Sunday, April 14, 2024
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‘आप इलाहाबाद HC जाइए, हम यहीं हैं’: SC की कपिल सिब्बल को सलाह, कथित पत्रकार व PFI मेम्बर सिद्दीक कप्पन की रिहाई याचिका रद्द

अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीक कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 12, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas corpus) याचिका को स्थगित कर दिया है। इस याचिका में केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन की रिहाई की माँग की गई थी। बता दें कि सिद्दीक कप्पन, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए चार पीएफआई सदस्यों में से एक है। ये लोग यूपी में हाथरस मामले को लेकर जाति आधारित अशांति और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की योजना बनाई थी।

याचिका को चार सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पत्रकार के रूप में काम कर रहे पीएफआई के सक्रिय सदस्य सिद्दीक कप्पन का प्रतिनिधित्व करते हुए सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वे उन्हें संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उससे संपर्क करने दें। सिब्बल ने अदालत को बताया कि जब हिरासत में लिया गया तो यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। 

हालाँकि, बाद में, एक प्राथमिकी दर्ज की गई और तब गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लागू किया गया था। उन्होंने न्यायालय को सूचित किया कि उत्तर प्रदेश राज्य का कोई भी न्यायालय याचिकाकर्ता को जमानत नहीं देगा। कपिल सिब्बल ने अनुरोध करते हुए कहा, “हमें आप अनुच्छेद 32 के तहत संपर्क करने दें।” सिब्बल कप्पन मामले में केरल पत्रकार संघ का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सिब्बल से कहा कि वे इस मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँ। सिब्बल ने दलील दी कि इसका मतलब है कि याचिकाकर्ता फिलहाल जेल में ही रहेगा। अदालत ने कहा, “आप उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँ हम यहीं पर हैं, अगर कुछ गलत होता है तो।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की आड़ में मथुरा से गिरफ्तार हुए दंगे की साजिश रचने वाले 4 आरोपितों के खिलाफ बुधवार (अक्टूबर 06, 2020) को मथुरा में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और राजद्रोह के तहत केस दर्ज किया गया, जिनमें से एक केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन भी हैं।

दर्ज FIR में बताया गया कि अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीक कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।

पुलिस ने सोमवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कार्यकर्ताओं को मथुरा से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वे सभी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) से जुड़े हुए हैं और दिल्ली से आकर कार में हाथरस की ओर बढ़ रहे थे जहाँ उन्हें रोका गया। पुलिस ने आरोप लगाया था कि वे सरकार की छवि खराब करने और इलाके में माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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