Sunday, June 26, 2022
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गुजरात: लव जिहाद की पहली पीड़िता ‘गायब’, समीर कुरैशी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का लगाया था आरोप

गायब होने से पह​ले पीड़िता ने स्थानीय अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि उसने दबाव में आकर धर्म परिवर्तन की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी।

गुजरात में ‘धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021’ लागू होने के बाद 18 जून 2021 को इस कानून के तहत पहला लव जिहाद का पहले मामला दर्ज हुआ था। एक 24 वर्षीय महिला ने अपने पति समीर कुरैशी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया था। अब उस महिला के गायब होने की खबर आ रही है। वडोदरा पुलिस शिकायत करने वाली महिला की तलाश में है। महिला ने शिकायत करने के कुछ दिन बाद यह कहा था कि उस पर झूठी शिकायत दर्ज कराने का दबाव बनाया गया था।

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने स्थानीय अदालत में हलफनामा दाखिल किया और बताया कि उसने दबाव में आकर धर्म परिवर्तन की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। हालाँकि शिकायत दर्ज कराने वाली पीड़िता ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान भी दर्ज कराया था कि एफआईआर में कुरैशी के खिलाफ दी गई जानकारी पूरी तरह से सही है। अब वडोदरा के एसीपी डीटी राठौड़ ने भी फ्री प्रेस जर्नल से चर्चा के दौरान इस बात कि पुष्टि की है कि पीड़िता ने अपना बयान बदल दिया है और उन्होंने यह भी कहा है कि एक बार पीड़िता से बात हो जाए तो सच्चाई सामने आ पाएगी।

राठौड़ ने यह भी कहा कि पुलिस, पीड़िता की खोज आरोपित की तरह नहीं कर सकती है इसलिए पुलिस ने पीड़िता के परिवार वालों से कह दिया है कि जब भी वह वापस आए तो उसे पुलिस के पास लाया जाना चाहिए। राठौड़ ने यह भी बताया कि अभी तक यह ज्ञात नहीं है कि पीड़िता ने किस पक्ष के दबाव में आकर झूठी शिकायत दर्ज कराई थी और यह भी पता नहीं है कि क्या कोई और कारण है? हालाँकि रिपोर्ट में यह बताया गया है कि पुलिस के सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि पीड़िता के द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत और बाद में लोकल अदालत में दाखिल गए हलफनामे में पीड़िता के हस्ताक्षर अलग-अलग हैं।

ज्ञात हो कि गुजरात में वडोदरा पुलिस ने समीर कुरैशी को गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत गिरफ्तार किया था। समीर पर खुद को ईसाई बताकर पीड़िता को प्रेम जाल में फँसाने का आरोप था। साल 2019 में सोशल मीडिया पर वह पीड़िता से सैम मार्टिन के नाम से मिला था।

उस समय पीड़िता ने युवक का धर्म देखते हुए उससे शादी करने के लिए हाँ कर दिया था। लेकिन बाद में पता चला कि शादी ईसाई रीति रिवाज से नहीं, बल्कि मुस्लिम रीति रिवाजों से हो रही थी। शादी के नाम पर निकाह का आयोजन हुआ था। निकाह के बाद पहले पीड़िता का नाम बदलवाया गया और फिर उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया जाने लगा। समीर अपनी बात मनवाने के लिए महिला को जातिसूचक गालियाँ भी देता था। महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि उसके साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल भी किया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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