वो दलित नेता जिन्हें कॉन्ग्रेस और लेफ्ट से कभी उनका हक नहीं मिला, क्योंकि वे हिंदू धर्म से नहीं करते थे...

डॉ. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था से तंग आकर बौद्ध धर्म अपनाया, तो जगजीवन राम जीवनभर हिंदू समाज के भीतर रहकर ही कुरीतियों को सुधारने के पक्षधर रहे।
- विज्ञापन -